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संत अल्फोंस मरिया दी लीगोरी, कलीसिया के धर्माचार्य संत अल्फोंस मरिया दी लीगोरी, कलीसिया के धर्माचार्य 

संत अल्फोंस, दुर्बलों के लिए सुसमाचार प्रचार हेतु करुणा के गुरू

पोप फ्रांसिस ने संत अल्फोंस मरिया दी लीगोरी, कलीसिया के धर्माचार्य (डॉक्टर) की 150वीं वर्षगाँठ पर परमपावन मुक्तिदाता धर्मसमाज (रेडेम्पटोरिस्टस) के सुपीरियर जेनेरल को एक संदेश भेजा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 23 मार्च 2021 (रेई)- पोप पीयुस 11वें ने 150 वर्षों पहले 23 मार्च 1871 को संत अल्फोंस मरिया दी लिगोरी को कलीसिया का धर्माचार्य (डॉक्टर्स ऑफ द चर्च) घोषित किया था जिनकी नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तावों ने "कठोरता और शिथिलता के परस्पर विरोधी विचारों की उलझन के बीच सही रास्ता दिखलाया"।

150 वर्षों बाद, पापमोचकों एवं नैतिकतावादियों के संरक्षक तथा पूरी कलीसिया के आदर्श संत अल्फोंस का संदेश, अभी भी दृढ़ता से, पिता के स्वागत के लिए विवेक का प्रयोग करने हेतु उच्च मार्ग को इंगित करता है, क्योंकि "ईश्वर हमें जो मुक्ति प्रदान करते हैं वह उसकी दया का कार्य है।" (ए जी 112)

सच्चाई को सुनना

पोप फ्राँसिस ने संदेश में लिखा, "अल्फोंसियन ईशशास्त्रीय प्रस्ताव का उदय सुनने और आध्यात्मिक रूप से परित्यक्त दुर्बल पुरूषों एवं स्त्रियों के स्वागत के साथ हुआ। कठोर नैतिक मानसिकता में प्रशिक्षित सिद्ध डॉक्टर, सच्चाई को सुनने के बाद "दयालु" बन गये।"   

अपने समय के सुदूर क्षेत्रों में मिशनरी अनुभव, दूरस्थ लोगों की खोज, पापस्वीकार में उन्हें सुनना, परमपावन मुक्तिदाता धर्मसमाज की स्थापना एवं मार्गदर्शन तथा धर्माध्यक्ष की जिम्मेदारी ने उन्हें एक पिता और करुणा के गुरू बनने की ओर अग्रसर किया, इस निश्चितता से कि "ईश्वर का स्वर्ग है मानव का हृदय।"  

एक वयस्क कलीसिया के लिए एक प्रौढ़ अंतःकरण

संत पापा ने कहा कि संत अल्फोंस मरिया दी लिगोरी के उदाहरणों पर चलते हुए उन लोगों को साथ एवं समर्थन देना है जो मुक्ति के रास्ते पर आध्यात्मिक मदद से वंचित हैं। सुसमाचार के मूलसिद्धांत को मनुष्य की कमजोरी के विपरीत नहीं होना चाहिए। हमेशा आवश्यक है एक रास्ता तलाशने की जो भटकाता नहीं बल्कि हृदय को ईश्वर के करीब लाता। जैसा कि संत अल्फोंस ने अपनी आध्यात्मिक एवं नैतिक शिक्षा के द्वारा किया। संत पापा ने गरीब लोगों की सहायता करने की सलाह देते हुए कहा कि अधिकांश गरीब लोगों में विश्वास के प्रति विशेष खुलापन होता है। उन्हें ईश्वर की जरूरत होती है अतः हम उनके लिए ईश्वर मित्रता, उनकी आशीष, उनके वचन, संस्कारों के अनुष्ठान और विश्वास में बढ़ने एवं सुदृढ़ होने के रास्ते पर चलने का प्रस्ताव रखने के कार्यों में नहीं चूक सकते।  

संत अल्फोंस के पदचिन्हों पर

पोप फ्राँसिस ने कहा कि संत अल्फोंस के समान हम भी प्रेरितिक समुदाय के रूप में लोगों से मुलाकात करने हेतु बुलाये गये हैं। इस तरह बाहर निकलकर आध्यात्मिक रूप से वंचित लोगों की मदद करना हमें व्यक्तिवाद से बाहर निकलने में मदद देता है तथा नैतिक परिपक्वता में बढ़ाता है जिसके द्वारा हम सच्ची भलाई का चुनाव कर सकते हैं।  

संत पापा ने इस बात की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया कि इस तेजी से बदलते समाज में सुसमाचार की घोषणा, सच्चाई को सुनने के साहस की मांग करता है, "अतीत से भिन्न विचार करने के लिए अंतःकरण को प्रशिक्षित करने की मांग करता"।

संत पापा ने परमपावन मुक्तिदात समाज के सभी सदस्यों का आह्वान किया कि वे संत अल्फोंस के पदचिन्हों पर चलते हुए समाज के कमजोर भाई-बहनों से मुलाकात करने जाएँ। जिसके लिए उन्हें नैतिक ईशशास्त्रीय चिंतन एवं प्रेरितिक कार्यों को करने की जरूरत है, अपने आपको आमहित के लिए समर्पित करना है जिसका मूल है सुसमाचार की घोषणा, जिसमें निर्णायक शब्द हैं जीवन, सृष्टि एवं बंधुत्व की रक्षा करना।

इस विशेष अवसर पर संत पापा ने परमपावन मुक्तिदाता धर्मसाज के सभी सदस्यों एवं परमधर्मपीठीय अल्फोंसियन अकादमी को प्रोत्साहन दिया कि वे मानव दुर्बलता के हित में प्रेरितिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक उत्तर की खोज करें।

परमपावन मुक्तिदाता धर्मसाज की स्थापना संत अल्फोंस मरिया दी लीगोरी ने की है। धर्मसमाज में 2018 के आंकड़े अनुसार कुल 4,986 सदस्य हैं जिनमें 3,793 पुरोहित हैं और कुल 719 समुदाय (घर) हैं।

 

23 March 2021, 15:46