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वाटिकन के सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में वाटिकन के सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में  (AFP or licensors)

लूथरन विश्व संघ को सन्त पापा फ्राँसिस का सम्बोधन

प्रॉटेस्टेण्ट सुधारवादी आन्दोलन के बाद 25 जून 1531 ई. को प्रकाशित आऊग्सबुर्ग कनफेशन की, 2030 में मनाई जानेवाली 500 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोम आये प्रतिनिधिमण्डल का सन्त पापा ने हार्दिक स्वागत किया और कहा कि यह संघर्ष के पथ से सहभागिता की ओर जाने का संकेत है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 जून 2021 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने लूथरन प्रॉटेस्टेण्ट ख्रीस्तीयों के विश्व संघ के प्रतिनिधियों का अभिवादन कर उन्हें सम्बोधित किया। प्रॉटेस्टेण्ट सुधारवादी आन्दोलन के बाद 25 जून 1531 ई. को प्रकाशित आऊग्सबुर्ग कनफेशन की, 2030 में मनाई जानेवाली 500 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोम आये प्रतिनिधिमण्डल का सन्त पापा ने हार्दिक स्वागत किया और कहा कि यह संघर्ष के पथ से सहभागिता की ओर जाने का संकेत है।

आऊग्सबुर्ग कनफेशन   

आऊग्सबुर्ग कनफेशन प्रॉटेस्टेण्ट सुधारवादी आन्दोलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जिसमें लूथरन ख्रीस्तीय कलीसिया के विश्वास के प्रमुख तत्वों को परिभाषित किया गया है।सन्त पापा ने अपने सम्बोधन में कहा कि लूथरन संघ के प्रतिनिधियों की रोम यात्रा सहभागिता की ओर अग्रसर यात्रा का चिन्ह है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आऊग्सबुर्ग कनफेशन की 500 वीं जयन्ती को ध्यान में रखकर किये जानेवाले चिन्तन, काथलिकों एवं लूथरन ख्रीस्तीयों के मध्य, एकता की स्थापना में मददगार सिद्ध होंगे।

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि उस युग में आऊग्सबुर्ग स्वीकारोक्ति ने पश्चिमी ईसाई धर्म में विभाजन के ख़तरे से बचने के प्रयास का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने याद दिलाया कि मूल रूप से उक्त दस्तावेज़ की कल्पना काथलिकों के बीच पुनर्मिलन के रूप में की गई थी किन्तु बाद में इसे लूथरन ख्रीस्तीय पाठ के रूप में अपनाया गया था।

एकता को बढ़ावा

सन्त पापा ने कहा कि सन् 1980 में जब इस दस्तावेज़ की 450 वीं वर्षगाँठ मनाई गई थी तब काथलिक-लूथरन संयुक्त घोषणा में प्रकाशित किया गया था किः "आऊग्सबुर्ग स्वीकारोक्ति में हमने जिस सामान्य विश्वास की खोज की है, वह हमें अपने समय में, इस विश्वास को नए सिरे से स्वीकार करने में भी मदद कर सकता है" जिससे हम उन बातों पर ध्यान केन्द्रित कर सकें जो हमें एकता के सूत्र में बाँधती है, जैसा कि सन्त पौल एफेसियों को प्रेषित पत्र में स्मरण दिलाते हैं, "एक ही शरीर है, एक ही आत्मा और एक ही आशा है, जिसके लिये आप लोग बुलाये गये हैं। एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास है और एक ही बपतिस्मा है। एक ही ईश्वर है, जो सब का पिता है, सबके ऊपर है, सब के साथ है और सबमें व्याप्त है।"

सन्त पापा ने आशा व्यक्त की कि काथलिक एवं लूथरन ख्रीस्तीय विश्वासी विश्वास के उन तत्वों को प्रोत्साहन देंगे जो उन्हें एकजुट होने के लिये प्रेरित करते हैं तथा विभाजन के सभी कारणों का अन्त करने का हर सम्भव प्रयास करेंगे।  

अन्त में सन्त पापा ने सभी को एकसाथ मिलकर येसु द्वारा सिखाई गई, हे पिता हमारे, प्रार्थना के पाठ हेतु आमंत्रित किया ताकि येसु ख्रीस्त के समस्त अनुयायियों के बीच पूर्ण एकता की स्थापना सम्भव बन पड़े।

 

25 June 2021, 11:35