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इराक में युवाओं के साथ एक धर्मबहन इराक में युवाओं के साथ एक धर्मबहन  (AFP or licensors)

समर्पित जीवन के ईशशास्त्र की किताब हेतु पोप फ्राँसिस की प्रस्तावना

संत पापा फ्रांसिस ने किताब की प्रस्तावना में समर्पित जीवन के ईशशास्त्र पर प्रकाश डाला है एवं कहा है कि कलीसिया अत्यन्त सुन्दर लगती है जब वह अपने जीवन के तीनों स्थितियों को महत्व देती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 13 मई 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रकाशन केंद्र एलईवी द्वारा प्रकाशित "नमक और खमीर के रूप में - कलीसिया के समर्पित जीवन के ईशशास्त्र के लिए टिप्पणियाँ" शीर्षक की किताब के लिए प्रस्तावना लिखी है।  

इताली भाषा में लिखी किताब को दो इताली फ्राँसिसकन पुरोहितों ˸ फादर भलेंतीनो नतालिनी और फेरदिनांदो काम्पाना ने लिखा है।

किताब को 14 मई को प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें कलीसिया के धर्मसिद्धांत के संदर्भ में समर्पित जीवन, भविष्यवाणी, मिशन, धर्मविधि, नरक और स्वर्ग का सिद्धांत, आध्यात्मिकता, पवित्रता, तृत्वमय ईश्वर, कुँवारी मरियम और संत जोसेफ आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया है। 

आपसी सहयोग एवं मदद

किताब के लिए अपनी प्रस्तावना में संत पापा फ्रांसिस ने कहा है कि कलीसिया क्यों  सुन्दर कही जाती है।

उन्होंने लिखा है, "कलीसिया सुन्दर है क्योंकि वह अपने दुल्हे प्रभु के द्वारा प्रेम की जाती है और उनके दुल्हे के प्रेम ने उसे फलदायी, सुन्दर एवं प्रसन्नचित बनाया है।"

समर्पित जीवन की विषयवस्तु पर गौर करते हुए संत पापा ने इंगित किया है कि कलीसिया हमेशा जीवन की तीन स्थितियों से बनी है ˸ एकल जीवन, वैवाहिक जीवन और समर्पित जीवन।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये तीन लगातार प्रतिस्पर्धा में अलग-अलग डिब्बे नहीं हैं, न ही एक विशाल महासागर में तीन द्वीप।

"ईश्वर की पवित्र प्रजा अपने आप में तब सही आत्मपरख करती है जब वह तीन भाइयों..., तीन शत्रुओं जो एक-दूसरे को अनदेखा करते एवं झगड़ते हैं अथवा तीन शानदार सृष्टि (व्यक्ति) जो एक-दूसरे का समर्थन करते एवं उनके विकास के लिए अपने आपको अर्पित करते हैं।"

दूसरों से कोई बड़ा नहीं

संत पापा ने कहा है कि कलीसिया के पूरे इतिहास के जीवन में तीनों स्थितियों ने पवित्रता के रास्ते की गारांटी दी है। जबकि उसकी प्रवृत्ति कई बार "उसके मानवीय स्वभाव के कारण काले समय" के रूप में जानी जाती है, जिसके साथ दुर्व्यवहार और गुमराह करनेवाले दावे किये जाते हैं।

पोप ने कहा है कि समर्पित जीवन के समर्थकों ने इतिहास में कई बार जीवन के अन्य दो स्थितियों के संबंध में स्वायत्तता का दावा किया है।

उनका कहना है कि यह धारणा कलीसिया को "आत्म-संदर्भित विषयों की गड़बड़ी, अपने स्वयं के विशेषाधिकारों के लिए घमंड और अभिमानी बनाने का जोखिम उठाती है, इस बात को भूलते हुए कि जब एक पहले लक्ष्य पर पहुँचता है तो तीन लक्ष्य पर एक साथ आते हैं।"

सहस्य को गहरा करना

तब संत पापा ने पुस्तक की प्रशंसा की, जिसको "एक अनुभवी और सिद्ध, 90 वर्षीय धर्मशास्त्री द्वारा लिखा गया है, जिसने एक नवशिष्य की तरह पूरी सच्चाई से कलीसिया के धर्मसिद्धांत की जांच की है" और जिन्हें एक आध्यात्मिक और ईशशास्त्र के प्रेम युवा पुरोहित ने मदद दी है।”

संत पापा ने कहा, फादर मातालिनी और काम्पाना समर्पित जीवन पर अपनी पुस्तक के द्वारा "दुल्हन को और अधिक सुंदर एवं आकर्षक बनाना" चाहते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने अपनी इस उम्मीद के साथ प्रस्तावना का समापन किया कि इसका पाठ "पदानुक्रमित पवित्र माता कलीसिया के रहस्य की हमारी समझ को गहरा करने में हमारी मदद करेगा।"

13 May 2021, 16:35