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सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में धर्मबहनें, तस्वीरः 14.03.2021 सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में धर्मबहनें, तस्वीरः 14.03.2021  (ANSA)

बुलाहटों हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के लिये सन्त पापा का सन्देश

वाटिकन ने शुक्रवार, 19 मार्च को बुलाहटों के लिये विश्व प्रार्थना दिवस हेतु सन्त पापा फ्राँसिस के सन्देश की प्रकाशना कर दी।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मार्च 2021 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन ने शुक्रवार, 19 मार्च को  बुलाहटों के लिये विश्व प्रार्थना दिवस हेतु सन्त पापा फ्राँसिस के सन्देश की प्रकाशना कर दी।

सन्देश में सन्त पापा ने स्मरण दिलाया है कि 08 दिसम्बर 2020 को सन्त जोसफ को विश्वव्यापी कलीसिया के संरक्षक घोषित करने की 150 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में उन्होंने सन्त जोसफ को समर्पित वर्ष घोषित किया था। इसी अवसर पर सन्त जोसफ के प्रति विश्वासियों में प्रेम एवं भक्ति को बढ़ाने हेतु सन्त पापा ने "पात्रिस कोर्दे"  शीर्षक से अपने प्रेरितिक पत्र की भी प्रकाशना की थी।

सन्त जोसफ मानव के क़रीब

शुक्रवार को प्रकाशित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस लिखते हैं, सन्त जोसफ एक असाधारण और विशिष्ट व्यक्ति थे, तथापि वे "हमारे अपने मानवीय अनुभव के बहुत ही करीब थे"। उन्होंने कोई आश्चर्यजनक चीज़े नहीं कीं, उनके पास कोई अद्वितीय वरदान नहीं था, न ही वे उन लोगों की दृष्टि में खास थे जिनसे वे मिला करते थे। सन्त जोसफ प्रसिद्ध अथवा कोई उल्लेखनीय व्यक्ति नहीं थे, सुसमाचार भी उनके विषय में एक भी शब्द नहीं कहते, तथापि अपने साधारण दैनिक जीवन के माध्यम से उन्होंने ईश्वर की दृष्टि में साधारण को असाधारण कर दिखाया।

बुलाहट को पहचानने का आमंत्रण

सन्त पापा ने कहा कि बुलाहट को समझने के लिये सन्त जोसफ हमें अपने स्वप्न पर ध्यान केन्द्रित करने का परामर्श देते हैं, इसलिये कि सपनों में ही उन्होंने स्वयं स्वर्गदूतों द्वारा ईश्वर की वाणी सुनी थी तथा ईशइच्छा को पहचाना था। वस्तुतः, जोसेफ के सपनों ने उन्हें ऐसे अनुभवों के लिए प्रेरित किया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। पहली बार दिखाई दिये सपने ने उन्हें मसीह के पालक पिता बना दिया, और दूसरे सपने के बाद वे मिस्र से भाग निकलने के लिये मजबूर हुए, किन्तु अपने परिवार की रक्षा कर सके। तीसरे और चौथे सपने के बाद उन्हें नाज़रेथ लौटना पड़ा जहाँ येसु अपनी प्रेरिताई शुरु कर ईशराज्य की प्रकाशना करनेवाले थे।

सन्त पापा ने कहा कि अपने साधारण दैनिक जीवन में इतनी कठिनाइयों के बावजूद सन्त जोसफ ईश इच्छा को पूरा करने से कभी पीछे नहीं हटे, इसलिये कि उनका विश्वास अटल था। उन्होंने कहा कि बुलाहटों का भी यही हाल है, ईश्वर बुलाते हैं, और आग्रह करते हैं, स्वतः को समर्पित करने का पहला कदम उठाने का हमसे आग्रह करते हैं। उन्होंने कहा कि ईशकृपा के आगे स्वतः को पूर्णतः समर्पित कर ही हम ईश्वर की बुलाहट का प्रत्युत्तर दे सकते हैं।     

19 March 2021, 11:19