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संत जोसेफ पुरोहितों के आदर्श, पोप फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस ने 18 मार्च को परमधर्मपीठीय बेल्जियम कॉलेज के विद्यार्थियों से मुलाकात की जो कॉलेज की 175वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। कॉलेज में संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने भी अध्ययन किया था।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 18 मार्च 21 (रेई)- संत पापा ने कॉलेज के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए संत जोसेफ के पितृत्व के गुण पर चिंतन किया तथा उन्हें अपनी प्रेरिताई में संत जोसेफ से प्रेरणा लेने की सलाह दी।

संत जोसेफ स्वागत करनेवाले पिता

संत पापा ने कहा, "संत जोसेफ सबसे पहले एक स्वागत करनेवाले पिता है।" पारिवारिक जीवन के साधारण दृष्टिकोण से अलग, उन्होंने मरियम और येसु का स्वागत पत्नी और बेटे के रूप में किया। उनकी रक्षा की और उन्हें प्रेम से अपनाया। जोसेफ ने विस्मय एवं रहस्यात्मक सच्चाई की व्याख्या नहीं पूछी। इस अर्थ में वे हमारे आध्यात्मिक जीवन एवं आत्मपरख के गुरू हैं। संत पापा ने कहा कि संत जोसेफ की तरह एक पल्ली पुरोहित को सबसे पहले समुदाय को प्यार करना है और इसी प्यार के द्वारा वह समुदाय को पहचान सकता है एवं उसे एक नया रास्ता दिखाने के लिए उसकी मदद कर सकता है।

रक्षा करनेवाले पिता

रक्षा करना उनकी बुलाहट एवं मिशन का मुख्य भाग था। इस जिम्मेदारी को जोसेफ ने चुपचाप विवेक एवं दीनता से निभाया, बल्कि पूरी तत्परता एवं निष्ठा के साथ पूरा किया, उस समय भी जब वे उसे नहीं समझ रहे थे। अतः उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को एक भले एव विश्वस्त सेवक की तरह आंतरिक स्वतंत्रता के साथ निभाया जो अपने लिए सौंपे गये लोगों की केवल भलाई चाहता है।

संत जोसेफ के पितृत्व से प्रेरित होकर पुरोहित को अपने लोगों से प्रेम करना है और विवेक एवं दृढ़ता के साथ उनकी भलाई एवं खुशी की चिंता करनी है। रक्षा करना एक चरवाहे का गुण है जो अपनी भेड़ों को कभी नहीं छोड़ता। जब एक चरवाहा अपनी भेड़ों को जानता और प्यार करता है तो वह उनकी सेवा करना भी जानता है (1कोर.9,19) और हर कीमत पर उनकी रक्षा करता है। वह अपने विचारों को केंद्र में नहीं रखता बल्कि उनकी भलाई को केंद्र में रक्षा है जिनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गयी है।

 एक स्वप्न देखनेवाले

अंततः संत जोसेफ एक स्वप्न देखनेवाले हैं। वे वास्तविकता से अलग स्वप्न नहीं देखते बल्कि जो देखते हैं उसके परे देखना जानते हैं। वे एक नबी की नजर से देखते एवं ईश्वर की योजना को पहचानते हैं जहाँ दूसरे लोग कुछ नहीं देख सकते। इस प्रकार उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वास्तव में, मरियम और येसु में उन्होंने न केवल एक पत्नी और बेटे को देखा बल्कि ईश्वर के कार्य, उनकी उपस्थिति देखी।

इस प्रकार उन्होंने कमजोर बालक और उनकी माँ की रक्षा की। उन्होंने अपने कर्तव्य को सिर्फ एक परिवार के पिता के रूप में नहीं देखा बल्कि ईश्वर पर विश्वास किया। उन्होंने अपने आपको एक साधन के रूप में ईश्वर के महान योजना को पूरा करने हेतु समर्पित किया और अंत तक उसे चुपचाप पूरा किया। पुरोहितों के लिए भी आवश्यक है कि वे समुदाय के लिए स्वप्न देखें। एक ऐसा समुदाय विकसित करें जो पवित्र आत्मा द्वारा संचालित एवं ईश्वर के प्रेम से प्रेरित हो।  

संत पापा ने संत जोसेफ को समर्पित इस साल में पुरोहितों को निमंत्रण दिया कि वे प्रार्थना में संत जोसेफ के मिशन एवं उनकी छवि की खोज करें, जो ईश्वर के प्रति खुले, महान कार्यों को पूरा करनेवाले, विनम्र, आज्ञाकारी एवं रचनात्मक सेवक थे।

अंत में, संत पापा ने सभी पुरोहितों को मिशन की शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें अपनी प्रार्थना और आशीष द्वारा साथ देने का आश्वासन दिया।     

18 March 2021, 16:17