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संत पापा ने प्रचारकों की प्रेरिताई की स्थापना की

संत पापा फ्राँसिस ने, मंगलवार, 11 मई को “मोतू प्रोप्रियो” अर्थात् स्वप्रेरणा से रचित पत्र की घोषणा कर, प्रचारकों की लोकधर्मी प्रेरिताई स्थापित की। उसका उद्देश्य है आधुनिक विश्व में सुसमाचार के प्रचार की आवश्यकता पर ध्यान देना एवं याजकीयता से बचाते हुए इसे दुनियावी रूप में पूरा करना।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 11 मई 2021 (रेई)- प्रचारकों की लोकधर्मी प्रेरिताई की स्थापना करते हुए संत पापा फ्रांसिस ने प्रेरितिक पत्र अंतिक्यूंम मिनिस्तेरियुम में लिखा है, "अतीत के प्रति निष्ठा एवं वर्तमान के प्रति जिम्मेदारी, दुनिया में अपने मिशन को आगे ले जाने के लिए यह कलीसिया की आवश्यक शर्त है।"

समकालीन विश्व में सुसमाचार प्रचार की पृष्ठभूमि पर और वैश्विक संस्कृति में वृद्धि के साथ, उन लोकधर्मी पुरूषों एवं महिलाओं को पहचानना आवश्यक है जो अपने बपतिस्मा द्वारा धर्मशिक्षा देने के काम में सहयोग देने के लिए बुलाये गये महसूस करते हैं। संत पापा ने युवाओं के साथ सच्चा वार्तालाप, साथ ही साथ मिशनरी बदलाव हेतु सुसमाचार प्रचार के लिए रचनात्मक प्रणाली एवं सक्षम संसाधनों को अपनाने पर जोर दिया है।

प्राचीन मूल के साथ नई प्रेरिताई

नई प्रेरिताई का उदगम बहुत पुराना है और जो नये व्यवस्थान में मिलता है, उदाहरण के लिए इसका जिक्र संत लूकस रचित सुसमाचार में एवं कोरिंथियो और गलातियों के नाम लिखे संत पौलुस के पत्र में मिलता है। संत पापा ने लिखा है कि "सुसमाचार प्रचार का इतिहास दो सहस्राब्दी से अधिक पुराना है, जो प्रचारकों के मिशन के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखलाता है, जिन्होंने अपना जीवन धर्मशिक्षा देने के लिए समर्पित किया ताकि विश्वास, हरेक मानव व्यक्ति के जीवन के लिए प्रभावी समर्थन हो- यहाँ तक कि उन्होंने अपना जीवन ही बलिदान कर दिया।"  

द्वितीय वाटिकन महासभा के समय से ही ख्रीस्तीय समुदाय के विकास हेतु प्रचारकों की भूमिका के अत्यधिक महत्व (अद जेंतेस 17) के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

संत पापा ने लिखा, "हमारे समय में भी कई सक्षम और समर्पित प्रचारक ... विश्वास के प्रसारण और विकास के लिए इस अमूल्य मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। इस समय, धन्य, संत और शहीद घोषणा की लम्बी सूची है जो प्रचारक थे एवं कलीसिया के मिशन के लिए महत्वपूर्ण सेवा दी। यह न केवल प्रचारकों की सम्पन्नता बल्कि ख्रीस्तीय आध्यात्मिक के पूरे इतिहास को दिखलाता है।"  

ख्रीस्तीय मूल्यों के माध्यम से समाज को बदलना

"धर्मप्रांत के प्रथम प्रचारक के रूप में धर्माध्यक्ष के मिशन को कम किये बिना" अथवा ख्रीस्तीय प्रशिक्षण में बच्चों के प्रति माता-पिता की विशेष जिम्मेदारी से हटे बिना, संत पापा ने लोकधर्मी स्त्रियों एवं पुरूषों की धर्मशिक्षा में सहयोग देने और विश्वास की सुन्दरता, अच्छाई एवं सच्चाई को पाने का इंतजार कर रहे लोगों के महत्व को पहचाना है।  

संत पापा ने जोर दिया है कि पुरोहितों का कर्तव्य है इस कार्य में उनका समर्थन करना और लोकधर्मी प्रेरिताई को स्वीकार करते हुए ख्रीस्तीय समुदाय के जीवन को धनी बनाना, जो समाज में, राजनीति में और आर्थिक क्षेत्र में ख्रीस्तीय मूल्यों को डालकर समाज को बदलने में सहयोग दे सकते हैं।  

याजकीयता से बचना

संत पापा ने कहा है कि हर प्रचारक विश्वास का साक्षी, एक शिक्षक और रहस्य का व्याख्याकार, सहचर्य और अध्यापक बने जो कलीसिया के लिए शिक्षा दे। प्रचारकों को सुसमाचार की घोषणा से लेकर ख्रीस्तीय दीक्षार्थी को संस्कार के लिए तैयार करने तक, सबसे बढ़कर विश्वास को बांटने की प्रेरितिक सेवा में प्रवीण होना चाहिए।  

उन्होंने कहा, "ये सब कुछ प्रार्थना, अध्ययन और समुदाय के जीवन में सीधे प्रवेश के द्वारा संभव है जिससे कि प्रचारक अपनी पहचान के साथ-साथ सत्यनिष्ठा एवं जिम्मेदारी बढ़ा सके।"  

प्रचारक की प्रेरिताई को स्वीकार करना, वास्तव में, हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के मिशनरी समर्पण पर बल देता है, एक ऐसा समर्पण, जिसको याजकीयता से बचते हुए पूरी तरह दुनियावी के तरीक से पूरा करना है।

11 May 2021, 16:14