खोज

Vatican News
पूर्वी रीति की कलीसियाओं की मदद करनेवाले संगठन रोको के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस पूर्वी रीति की कलीसियाओं की मदद करनेवाले संगठन रोको के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

रोको से पोप ˸ कलीसिया के जीवित पत्थर की देखभाल करें

संत पापा फ्रांसिस ने पूर्वी रीति की कलीसियाओं की मदद करनेवाले संगठन, रोको की आमसभा के प्रतिभागियों से मुलाकात करते हुए काथलिकों को प्रोत्साहन दिया कि वे "जीवित पत्थरों" की देखरेख करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 24 जून 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने पूर्वी रीति की कलीसियाओं की मदद करनेवाले संगठन रोको की 94वीं आमसभा के प्रतिभागियों से वाटिकन में मुलाकात की तथा उन्हें पवित्र भूमि की पीड़ित कलीसियाओं की मदद करने का प्रोत्साहन दिया।

सभा

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, "महामारी के बावजूद आपने एरिट्रिया की स्थिति का सामना करने के लिए अतिरिक्त सभाओं का आयोजन किया बल्कि लेबनान के बेरूत में 4 अगस्त के विस्फोट के बाद भी अपना सहयोग दिया।" उन्होंने कहा, "मैं लेबनान की मदद करने के प्रयास के लिए धन्यवाद देता हूँ तथा आपको एवं दूसरे लोगों को 1 जुलाई की हमारी सभा के लिए प्रार्थना करने का निमंत्रण देता हूँ जब लेबनान की ख्रीस्तीय कलीसिया के शीर्ष अधिकारियों के साथ हमारी सभा होगी, ताकि पवित्र आत्मा हमें आलोकित करे एवं हमारा मार्गदर्शन करें।"

लेबनान में संकट

संत पापा ने उनकी योजनाओं को सफल बनाने हेतु विश्वासियों, परिवारों, पल्ली वासियों एवं स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया जो "सभी भाई बहनों" का अर्थ समझते हैं और अपने समय एवं संसाधन का कुछ हिस्सा दूसरों की सेवा में अर्पित करते हैं।

संत पापा ने चिंता व्यक्त की कि पिछले साल गिरजाघरों में प्रतिबंध के कारण दानसंग्रह कम रहे बल्कि महामारी के कारण आर्थिक समस्या भी उत्पन्न हो गई। जब संकट ने हमें आवश्यक चीजों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रोत्साहन दिया, हम येरूसालेम की खाली सड़कों एवं उन तीर्थयात्रियों को देखकर उदासीन नहीं रह सकते जो अपने विश्वास को मजबूत करने के लिए आते हैं और स्थानीय कलीसिया के लोगों के प्रति ठोस सहानुभूति व्यक्त करना भी नहीं छोड़ सकते हैं।

येरूसालेम की विरान सड़कें

सभा पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा कि उन्होंने अपनी सभा में विभिन्न भौगोलिक और कलीसियाई परिस्थितियों पर चर्चा की। सबसे पहले, पवित्र भूमि में इस्राएल और फिलिस्तीन के लोगों के लिए आशा करते और उनके लिए प्रार्थना करते हैं, कि वे शांति के इंद्रधनुष को देख सकें जिसे ईश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी एवं लोगों के बीच शांति के व्यवस्थान के संकेत के रूप में नूह को दिखाया था। जहाँ अब भी मिसाइलों के द्वारा अंधकार कर दिए जाते एवं विनाश, मौत और भय लाये जाते हैं।

शांति का इंद्रधनुष

सीरिया की याद करते हुए संत पापा ने कहा कि सीरिया से मदद के लिए उठनेवाली आवाज ईश्वर के हृदय से दूर नहीं है फिर भी ऐसा लगता है कि इसने अब तक नेताओं के हृदयों का स्पर्श नहीं किया है, हम दस साल के संघर्ष के निरंतर कलंक के बारे याद करते हैं, जिसमें लाखों लोग आंतरिक और बाहरी रूप से विस्थापित हुए एवं पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, फिर भी इस युद्धग्रस्त राष्ट्र की भलाई के लिए साहसी निर्णयों की कमी है।

संत पापा ने सीरिया में प्रेरितिक राजदूत कार्डिनल जेनारी एवं लेबनान, इराक, इथोपिया, अर्मेनिया एवं जोर्जिया में पोप के प्रतिनिधियों की उपस्थिति के प्रति खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उन देशों में कलीसिया की स्थिति पर ध्यान देने में मदद दी है।

मानव पीड़ा

संत पापा ने पूर्वी रीति की कलीसियाओं की मदद करनेवाले संगठन के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा, "आपके जीवन का रास्ता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चरवाहों एवं विश्वासियों को उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद देता है जो महत्वपूर्ण हैं तथा सुसमाचार के प्रचार के लिए मददगार हैं, क्योंकि एक साथ आप उस कलीसिया के चेहरे को दिखाते हैं जो एक माँ है जो गरीबों और कमजोर लोगों का विशेष ख्याल रखती है।"

संत पापा ने इथोपिया के टाइग्रे क्षेत्र में संघर्ष से उत्पन्न स्थिति के लिए चिंता व्यक्त की जो इरिट्रिया को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं साम्प्रदायिक  विविधताओं से परे हम फ्रातेल्ली तूत्ती के संदेश के महत्व पर ध्यान दें।

सुसमाचारी जीवन के खमीर

संत पापा ने अर्मेनिया में 2016 में अपनी प्रेरितिक यात्रा की याद की जहाँ उन्होंने यात्रा के अंत में समस्त काकेशस प्रांत में शांति के आशा के चिन्ह स्वरूप कपोत उड़ाया था। उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि हाल के महीनों में वहाँ निराश देखने को मिला है अतः उन्होंने संगठन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जिसने जोर्जिया एवं अर्मेनिया की स्थिति पर ध्यान दिया है एवं वहाँ के काथलिक समुदाय को सुसमाचारी जीवन का प्रतीक एवं खमीर बनने में मदद दी है।  

संत पापा ने उनकी उपस्थिति, उनके ध्यान, योजनाओं एवं कार्यों के लिए धन्यवाद देते हुए उन्हें तथा उनके कार्यों को आशीष प्रदान की।  

24 June 2021, 15:58