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यूगांडा के युवा जलवायु कार्यकर्ता प्रदर्शन में भाग लेते हुए यूगांडा के युवा जलवायु कार्यकर्ता प्रदर्शन में भाग लेते हुए  (AFP or licensors)

जलवायु परिवर्तन का सामना करने हेतु शिक्षा में आम प्रयास की जरूरत

पोप फ्रांसिस ने संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित जैव विविधता पर एक ऑनलाइन फोरम के दौरान जलवायु परिवर्तन और गरीबी की वैश्विक परिस्थिति से लड़ने के लिए संयुक्त, ठोस प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 मार्च 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने जैव विविधता पर यूनेस्को मंच के सदस्यों को संदेश भेजा।

यूनेस्को के महानिदेशक औड्रे अजौले को प्रेषित संदेश में संत पापा फ्रांसिस ने "जलवायु परिवर्तन और गरीबी ˸ नैतिक सिद्धांत एवं वैज्ञानिक जिम्मेदारी" पर सभा में भाग लेने के निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि यूनेस्को इस सभा के द्वारा हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक समस्या पर ध्यान देना चाहता है।  

नये विकास मॉडल की आवश्यकता

संत पापा ने प्रेषित संदेश में कहा, "वास्तव में, जलवायु परिवर्तन एवं अत्याधिक गरीबी के विरूद्ध संघर्ष जो जटिल एवं एक-दूसरे से जुड़े मामले हैं, इसके लिए एक नये विकास मॉडल को पुनः परिभाषित करने की जरूरत है जो हरेक व्यक्ति एवं व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को केंद्र में रखे। सम्मानित और संरक्षित किए जाने वाले मूलभूत स्तंभ के रूप में, एक पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है जिसमें एकजुटता एवं "राजनीतिक उदारता" की नैतिकता शामिल हो। वास्तव में, केवल इसी से सार्वभौमिक आमहित, प्यार की सच्ची सभ्यता, जहां उदासीनता और बर्बादी की महामारी के लिए कोई जगह न हो, उसे बढ़ावा देना संभव होगा।

ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने के लिए शिक्षा सहायक

सबसे गरीब लोगों पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव हमें वर्तमान सामाजिक-पर्यावरणीय संकट की प्रतिक्रिया पर विचार करने, हमारे आमघर की नाजुकता के लिए जिम्मेदार तरीके से कार्य करने का आह्वान कर रहा है ताकि हमारे रहने की स्थिति, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार और रोजगार के नए अवसर पैदा किये जा सकें।

संत पापा ने कहा, "इस परिप्रेक्ष्य में पेरिस समझौता सटीक है जो हमें धीरे-धीरे इस तथ्य से अवगत करा रहा है कि जलवायु परिवर्तन को तकनीकी मुद्दे की अपेक्षा अधिक नैतिक के रूप में देखा जाना चाहिए, तभी हमारे लिए आवश्यक निर्णायक मोड़ संभव होगा। शिक्षा पर निवेश से ही नई पीढ़ी की जीवनशैली में सृष्टि के प्रति सम्मान बढ़ेगा। यह महत्वपूर्ण है कि युवाओं को सृष्टि की देखभाल एवं दूसरों का सम्मान करना सिखाया जाए, उन्हें उत्पादन एवं उपभोग की नई आदत को बढ़ावा दिया जाए ताकि पर्यावरण और व्यक्ति को स्थान देनेवाले आर्थिक विकास का एक नया मॉडल विकसित किया जा सके। संत पापा ने कहा कि इसको प्राप्त करने के लिए आपका संगठन महत्वपूर्ण है और मुझे खुशी है कि यह सभा जलवायु आपातकाल के नैतिक प्रभावों पर आधारित है, ताकि वैज्ञानिक पहलुओं को गहरा किया जा सके।

संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता

संत पापा ने कहा है कि यदि हम जलवायु परिवर्तन का सामना प्रभावशाली ढंग से करना चाहते हैं तो हमें एक साथ कार्य करना होगा, वर्तमान विकास मॉडल की अच्छी तरह जाँच करनी होगी ताकि विसंगतियों और विकृतियों को दूर किया जा सके।  

"जलवायु परिवर्तन की गंभीर स्थिति को ठोस जवाब देना अनिवार्य है। कार्रवाई करने में असफलता का दूसरा परिणाम होगा, खासकर, सबसे गरीब लोगों के लिए जो इस परिवर्तन से सबसे अधिक खतरे में हैं।"

इस संबंध में, संत पापा ने यूनेस्को के कार्यों के महत्व को उजागर किया है जो जलवायु संकट के नैतिक निहितार्थ पर आधारित है ताकि वैज्ञानिक आयाम को गहरा किया जा सके।  

संत पापा ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के योगदानों को रेखांकित किया है जिनको न केवल सरकार बल्कि नागरिक समाज के शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक जगत और स्थानीय एवं आदिवासी समुदाय ने भी प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि "ये गैर-राज्य अभिनेता, जो अक्सर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहते हैं, एक टिकाऊ उत्पादन और खपत प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए परिवर्तनात्‍मक तरीकों की खोज में विशेष संवेदनशीलता दिखाते हैं और इस तरह वे पृथ्वी की पुकार एवं गरीबों के व्याख्याता बन जाते हैं।

संत पापा ने संयुक्त पहल की आवश्यकता पर जोर दिया तथा कहा कि "समय वैश्विक समाधानों की खोज के लिए तेजी से बढ़ रहा है और वर्तमान स्वास्थ्य आपातकाल हमें कुछ लोगों के लाभ के बजाय" सभी मनुष्यों की चिंता करने हेतु बाध्य कर रहा है।"

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि "जलवायु परिवर्तन की स्थिति का सामना करने के लिए आवश्यक परिवर्तन की प्रक्रियाओं को मजबूत करने और गरीबी के खिलाफ लड़ाई में योगदान करने के लिए, मंच सच्चे अभिन्न मानव विकास के बढ़ावे को योगदान देगा।"

30 March 2021, 16:33