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13 मई 1981 को आम दर्शन के दौरान  संत पापा को गोली लगने से पहले का फोटो 13 मई 1981 को आम दर्शन के दौरान संत पापा को गोली लगने से पहले का फोटो  (2003 AFP) संपादकीय

गोलीबारी, भय, प्रार्थना और क्षमा

चालीस साल पहले, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के खिलाफ हमला। आंद्रे फ्रॉस्टार्ड द्वारा टिप्पणी की गई छवियां हमें उन क्षणों के दृश्य को दया और क्षमा की असहाय शक्ति के साथ दिखाती और महसूस कराती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 12 मई 2021 (रेई) : चालीस साल बाद भी छवियां आज भी विचलित करती हैं। वह शख्स सफेद कपड़े पहने था, फिर भी अपने साठ के दशक में पूरी शारीरिक शक्ति के साथ, एक छोटी बच्ची को आशीर्वाद देने के लिए गले लगाया और उसे उसके माता-पिता को वापस दिया।तभी गोलियों की आवाज गूँजी, इसी के तुरंत बाद, संत पापा अपने सचिव की बाहों में गिर गये। सफेद वाहन वाटिकन के अंदर दौड़ी, फिर मिनटों में जेमेली पॉलीक्लिनिक के लिए रवाना हुई। दुनिया भर के विशवासियों में घबराहट और प्रार्थना, एक लंबी और जटिल सर्जरी के बाद आशा की किरण।

लेकिन उस घटना के चार साल बाद बनाई गई वृत्तचित्र की सबसे शक्तिशाली छवियां वे हैं जिनमें संत पापा के अध्ययन कमरे की खाली खिड़की तैयार की जाती है और संत पापा की आवाज रेडियो द्वारा संत पेत्रुस के विश्वासियों के लिए प्रसारित की जाती है। संत पापा वोइतिल्ला ने रविवारीय देवदूत प्रार्थना को कभी नहीं छोड़ते और उन्होंने 17 मई, 1981 को हमले के बाद पहली देवदूत प्रार्थना को नहीं छोड़ा। अस्पताल के बिस्तर से रिकॉर्ड की गई कमजोर आवाज में उन्होंने कहा: "मैं भाई के लिए प्रार्थना करता हूँ जिसने मुझपर गोली चलायी है, उसे मैंने सच्चे दिल से क्षमा किया है। मसीह के साथ संयुक्त, मैं पुरोहित और घायल, कलीसिया और दुनिया के लिए अपने कष्टों को चढाता हूँ।”

गंभीर रूप से घायल संत पापा के पहले शब्द उनके हमलावर के लिए क्षमा के शब्द थे और यह संदेश 27 दिसंबर, 1983 को और भी अधिक बल के साथ पूरी दुनिया के दिल तक पहुंच गया, जब विश्वपत्र ‘देविस इन मिसरिकेर्दिया’ के लेखक संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने रिब्बिया जेल की दहलीज पार कर अली आगा के सेल में प्रवेश किया और उस युवक को गले लगाया जो उसकी हत्या करना चाहता था। इस डॉक्युमेंट्री में आपको उस बैठक की सभी तस्वीरें मिलेंगी। ऑडियो के बिना, क्योंकि किसी को भी संत पापा और उसके हमलावर ने जो कहा, किसा को भी उसे सुनने की अनुमति नहीं थी। ये ऐसी छवियां हैं जो प्रभावकारी हैं और हमें ख्रस्तीय धर्म के केंद्र में वापस लाती हैं और ठोस रूप से दिखाई देती हैं, जब संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के दूसरे उत्तराधिकारी, संत पापा फ्राँसिस ने 23 फरवरी, 2016 को मेक्सिको सिटी के गिरजाघर में एकत्रित मेक्सिको के धर्माध्यक्षों से कहा था, "मनुष्यों के दिलों को जीतने में सक्षम एकमात्र शक्ति ईश्वर की कोमलता है, जो मंत्रमुग्ध करता है और आकर्षित करता है, जो झुकता है और जीतता है, जो जंजीरों को खोलता है वह यंत्रों की ताकत या कानून की कठोरता नहीं, बल्कि सर्वशक्तिमान दैवीय प्रेम की कोमलता है, उसकी मिठास में अपरिवर्तनीय शक्ति है और उसकी दया अपरिवर्तनीय आशा है।”

12 May 2021, 15:39