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धन्य लाजरूस जिन्हें देवसहायम के नाम से जाना जाता है धन्य लाजरूस जिन्हें देवसहायम के नाम से जाना जाता है 

धन्य पिल्लाई एवं 6 अन्यों की संत घोषणा की जायेंगी

सोमवार को हुई कार्डिनलों की सभा (कनसिस्टरी) में संत पापा फ्राँसिस ने सात धन्यों की संत घोषणा की पुष्टि की है। संत घोषणा की तिथि की घोषणा बाद में की जायेगी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 4 मई 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को वाटिकन के प्रेरितिक आवास में धन्यों की संत घोषणा पर आयोजित कार्डिनलों की सभा का संचालन किया।

कनसिस्टरी के दौरान, कार्डिनलगण कलीसिया के सर्वोच्च अधिकारी की मदद, दल में पूरी कलीसिया के महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए सलाह देने के द्वारा करते हैं।

सोमवार की सभा में संत पापा ने कार्डिनलों के वोट के माध्यम से 7 धन्यों की संत घोषणा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिनकी संत घोषणा हेतु दिन निश्चित की जाएगी।

धन्य लाजरूस (देवसहायम) पिल्लाई

धन्य लाजरूस जिन्हें देवसहायम के नाम से जाना जाता है, वे भारत के एक ब्राह्मण थे। उन्होंने सन् 1745 में एक जेस्विट पुरोहित के द्वारा काथलिक धर्म को अपनाया और एक ख्रीस्तीय के रूप में अपना नाम लाजरूस रखा।

अपनी धर्मशिक्षा में उन्होंने अलग-अलग जाति के होने के बावजूद सभी लोगों की समानता पर विशेष जोर दिया। उनकी इस शिक्षा के कारण उच्च जाति के लोगों में उनके प्रति घृणा उत्पन्न हुई और उन्हें 1749 में गिरफ्तार किया गया। कई प्रकार से अत्याचार सहने के बाद वे 14 जनवरी 1752 को मार डाले जाकर शहीद हो गये।

धन्य लाजरूस भारत के पहले लोकधर्मी हैं जिनकी संत घोषणा की जायेगी।

धन्य चार्ल्स दी फौकाल्ड

धन्य चार्ल्स दी फौकाल्ड एक फ्राँसीसी सैनिक थे जिन्होंने उतरी अफ्रिका की यात्रा की।

शुरू में वे एक भटके हुए काथलिक थे जिन्होंने 28 साल की उम्र में विश्वास को अपनाया। धन्य चार्ल्स ने अपनी बुलाहट को पवित्र भूमि की यात्रा के दौरान पाया। 43 साल की उम्र में उनका अभिषेक हुआ उसके बाद वे अल्जीरिया के मरूस्थल गये जहाँ उन्होंने ध्यान साधना, प्रार्थना एवं अध्ययन में बिताया।

वे 1 दिसम्बर 1916 को दंगाइयों के गिरोह के द्वारा मार डाले गये। धन्य चार्ल्स ने एक "आध्यात्मिक परिवार" को प्रेरित किया, जो उनके आदर्शों को अपनाता है।

संस्थापक एवं संस्थापिकाएँ

सोमवार की सभा में, संत घोषणा हेतु प्रस्तावित तीन पुरोहित, जिन्होंने धर्मसंघों की स्थापना कीं – वे हैं, चेसार दी बुस, लुइजी मरिया पालाज्जोलो और जुस्तिनो मरिया रूस्सोलिल्लो; तथा दो धर्मबहनें हैं जिन्होंने धर्मसमाजों की स्थापना कीं – वे हैं, येसु की मरिया फ्रंचेस्का और मरिया दोमेनिका मानतोवानी।

 

04 May 2021, 14:54