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27वें इबेरो अमरीकी सम्मेलन के प्रतिभागी 27वें इबेरो अमरीकी सम्मेलन के प्रतिभागी  (AFP or licensors)

इबेरो-अमरीकी सम्मेलन को प्रेषित संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने 21 अप्रैल को 27वें इबेरो अमरीकी सम्मेलन के प्रतिभागियों को एक संदेश भेजकर कहा कि कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता की आवश्यकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

अमरीका, बृहस्पतिवार, 22 अप्रैल 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार को इबेरो अमरीकी सचिवालय के महासचिव रेबेका ग्रेनस्पन मेयूफिस तथा देश के सभी नेताओं एवं सरकार को 27वें इबेरी अमरीकी सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश भेजा।

सम्मेलन बुधवार को अंडोर्रा में सम्पन्न हुआ जिसमें लातीनी अमरीकी देशों के नेताओं ने भाग लिया तथा "सतत विकास के लिए नवाचार - उद्देश्य 2030" विषयवस्तु पर बातें कीं।

अपने संदेश में संत पापा ने ध्यान आकृष्ट किया है कि सम्मेलन को कोविड-19 महामारी के कठिन समय में आयोजित किया गया है जो राष्ट्रों एवं नागरिकों से त्याग की मांग कर रहा है, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जिम्मेदारी एवं भाईचारा की भावना से प्रतिबद्ध होने का आह्वान कर रहा है ताकि वर्तमान की एवं भविष्य में आने वाली चुनौतियों का भी सामना किया जा सके।

महामारी से सभी प्रभावित

संत पापा ने उन लाखों लोगों की ओर ध्यान खींचा है जो महामारी के कारण मौत के शिकार हुए हैं और जो बीमार हैं। उन्होंने कहा कि इस स्वास्थ्य संकट ने किसी पर भेदभाव नहीं किया है, इसने हर संस्कृति, आस्था और सामाजिक आर्थिक वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा, "हम सभी जानते हैं और हमने अपनों को खोने का अनुभव किया है जो कोरोना वायरस से मर गये अथवा संक्रमण की पीड़ा सही।" संत पापा ने परिवारों के दुःखों की भी याद की जो अपने प्रियजनों के निकट नहीं हो सकते, उन्हें सांत्वना नहीं दे सकते और बच्चों एवं युवाओं पर भी महामारी दुखद प्रभाव पड़ा है।  

इस संबंध में संत पापा ने डॉक्टरों, नर्सों और अन्य चिकित्साकर्मियों के कार्यों की सराहना की, साथ ही साथ, चैपलिन एवं स्वयंसेवकों को भी याद किया जिन्होंने अपनी जान को खतरे में डाल, रोगियों की चिकित्सा की और अपने परिवार के सदस्यों एवं प्रिय मित्रों को खो दिया।

वैक्सिन की समान उपलब्धि

संत पापा ने थोड़े समय में कोविड-19 के खिलाफ वैक्सिन की खोज में किये गये प्रयास को स्वीकार किया। किन्तु साथ ही अपील की कि वैक्सिन को "वैश्विक आम सामग्री" के रूप में देखा जाए, जो एक ऐसा विचार है जिसके लिए ठोस कार्य की जरूरत है जो वैक्सिन के शोध, उत्पादन एवं वितरण को प्रेरित करता है।  

उन्होंने उन प्रयासों को प्रोत्साहन दिया जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नये तरह की एकजुटता उत्पन्न करता है जो वैक्सिन के समान वितरण प्रणाली के साथ, केवल आर्थिक लाभ पर आधारित नहीं बल्कि सभी की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, खासकर, कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों को ध्यान देता है।

अंतरराष्ट्रीय ऋण सुधार

संत पापा ने सम्मेलन को महामारी के प्रति हमारी प्रतिक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ऋण में सुधार के लिए विशेष रूप से विचार करने की आवश्यकता को इंगित करने के अवसर के रूप में लिया।  

इस मामले में, उन्होंने गरीब देशों को विकास करने, वैक्सिन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं नौकरी पाने में मदद देने हेतु कर्ज के बोझ को रोकने के लिए पुनः बातचीत करने का आह्वान किया।

हालांकि, संत पापा ने गौर किया कि इस तरह के भाव "कुशल आर्थिक नीतियों और सुशासन के कार्यान्वयन के साथ होना चाहिए जिससे सबसे गरीब व्यक्ति तक पहुंचा जा सके।"

संत पापा ने उन उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया जो विशेष अधिकारों के माध्यम से बाहरी वित्तपोषण तक पहुँच प्रदान करता है जो देशों के बीच अधिक एकजुटता का आह्वान करता है, जिससे कि फंड का प्रयोग आर्थिक विकास को बढ़ावा देने एवं यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाए कि "हर कोई वर्तमान स्थिति से उबरने के सबसे अच्छे अवसर के साथ उभर सकें।"

महामारी के बाद एक बेहतर समाज की ओर

संत पापा ने कहा, "कई अवसरों पर, मैंने इंगित किया है कि हमें इस महामारी से एक बेहतर रूप में बाहर आना है क्योंकि वर्तमान संकट एक अवसर है सभी लोगों एवं सभी समय के व्यक्ति और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध पर पुनः विचार करने, मौत के शार्ट सर्किट से निपटने में मदद करने के लिए।"

इसे प्राप्त करने के लिए संत पापा ने पुनर्प्राप्ति के एक मॉडल का आह्वान किया, जो नया सृजन करने में सक्षम हो, अधिक समावेशी हो और सार्वभौमिक सामान्य भलाई के उद्देश्य से स्थायी समाधान, साथ ही साथ उम्मीदों की एक क्षितिज हो जहां आर्थिक लाभ के विपरीत मानव जीवन की सुरक्षा केंद्र में हो।

साथ ही साथ, उन्होंने गौर किया कि कुछ भी संभव नहीं होगा यदि एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जिसमें बदलाव लाने की क्षमता होती है उसे प्राथमिकता न दी जाए, विशेषकर, मानव परिवार में चुनौतियों का सामना करने में, सबसे गरीब लोगों को ऊंची कीमत चुकाना न पड़े।  

संदेश के अंत में, संत पापा ने इबेरो-अमेरीकी सम्मेलन की सफलता की कामना की तथा इसके प्रतिभागियों पर ईश्वर के आशीष का आह्वान किया।

22 April 2021, 15:25