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संत पापा फ्राँसिस ओर फादर मार्को पोज्जा संत पापा फ्राँसिस ओर फादर मार्को पोज्जा  (ANSA)

संदेह के बिना एक विश्वास आगे नहीं बढ़ सकता, संत पापा

इतालवी समाचार पत्र कोरिएरे देल्ला सेरा ने संत पापा फ्राँसिस के साथ हुए पुरोहित मार्को पोज़्ज़ा के साक्षात्कार की नई पुस्तक के अंश जारी किए, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे संदेह और विश्वास के संकट हमें ईश्वर के रहस्य की ओर ले जाते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 1 मार्च 2021 (वाटिकन न्यूज) : संत  पापा फ्राँसिस के साथ फादर मार्को पोज़्ज़ा के साक्षात्कार की नई पुस्तक का शीर्षक है, "ऑफ वाइसेस एंड वरच्यूस" (गुणों और अवगुणों का),जो 2 मार्च को रिलीज़ होने वाली है। रिज़ोली द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के कई भाग रविवार को इतालवी समाचार पत्र कोरिएरे देल्ला सेरा द्वारा प्रकाशित किए गए थे।

क्रोध और बदमाशी

साक्षात्कार के एक भाग में, संत पापा क्रोध के बारे बताते हैं और क्रोध से छुटकारा पाने के मार्ग का वर्णन करते हैं।

वे कहते हैं,“क्रोध एक तूफान है जिसका उद्देश्य विनाश करना है। एक उदाहरण, युवा लोग एक दूसरे पर धौंस जमाते, या धमकाते हैं। (...) धमकाना तब उत्पन्न होता है, जब वह अपनी पहचान को समझने के बजाय, अपने को छोटा बना लेता है और दूसरों के पहचान पर हमला करता है। जब युवाओ द्वारा समूहों, स्कूलों और पड़ोसियों के बीच आक्रामकता और बदमाशी के एपिसोड देखने को मिलते हैं, तो हम हमलावर के पहचान की कमी को देखते हैं। धौंस या बदमाशी से उबरने का एकमात्र तरीकाः साझा करना, एक साथ रहना, बातचीत करना और दूसरों को सुनने के लिए समय निकालना है, क्योंकि केवल समय ही एक संबंध को बना सकता है।"

ईश्वर का प्रकोप

संत पापा फ्राँसिस ईश्वर के क्रोध पर विचार करते हैं। वे याद करते हैं कि दिव्य क्रोध "बुराई के खिलाफ निर्देशित है, न कि मानवीय कमजोरी से आता है,(...) ईश्वर का क्रोध न्याय और 'शुद्ध' करने की मांग करता है। बाइबिल के अनुसार, परमेश्वर के क्रोध का परिणाम है बाढ़। संत पापा बताते हैं कि बाढ़, कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, "एक पौराणिक कहानी है।" लेकिन, पुरातत्वविदों के अनुसार, यह "एक ऐतिहासिक घटना है क्योंकि उनके उत्खनन में बाढ़ के निशान पाए गए हैं। संत पापा फ्राँसिस ने सृष्टि की देखभाल नहीं करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि हम एक नई "बाढ़" का जोखिम उठाते हैं।

शासन करने में विवेक

विवेक के विषय की ओर मुड़ते हुए, संत पापा इसे "सरकार का गुण" कहते हैं। “बिना विवेक के शासन करना असंभव है। इसके विपरीत, जो बिना विवेक के शासन करता है वह खराब तरीके से शासन करता है। वे बुरे काम करते हैं और बुरे फैसले करते हैं, जो हमेशा लोगों को नष्ट करते हैं।”

उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि सरकार में विवेक, "कभी-कभी असंतुलित होना चाहिए, ताकि बदलाव लाने वाले निर्णय किए जा सकें।"

आस्था और संदेह

अंत में, संत पापा फ्राँसिस विश्वास की शंकाओं के आधार पर परीक्षण करते हैं।

वे कहते हैं,"शैतान हममें संदेह को डाल देता है, फिर जीवन में अनेक त्रासदियाँ आती हैं: ईश्वर इसे क्यों अनुमति देते है?  संदेह के बिना एक विश्वास आगे नहीं बढ़ सकता है। (...) ईश्वर द्वारा परित्याग किए जाने का विचार विश्वास का एक अनुभव है जो कई संतों ने अनुभव किया है, साथ ही आज कई लोग हैं जो ईश्वर द्वारा परित्यक्त महसूस करते हैं, लेकिन विश्वास नहीं खोते हैं। वे विश्वास रुपी उपहार की देखभाल करते हैं: अभी मुझे कुछ नहीं लगता है, लेकिन मैं विश्वास के उपहार की रक्षा करता हूँ। जो ख्रीस्तीय कभी भी इस तरह की मनः स्थितियों से नहीं गुजरे हैं उनके पास कुछ कमी है, क्योंकि इसका मतलब है कि वे छिछलेपन में ही बस गए हैं। विश्वास के खिलाफ आस्था के संकट विफलता नहीं है। इसके विपरीत, वे ईश्वर के रहस्य की गहराई में पूरी तरह से प्रवेश करने की आवश्यकता और इच्छा को प्रकट करते हैं। इन परीक्षणों के बिना एक विश्वास मुझे संदेह में ले जाता है कि क्या यह सच्चा विश्वास है?”

01 March 2021, 13:22