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संत पापाः क्रूस से येसु ने हमारे लिए प्रार्थना की...

संत पापा फ्रांसिस ने प्रार्थना पर अपनी धर्मशिक्षा माला का समापन करते हुए येसु की प्रार्थना पर विश्वासियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि येसु सदैव हमारे लिए प्रार्थना करते हैं।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 16 जून 2021 (रेई)  संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन के संत दमासुस प्रांगण में उपस्थित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

प्रार्थना पर अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान हमने कई बार इस बात की याद की है कि प्रार्थना येसु के जीवन का अति महत्वपूर्ण भागों में से एक था। अपने प्रेरिताई के दौरान वे प्रार्थना में डूबे रहते थे क्योंकि अपने पिता से वार्ता उनके जीवन के अस्तित्व का उद्दीप्त अंग था।

दुःखभोग में येसु की प्रार्थना

सुसमाचार हमें येसु ख्रीस्त के प्रार्थनामय जीवन का साक्ष्य देता है कि कैसे अपने दुःखभोग और मृत्यु की घड़ी में वे और अधिक तीव्र और सघन रुप में प्रार्थना करते हैं। इन सारी घटनाओं की चरमसीमा ख्रीस्तीय सुसमाचार प्रचार का क्रेन्द-बिन्दु है। येरूसालेम में, येसु का अपने जीवन की अंतिम घड़ी को जीना सुसमाचार का हृदय है यह केवल इसलिए नहीं क्योंकि सुसमाचार लेखकों ने उन घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्हें आनुपातिक रूप में अधिक स्थान दिया है बल्कि इसलिए क्योंकि येसु ख्रीस्त का मरण और पुनरूत्थान, तड़ित की भांति उनके पूरे जीवन पर प्रकाश डालती है। वे कोई समाज-सेवी नहीं थे जिन्होंने दुःख सहते और बीमार मानवता की सेवा की अपितु वे उससे भी बढ़ कर थे और हैं। हम उनमें न केवल अच्छाई को देखते बल्कि मुक्ति को पाते हैं, वह मुक्ति नहीं जो मुझे केवल एक बीमारी या एक निराशा भरे क्षण से बचाती है-वरन हम उनमें अपनी पूर्ण मुक्ति, मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त के द्वारा मिलने वाली मुक्ति को पाते हैं, जो हमें मृत्यु पर जीवन के विजय हेतु की आशा दिलाती है।

संत पापा ने कहा कि हम येसु को उनके दुःखभोग में प्रार्थना की गहराई में डूबा पाते हैं।

“अब्बा” घनिष्टता और विश्वास की निशानी

वे नाटकीय ढ़ंग अपने घोर दुःख और पीड़ा में गेतसेमानी बारी में प्रार्थना करते हैं। येसु खास कर उस घड़ी अपने पिता, ईश्वर को “अब्बा” कहकर संबोधित करते हैं (मर.14.36)। अरामाईक, येसु की भाषा में यह एक अति घनिष्ट संबंध और विश्वास को व्यक्त करता है। वे अपने में घोर अंधकार से घिरा हुआ अनुभव करते और इस परिस्थिति में वे अब्बा शब्द को उच्चारित करते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि येसु क्रूस से भी विनती करते हैं, यद्यपि वे पिता को घोर शांति में बना पाते हैं। यहाँ पुनः उनके होंठो से “पिता” शब्द निकलते हैं। यह अति शक्तिशाली प्रार्थना है जो क्रूस से येसु की सर्वोतम माध्यस्थ प्रार्थना है। वे हम सभों के लिए, दूसरों के लिए, यहाँ तक की उनके लिए भी जिन्होंने उन्हें मौत दी, याचना करते हैं, सिवाय भले डाकू के कोई भी उनका साथ नहीं देता है। सभी उनके खिलाफ और उदासीन रहते सिर्फ एक डाकू उनकी शक्ति से वाकिफ है। “हे पिता तू उन्हें क्षमा कर दे क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं (लूका.23. 34)। इस दृश्य के बीच, अपनी असहनीय पीड़ा में येसु, दुनिया के गरीबों हेतु खास कर जो सभों के द्वारा भूला दिये जाते हैं याद करते हुए स्त्रोत 22 के वचनों को उच्चरित करते हैं,“मेरे ईश्वर, मेरे ईश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया है? वे अपने में छोड़ दिये जाने का अनुभव करते हैं। क्रूस को हम पिता के परिपूर्ण प्रेम उपहार स्वरुप पाते हैं जहाँ हम मुक्ति की पूर्णतः को देखते  हैं। येसु पुनः अपने पिता को पुकारते और कहते हैं, “पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंप देता हूँ”। क्रूस में तीन घंटे ये सारी चीजें प्रार्थनाएं हैं।

येसु की प्रार्थना सदैव हमारे लिए  

येसु ख्रीस्त अपने जीवन में दुःखभोग और मृत्यु के निर्णयक क्षणों में प्रार्थना करते हैं। पुनरूत्थान के द्वारा पिता येसु की प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं। येसु की प्रार्थना अपने में गहन है, उनकी प्रार्थना अनोखी है जो हमारे लिए आदर्श बनती है। वे सभों के लिए प्रार्थना करते हैं, मेरे लिए आप के लिए, हर एक जन के लिए। क्रूस पर से वे मेरे लिए प्रार्थना करते हैं, “मैंने अंतिम व्यारी में और क्रूस के काठ से तुम्हारे लिए प्रार्थना की।” इस तरह अपने जीवन की अत्यंत दर्द भरे क्षणों में भी हम सभी अपने में अकेले नहीं हैं। येसु की प्रार्थना हमारे साथ है। वे निरंतर हमारे लिए प्रार्थना करते हैं जिससे हम अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। हम प्रार्थना करते हुए याद करें कि वे हमारे लिए प्रार्थना करते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि मेरे लिए प्रार्थना की इस अंतिम धर्मशिक्षा माला में यह याद करना कितना सुन्दर लगता है, “हम केवल अपने में प्रार्थना नहीं करते हैं, बल्कि हमारे लिए प्रार्थना किया गया है, हम येसु ख्रीस्त की वार्ता भरी प्रार्थना में पिता के द्वारा स्वीकार किये गये और पवित्र आत्मा से संयुक्त हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि येसु हमारे लिए प्रार्थना करते हैं हम इस बात को कभी न भूलें, हमारे जीवन की सबसे खराब स्थितियों में भी। हम येसु ख्रीस्त में प्रेम किये गये हैं यहां तक की उनके दुःखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान के क्षणों में भी, हमें सभी चीजें दी गई हैं। अतः अपनी प्रार्थना और जीवन में हम साहस और आशा में बने रहते हुए येसु की प्रार्थना को सुनें और आगे बढ़ते जायें। हम इस विवेक में बने रहें कि हमारा जीवन ईश्वर की महिमा हेतु है, हमारे लिए येसु अपने पिता से प्रार्थना करते हैं। 

आमदर्शन समारोह पर संत पापा की धर्मशिक्षा
16 June 2021, 13:11

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