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पोलिकोरो परियोजना के युवाओं से मुलाकात करते संत पापा फ्रांसिस पोलिकोरो परियोजना के युवाओं से मुलाकात करते संत पापा फ्रांसिस   (ANSA)

"पोलिकोरो परियोजना" के युवाओं से पोप ˸ आशा के चिन्ह बनें

संत पापा फ्राँसिस ने इताली कलीसिया की "पोलिकोरो परियोजना" की 25वीं वर्षगाँठ पर 5 जून को वाटिकन में मुलाकात की तथा उन्हें सम्बोधित कर आशा के चिन्ह बनने का प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 जून 2021 (रेई)- संत पापा ने कहा, "पोलिकोरो परियोजना" एक आशा का चिन्ह है, खासकर, दक्षिणी इटली के कई क्षेत्रों के लिए, जिनके पास काम नहीं है। आप एक नया रास्ता अपनाने के लिए बुलाये गये हैं, क्योंकि यह वर्षगाँठ महत्वपूर्ण है जो महामारी के कारण सामाजिक आर्थिक संकट के समय में आया है। संत पापा ने युवाओं को उनकी यात्रा हेतु चार महत्वपूर्ण क्रियाओं का सुझाव दिया।

चेतना लाना

संत पापा ने कहा, "आप अपने को ‘चेतना लानेवाले समुदाय’ कहते हैं। वास्तव में, समुदायों को अंदर से प्रेरित होना चाहिए, समर्पण की एक शैली से ˸ संबंधों के निर्माता, एकात्मता में मानवता के बुनकर बनना है। यह पल्लियों एवं धर्मप्रांतों की मदद करने का सवाल है, काम (रोजगार) जैसे बड़े विषय पर एक साथ चलने और योजना बनाने का है, उन बीजों को अंकुरित करने, उनकी क्षमता, उनकी पहल एवं उनकी शक्ति को प्रस्फूटित करने का प्रयास करना है जिनको ईश्वर ने हम प्रत्येक में डाला है।"

साथ रहना

संत पापा ने कहा कि दुनिया पर अधिकार किये बिना इसमें रहना संभव है। उन्होंने कहा, "पृथ्वी पर जीने का अर्थ यह नहीं है कि इसपर अधिकार किया जाए बल्कि यह जानना कि ईश्वर, भाई-बहनों, सृष्टि एवं अपने आप के साथ संबंधों को किस तरह पूर्णता से जीया जाए।" उन्होंने कहा कि वे उन स्थानों से प्रेम करें जहाँ ईश्वर ने उन्हें रखा है, उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र जाने के प्रलोभन में न पड़े। इस तरह सुदूर गाँव भी भाईचारा के प्रयोगशाला बन सकते हैं। "आप ख्रीस्तीय समुदाय को इस महामारी के संकट में साहस एवं आशा के साथ जीने में मदद करें। ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ते, और हम उनकी करुणा के चिन्ह बने रहेंगे, यदि हम इस लाचारी के समय में युवाओं, जो बेरोजगार हैं, जो अवसाद से पीड़ित हैं जो लक्ष्यहीन हैं और जीवन से थक चुके हैं, जिन्होंने उम्मीद खो दी है उनके के लिए झुकना जानते हैं।"

उन्होंने कहा कि यह समय सामाजिक, काम और राजनीति में बिना भय अपना हाथ गंदा करते हुए जीने का समय है। "आप अपने हाथों से पल्ली के द्वार एवं खिड़कियाँ खोल सकते हैं ताकि लोगों की समस्याएँ समुदाय के केंद्र में प्रवेश कर सकें।"

उत्साही होना

संत पापा ने कहा कि एक शैली है जो परिवर्तन लाती है ˸ येसु ख्रीस्त के लिए उत्साह एवं सुसमाचार के लिए जुनून। इसे युवाओं को साथ देने में देखा जा सकता है जहाँ वे अपने जीवन को अपने हाथों में लें, अपने भविष्य के लिए उत्साही बनें और नौकरी के लिए पर्याप्त विकास कर सकें।

"पोलिकोरो परियोजना" हमेशा ठोस चेहरे की सेवा, लोगों के जीवन में, खासकर, गरीब एवं समाज के सबसे पिछड़े लोगों के लिए है। संत पापा ने कहा कि हम अपने आप से बार बार पूछते हैं कि मैं कौन हूँ? किसके लिए हूँ? संत पापा ने कहा, "आप ईश्वर के लिए हैं इसमें कोई संदेश नहीं है किन्तु वे चाहते हैं कि आप दूसरों के लिए भी बनें। उन्होंने आपको कई गुण दिए हैं... वे आपके लिए नहीं हैं बल्कि दूसरों के लिए हैं। इस संदर्भ में आप पूछ सकते हैं, मैं किसके लिए उत्साही हूँ? मेरा हृदय क्या चाहता है? मैं किस पर खर्च करता हूँ? हम कैरियर बनाने के लिए सृष्ट नहीं किये गये हैं बल्कि सृष्टिकर्ता एवं सृष्ट जीव –जन्तुओं के साथ संबंध में बढ़ने के लिए।"

संत पापा ने कहा कि जब हम अपने आंतरिक की चिंता करते हैं, अपनी आध्यात्मिकता को दरकिनार नहीं करते, अध्ययन करते, कलीसिया की सामाजिक शिक्षा को गहराई से जानते और उसे ठोस परिस्थिति में बदलने की कोशिश करते हैं। अपने आपको बहिष्कृत लोगों के लिए मुफ्त में देने हेतु न डरें। डॉन मिलानी याद दिलाते हैं, "हम संतों को तब तक खिलते नहीं देखेंगे जब तक हम सामाजिक अन्याय के बारे में सोचते हुए दर्द और विश्वास से कांपने वाले युवाओं का निर्माण नहीं करेंगे!"

साथ देना

संत पापा ने कहा कि पोलिकोरो परियोजना एक मानव नेटवर्क एवं कलीसियाई संबंध है ˸ कई लोग आपको साथ देने के लिए समर्पित हैं। धर्मप्रांत आपको उम्मीद की नजर से देखता है कि आप भी उन सभी युवाओं को साथ दें जो आपके रास्ते पर मिलते हैं। आपकी उपस्थिति उस क्षेत्र में कलीसिया का चिन्ह बने जो हाथ लेकर चलना जानती है। यह ख्रीस्त का तरीका है जिन्होंने एम्माउस के रास्ते पर शिष्यों को साथ दिया था।  

येसु ने उन्हें निराश होने दिया किन्तु पास्का के साथ पुनः शुरू करने में भी मदद दी। विश्वास बतलाती है कि संकट विकास का एक रास्ता है।

संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित कर कहा, "प्रिय युवाओं, कलीसिया की सामाजिक शिक्षा के स्कूल में आप आशा के चिन्ह हैं। धर्मप्रांत में आपकी उपस्थिति सभी को यह समझने में मदद दे कि सुसमाचार का प्रचार, काम के लिए चिंता करने के द्वारा भी किया जा सकता है। पोलिकोरो परियोजना का 25 वर्ष एक पुनः शुरूआत हो।" संत पापा ने उन्हें इटली की कलीसिया के हित एक साथ स्वप्न देखने का प्रोत्साहन दिया।  

 

05 June 2021, 15:40