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सन्त पापा फ्राँसिस आम दर्शन समारोह के समय, तस्वीरः 09. 06. 2021  सन्त पापा फ्राँसिस आम दर्शन समारोह के समय, तस्वीरः 09. 06. 2021   (AFP or licensors)

काथलिक स्कूल अन्तःकरणों का करें निर्माण, सन्त पापा फ्राँसिस

सन्त पापा फ्राँसिस ने लातीनी अमरीका के येसु धर्मसमाजी स्कूलों के संघ की बीसवीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में एक विडियो सन्देश भेजकर कहा है कि स्कूलों का काम उदारता, समानता एवं एकात्मता हेतु अन्तःकरणों का निर्माण होना चाहिये।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 11 जून 2021 (वाटिकन न्यूज़): सन्त पापा फ्राँसिस ने लातीनी अमरीका के येसु धर्मसमाजी स्कूलों के संघ की बीसवीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में एक विडियो सन्देश भेजकर कहा है कि स्कूलों का काम उदारता, समानता एवं एकात्मता हेतु अन्तःकरणों का निर्माण होना चाहिये।  

गुरुवार को लातीनी अमरीका के स्कूलों को प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने आदर्श स्कूलों को परिभाषित करते हुए कहा कि स्कूलों को स्वागत के उत्तम स्थल बनना चाहिये जहाँ बच्चों एवं युवाओं को समय के चिन्ह पहचानना सिखाया जाये। सन्त पापा फ्राँसिस चाहते हैं कि स्कूली शिक्षा, विशेष रूप से, छात्रों में उपभोग के कुछेक मॉडलों के प्रति आलोचनात्मक रवैया विकसित करने में मदद प्रदान करें जो लोगों के बीच शर्मनाक असमानताएँ पैदा करते हैं।  

लातीनी अमरीका का येसु धर्मसमाजी स्कूल संघ इस समय करीबियाई देशों, बोगोटा तथा कोलोम्बिया सहित लातीनी अमरीका के 19 देशों में 92 येसु धर्मसमाजी स्कूलों को संचालित कर रहा है।

अन्यों के प्रति समर्पण

सन्देश में सन्त पापा ने स्कूलों संचालकों, अध्यापकों एवं छात्रों का आह्वान किया कि वे येसु के पद चिन्हों पर चल अन्यों की भलाई के प्रति समर्पित रहें। हाशिये पर जीवन यापन करनेवाले, कथित निम्न एवं निर्धन तथा समाज में परित्यक्त लोगों के प्रति उदार बनें तथा उनके एकीकरण का हर सम्भव प्रयास करें।

"स्वार्थी अभिजात्य" से बचें

सन्त पापा ने कहा कि स्कूलों के दरवाज़ों को सभी के लिये खुले रहना चाहिये, जहाँ निर्धन से निर्धनतम भी प्रवेश करने में भय न खाये। उन्होंने कहा कि स्कूलों को सुसमाचार के ज्ञान को आत्मसात करना चाहिये जो हमें प्राप्त एक विशेष अधिकार है, इसमें वह प्रज्ञा निहित है जो मनुष्यों को सबकुछ सिखा सकती है।

सन्त पापा ने कहा कि स्कूलों को "स्वार्थी अभिजात्य" में अपने आप में संकुचित होकर नहीं रहना चाहिये, अपितु ऐसे स्थल होना चाहिये जहाँ छात्र "सब के साथ मिलकर रहें तथा जहां भाईचारा और आपसी सम्मान को माहौल हो।" इस सन्दर्भ में सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि "भाईचारा, सबसे पहले, एक नैतिक कर्तव्य नहीं है" इस संबंध में, संत पापा ने कहा कि किसी को यह याद रखना चाहिए कि "भाईचारा, सबसे पहले, एक नैतिक कर्तव्य नहीं है" बल्कि, यह "मानव जाति और सारी सृष्टि की वस्तुनिष्ठ पहचान" है जिसके द्वारा "हम एक परिवार में, भाइयों और बहनों के रूप में बनाए गए हैं"।

अन्तःकरणों का निर्माण करें

सन्त पापा ने यह आशा भी व्यक्त की कि काथलिक स्कूल छात्रों को समय के संकेतों का पहचानना, जीवन को वरदान स्वरूप ग्रहण करना तथा उसके लिये आभारी रहना सिखायें जिससे वे प्राप्त वरदानों को अन्यों के साथ साझा करने के सलिये प्रोत्साहित होवें। इस तरह काथलिक स्कूल अन्तःकरणों का निर्माण कर विश्व को भाईचारे एवं आपसी सम्मानवाला एक बेहतर स्थल बना सकेंगे।  

11 June 2021, 11:38