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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

समर्पित जीवन के 50वें सप्ताह के लिए पोप का वीडियो संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने समर्पित जीवन के 50वें राष्ट्रीय सप्ताह के अवसर पर एक वीडियो संदेश भेजा, जो 17-22 मई को सम्पन्न होगा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 18 मई 2021 (रेई)- रोम में समर्पित जीवन के ईशशास्त्र की क्लारेशियन संस्था (आईटीवीसी) और मडरिड में धर्मसमाजी जीवन की ईशशास्त्रीय संस्था (आईटीवीआर) इस साल समर्पित जीवन को मजबूत और सुदृढ़ करने के लिए पूरे विश्व को अर्पित 50 वर्षों की सेवा का उत्सव मना रहे हैं।

पोप फ्रांसिस ने समर्पित जीवन के लिए 50वें राष्ट्रीय सप्ताह के प्रतिभागियों को सोमवार को एक वीडियो संदेश भेजा तथा समर्पित जीवन की समृद्धि को समझने एवं इसे अधिक फलदायक बनाने हेतु कार्डिनल अक्वीलिनो बोकोस को उनके लगातार अथक प्रयास के लिए धन्यवाद दिया।

संत पापा ने गौर किया कि मडरिड के लिए आयोजित उत्सव, जो 17- 22 मई तक आयोजित किया गया है इसमें भाग लेनेवालों ने समृद्धि का अनुभव किया है।

सच्चाई के साथ वार्ता

अपने संदेश में संत पापा ने कहा कि समर्पित जीवन का अर्थ है, "अपने आपको हर दिन समर्पित करना और इसे सच्चाई के साथ संवाद द्वारा समझा जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "जब समर्पित जीवन इस आयाम को खो देता है तब यह बंजर बनने लगता है।"

अविला की संत तेरेसा के जीवन से प्रेरणा लेते हुए संत पापा ने कहा कि उन्होंने सच्चाई को देखा एवं सुधार के लिए आगे बढ़ी।

उन्होंने कहा कि "बाद में, रास्ते पर, उस सुधार को घेरे के अंदर करने की कोशिश की गई किन्तु सुधार हमेशा एक यात्रा होती है, यह एक मूलभूत करिश्मे के आलोक में वास्तविकता और क्षितिज के संपर्क में एक यात्रा है।"

आधारभूत कारिज्म

संत पापा ने चेतावनी दी कि "जब एक धर्मसंघ कारिज्म को विचारधारा में बदल देता है तब यह अपनी पहचान खो देता है, अपने उपजाऊपन को गवाँ देता है।"

उन्होंने कहा, "आधारभूत करिश्मे को जीवित रखने का अर्थ है इसे उस संवाद में चलते और आगे बढ़ते रहना, जो आत्मा हमें समय के इतिहास में बताते हैं।"

संत पापा ने कहा कि सुधार के लिए आत्मपरख एवं प्रार्थना जरूरी है। प्रेरितिक साहस अर्थात् बिना चलने, बिना आत्मपरख एवं बिना प्रार्थना के, आधारभूत कारिज्म को बनाये रखना संभव नहीं है।

पवित्र आत्मा

संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि इस राष्ट्रीय सप्ताह के दौरान, एक साथ आना एवं संगीत और गिटार बजाना अच्छा है किन्तु यही इसका अर्थ नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि नियमन, संवाद, भय एवं अपने आप से संवाद में नहीं खो जाना है बल्कि पवित्र आत्मा द्वारा संचालित होना है।

वीडियो संदेश के अंत में संत पापा ने प्रतिभागियों से अपील की कि वे सीमा, सरहद अथवा उपनगरों से न घबरायें- क्योंकि वहीं आत्मा बोलेंगे।

 

18 May 2021, 14:38