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संत पेत्रुस महागिरजाघऱ में संत पापा फ्राँसिस नये पुरोहितों के साथ संत पेत्रुस महागिरजाघऱ में संत पापा फ्राँसिस नये पुरोहितों के साथ  (ANSA)

पवित्र मिस्सा में संत पापा:पुरोहिताभिषेक 'सेवा का एक उपहार'

संत पापा फ्राँसिस भला चरवाहा रविवार को पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया और रोम धर्मप्रांत के लिए 9 डीकनों का पुरोहिताभिषेक किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार 25 अप्रैल 2021 (वाटिकन न्यूज) : जैसा कि विश्व व्यापी काथलिक कलीसिया आज के दिन को भला चरवाहा रविवार के रुप में मनाती है।इस दिन रोम के धर्माध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में पवित्र मिस्सा के दौरान रोम धर्मप्रांत के 9 डीकनों को पुरोहिताभिषेक संस्कार दिया। वे हैः जॉर्ज मारियुस बोगडान, सल्वातोर मार्को मोंटोने, मानुअल सेच्ची, डिएगो अरमांदो बार्रेरा पार्रा, सल्वातोरे लूक्केसी, जोरज्यो डी इयूरी, रिकार्दो चेंदामो, सामुअल पिएरमेरिनी और मतेउस हेनरिक अटाएदे दा क्रूज़।

मसीह की पुरोहिताई अभिव्यक्ति

अपने प्रवचन में, संत पापा फ्राँसिस ने नौ डीकनों से आग्रह किया कि वे हमेशा मसीह पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने लोगों की सेवा करें।

उन्होंने कहा कि शिक्षक, पुरोहित और चरवाहे के रुप में उनकी प्रेरिताई, मसीह की प्रेरिताई की अभिव्यक्ति है।

संत पापा ने कहा, "पुरोहित, धर्माध्यक्ष के सह-कार्यकर्ता के रुप में स्थापित किए जाते हैं, जिनके साथ वे पुरोहिताई सेवा में शामिल हो जाते हैं और जिनके साथ वे ईश्वर के लोगों की सेवा में बुलाये जाते हैं। उनका कार्य सुसमाचार का प्रचार करना, परमेश्वर के लोगों की देखभाल करना और पवित्र धर्मविधि, विशेष रूप से पवित्र युखरीस्तीय बलिदान अर्पित करना है।"

करुणावान चरवाहे

संत पापा ने तब जोर देकर कहा कि पुरोहित बनने पर "आप एक चरवाहे के समान बन जाओगे।"। यह "कैरियर नहीं," लेकिन "एक सेवा" है।

संत पापा फ्राँसिस ने पुरोहितों से उनकी सेवा में निकटता के चार रूपों को अपनाने को कहा.. "ईश्वर से निकटता, धर्माध्यक्ष से निकटता, एक दूसरे से निकटता और ईश्वर के लोगों से निकटता।" इन सभी, "दया और कोमलता की शैली" के साथ किया जाना चाहिए।

समस्याओं के प्रति खुला रहें

संत पापा ने उनसे आग्रह करते हुए कहा, आप "समस्याओं के प्रति अपना दिल बंद न करें।" लोगों की समस्याओं को सुनने और उन्हें सांत्वना देने के लिए समय निकालना बहुत महत्वपूर्ण है। संत पापा ने समझाया, "यह करुणा है, जो क्षमा की ओर ले जाता है।" संत पापा ने उनसे आग्रह किया, "कृपया, दयालु बनें, क्षमाशील बनें, क्योंकि ईश्वर सबको क्षमा करता है, वे क्षमा करने से थकते नहीं हैं।"

घमंड से दूर रहें

संत पापा फ्राँसिस ने तब घमंड और "रुपये के गौरव" के खतरों से आगाह किया था। संत पापा ने चेतावनी देते हुए कहा, "शैतान आपकी जेबों के माध्यम से आता है, गरीब रहें, क्योंकि गरीब ही ईश्वर के पवित्र वफादार लोग हैं।"

संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रवचन के अंत में निकटता के इन चार रूपों का स्मरण दिलाते हुए कहा कि ये चार रुप "चरवाहा होने का रास्ता है" क्योंकि "येसु चरवाहों को सांत्वना देते हैं क्योंकि वे स्वं भला चरवाहा हैं। आप येसु में सांत्वना की तलाश करें और अपने जीवन के क्रूस को लिए आगे बढ़ें। "डरें नहीं, प्रभु सब कुछ ठीक ही करेंगे।"

25 April 2021, 14:31