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येसु और उनके शिष्य येसु और उनके शिष्य 

प्रेम में एक साथ, हम ख्रीस्तीय दुनिया बदल सकते हैं

संत पापा फ्रांसिस ने ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के पहल, योहन 17 आंदोलन के सदस्यों को एक संदेश भेजा जो ख्रीस्तीय कलीसियाओं के बीच एकता की ओर मैत्रीपूर्ण एकजुटता का निर्माण करने में मदद करता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 10 जून 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने योहन 17 मूंवमेंट को प्रेषित एक वीडियो संदेश में कहा कि हर चीज की उत्पति केवल भाईचारा पूर्ण मुलाकात से हुई है। प्रेम दुनिया को बदल सकती है किन्तु यह पहले हमें बदलती है।

योहन 17 मूंवमेंट के सदस्यों ने बुधवार को न्यूयॉर्क के योनकर्स स्थित संत जोसेफ सेमिनरी और कोलेज में दो दिवसीय आध्यात्मिक साधना की शुरू किया।  

योजन 17 मूवमेंट की शुरूआत पेंटेकोस्टल पास्टर जोए तोसिनी ने 2013 में की थी। गैर काथलिक होते हुए भी उन्होंने नवनिर्वाचित संत पापा फ्राँसिस के लिए प्रार्थना करने की तीव्र इच्छा व्यक्त की थी। तोसिनी कई बार संत पापा फ्रांसिस से मुलाकात कर चुके हैं।

आंदोलन का नाम संत योहन रचित सुसमाचार के अध्याय 17 से लिया है जहाँ येसु प्रार्थना करते हैं, "कि वे एक हो जाएँ।" आंदोलन की आध्यात्मिक साधना की विषयवस्तु है, "संबंधपरक मेल-मिलाप, ख्रीस्तीय मेलमिलाप का एक नया रास्ता।"

एक पिता के बच्चे

स्पानी भाषा में प्रेषित अपने संदेश में संत पापा ने बतलाया कि योहन 17 आंदोलन उन लोगों का है जो खाने की मेज पर कॉफी, भोजन या आईस्क्रीम लेते हुए महसूस करते हैं कि वे भाई-भाई हैं। वे रंग, राष्ट्रीयता, जन्मस्थान अथवा विश्वास के कारण ऐसा महसूस नहीं करते बल्कि इसलिए कि वे भाई हैं, "एक ही पिता की संतान हैं।" और यदि गरीबी या युद्ध के कारण खाने की मेज, कॉफी, आइस्क्रीम न हो, तब भी हम भाई हैं, कहने के लिए हमें याद रखना चाहिए। "हमारे जन्म स्थान, राष्ट्रीयता एवं त्वचा के रंग पर ध्यान दिये बिना हमें सोचना चाहिए कि हम एक ही पिता की संतान हैं।"

ख्रीस्त से मुलाकात

संत पापा ने इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया कि प्रेम के लिए ईशशास्त्र का गहरा ज्ञान आवश्यक नहीं है जो बहरहाल आवश्यक है। "प्रेम जीवन की मुलाकात है सबसे पहले येसु के साथ और इस मुलाकात के बाद, मित्रता, भाईचारा एवं एक ही पिता की संतान होने की भावना जागती है।" उन्होंने कहा, "सब कुछ की शुरूआत भाईचारापूर्ण मुलाकात से होती है।" जीवन जिसको अधिक ऊंचे उद्देश्य के लिए समर्पित किया जाता और बांटा जाता है, प्रेम दुनिया को बदल सकता है किन्तु यह पहले हमें बदलता है। प्रेम में एक साथ, हम ख्रीस्तीय दुनिया बदल सकते हैं। हम अपने आपको बदल सकते हैं क्योंकि ईश्वर प्रेम हैं।    

प्रेम को जीया जाता है, सिखाया नहीं जाता

योहन 17 आंदोलन से मुलाकात पर गौर करते हुए और आनन्द एवं आशा के साथ उनके साक्ष्य पर ध्यान देते हुए, संत पापा ने उन्हें एक साथ चलते रहने एवं जीवन एवं भाईचारा पूर्ण प्रेम को बांटते रहने को प्रोत्साहन दिया।

कई बार प्रेम को अव्यवहारिक, विचारधारा के दर्शनशास्त्र के साथ मिलाया जाता है किन्तु प्रेम ठोस है, यह भाइयों के लिए जीवन देता है जैसा कि येसु ने किया। "यदि आप प्रेम करें अथवा नहीं, प्रेम जिसने शरीरधारण किया, प्रेम जिसने हमारे लिए जीवन दिया वे मार्ग हैं। प्रेम को सिखाया नहीं जाता बल्कि जीया जाता है और योहन 17 आंदोलन, जीने के द्वारा प्रेम की शिक्षा देता है।  

10 June 2021, 14:54