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मानव अधिकार के रक्षक पोप जॉन पौल II पर 40 वर्षों पहले हमला

"हरेक मानव व्यक्ति के अधिकार के लिए सम्मान की मांग करने में दृढ़ मनोभाव, संत पापा जोन पौल द्वितीय की विशेषता थी।" उक्त बात संत पापा जॉन पौल द्वितीय के निजी सचिव क्राकोव के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल स्तानिसलाव डजिविज ने कही।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पोलैंड, बृहस्पतिवार, 13 मई 2021 (वीएनएस)- संत पापा जॉन पौल द्वितीय पर गोली चलाये जाने के 40 वर्ष पूरा होने पर कार्डिनल ने उस दिन की याद की। 13 मई 1981 को संत पापा जॉन पौल द्वितीय पर अली अगका ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, गोली चलायी थी और उन्हें घायल कर दिया था। गोली उनके पेट में लगी थी।

कार्डिनल ने कहा, "अपने परमाध्यक्षीय काल के आरम्भ से ही उन्होंने प्रताड़ित एवं शोषित लोगों के हित में जोरदार अपील की थी। पोलैंड जैसे देश से होने के कारण, जिसने 20वीं सदी में नाज़ीवाद और साम्यवाद के अत्याचार का अनुभव किया था, जॉन पॉल द्वितीय ने नागरिकों और पूरे समाज के खिलाफ सरकारों द्वारा इस्तेमाल की जानेवाली अधिनायकवादी हिंसा से होनेवाले नुकसान को पूरी तरह समझा था। अतः दृढ़ भावना से उन्होंने हर व्यक्ति के अधिकार एवं प्रतिष्ठा की मांग की।" महाधर्माध्यक्ष ने जोर दिया कि यह उनका एक ऐसा "मिशन" था जिसको हमला ने भी नहीं रोक सका।"    

कार्डिनल स्तानिसलाव ने उस दिन की घटना, जिसको उन्होंने खुद देखा था, उसे "बहुत भयंकर क्षण" के रूप में याद करते हैं। वे बतलाते हैं, "मैंने पोप को संभाला जो गिर रहे थे और उनसे खून बह रहा था, मैं सदमें में था किन्तु जानता था कि उनके जीवन को बचाने के लिए अवश्य कुछ करना है। पीड़ा के बावजूद संत पापा शांत थे और उन्होंने अपने आपको ईश्वर एवं माता मरियम को समर्पित किया, और अस्पताल के रास्ते पर अपनी चेतना खोते-खोते, मुझसे कहा कि जिस किसी ने गोली चलायी है मैं उसे क्षमा कर देता हूँ।" वास्तव में, 27 दिसम्बर 1983 को उन्होंने रिबिबिया के जेल में अली अगका से मुलाकात की। कार्डिनल ने कहा कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय का एक मिशन था जो उन्हें ईश्वर की ओर से दिया गया था जिसको उन्होंने अंत तक साहस के साथ पूरा किया।

क्राकोव के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष ने 13 मई को 10.30 बजे (रोम समयानुसार) संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हमला किये गये स्थान पर गुलदस्ता अर्पित कर, संत पापा जॉन पौल द्वितीय को श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

13 May 2021, 15:52