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पनामा विश्व युवा दिवस 2019 में पापा फ्राँसिस युवाओं के साथ पनामा विश्व युवा दिवस 2019 में पापा फ्राँसिस युवाओं के साथ  (Vatican Media)

पोप फ्रांसिस के साथ 8 साल ˸ पूरे विश्व के लिए सुसमाचार का आनन्द

13 मार्च 2013 को जॉर्ज मारियो बेरगोलियो संत पेत्रुस के सिंहासन पर प्रथम जेस्विट एवं प्रथम लातीनी अमरीकी पोप चुने गये थे। इन 8 सालों के परमाध्यक्षीय काल की विशेषताएँ हैं, पहल एवं सुधार। जिसका उद्देश्य है सभी ख्रीस्तियों को एक नई मिशनरी प्रेरणा से संलग्न करना ताकि पूरी मानवता के लिए येसु का प्रेम बांटा जा सके।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 13 मार्च 2021 (रेई)- सामीप्य, समानार्थी और प्रेरितिक उत्साह ये संत पापा फ्रांसिस के प्रशासन के कोने के पत्थर हैं जिनकी नियुक्ति संत पेत्रुस के सिंहासन पर 8 सालों पहले हुई है। इस परमाध्यक्ष की योजना सबसे नीचे से शुरू होती है जो अस्तित्वगत और भौगोलिक रूप से बाहरी इलाकों में रहनेवालों पर ध्यान देती है, जो उनके व्यक्तित्व और काम के अनुरूप कार्य करती है और उन्हें सुसमाचार की सच्ची ताजगी को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह विश्वासियों से एक नये उत्साह और गतिशीलता की मांग करती है ताकि येसु का प्रेम सचमुच हरेक व्यक्ति तक पहुँच सके। पोप फ्राँसिस की एक इच्छा है कि कलीसिया "खुले द्वार" के साथ "बाहर निकले", एक "क्षेत्र अस्पताल" बने जो कोमलता की क्रांति बने न कि इसकी करुणा के चमत्कार से डरे।

इवंजेली गौदियुम एक समाचार, परमाध्यक्ष का एक कार्यक्रम संबंधी दस्तावेज

"फ्राँसिस" के नाम से पहले पोप, प्रथम जेस्विट और प्रथम लातीनी अमरीकी किन्तु आधुनिक समय के पहले पोप, जिनका चुनाव उनके पूर्वाधिकारी की इस्तीफे पर हुई। बेरगोलियो ने अपने परमाध्यक्षीय काल की शुरूआत खबरों से की, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है संत मर्था आवास में दैनिक मिस्सा का अनुष्ठान जहाँ उन्होंने निवास करने का निर्णय लिया जो एक दूसरी नई सच्चाई है। उन संक्षेप उपदेशों, जिनको पोप एक पल्ली पुरोहित की तरह सहज रूप में प्रस्तुत करते हैं वे विश्वासियों से सीधे वार्तालाप करते हैं, और उन्हें ईश वचन से तत्काल स्पर्श किये जाने का आह्वान करते हैं। 2013 में प्रेरितिक प्रबोधन "इवंजेली गौदियुम" को भी प्रकाशित किया गया जो नये परमधर्माध्यक्षीय काल का एक "कार्यक्रम संबंधी घोषणा पत्र" है जिसमें संत पापा फ्रांसिस आनन्द, कलीसियाई संरचना के सुधार एवं पोप की पदवी में बदलाव से चिन्हित एक नये सुसमाचार प्रचार का आह्वान करते हैं ताकि वह अधिक मिशनरी एवं येसु की इच्छा के अधिक अनुकूल हो सके। यही कारण है कि 2013 में संत पापा ने कार्डिनलों की एक समिति का गठन किया जिनका कार्य है रोमन कूरिया पर प्रेरितिक संविधान "पास्तोर बोनुस" (1988) के संशोधन के लिए एक योजना का अध्ययन करना।

परिवार

2014 में संत पापा फ्रांसिस की प्रेरिताई का मुख्य ध्यान परिवार था जिसके लिए उन्होंने एक धर्माध्यक्षीय धर्मसभा (सिनॉड) का आयोजन किया। पोप के अनुसार समकालीन व्यक्तिवादी समाज परिवार पर क्रूर हमला कर रहा है, बच्चों एवं माता पिता के अधिकारों को खतरे में डाल रहा है, खासकर, नैतिक और धार्मिक शिक्षा के क्षेत्र में।

उसके बाद परिवार की विषयवस्तु ने अपनी शीर्षबिंदु प्रेरितक प्रबोधन "अमोरिस लैतित्सिया में प्राप्त की, जिसको 8 अप्रैल 2016 को प्रकाशित किया गया। संत पापा ने इस प्रेरितिक प्रबोधन में परिवार के महत्व एवं सुन्दरता पर जोर दिया है जिसका आधार एक पुरूष और एक स्त्री के बीच स्थायी विवाह है। साथ ही, यथार्थवाद के साथ उन दुर्बलताओं पर भी प्रकाश डाला गया है जिसको कुछ लोग अनुभव करते हैं उदाहरण के लिए, तलाक और पुनर्विवाह, इस पर पुरोहितों को विवेक से निर्णय करने का प्रोत्साहन देती है।

2014 में सुधार के दृष्टिकोण से, नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मपीठीय आयोग का गठन महत्वपूर्ण है, जिसके द्वारा संत पापा का उद्देश्य है "सभी नाबालिगों एवं दुर्बलों की सुरक्षा में स्थानीय कलीसिया की जिम्मेदारी को प्रोत्साहन देना।" इस राजनयिक मोर्चे पर संत पापा फ्रांसिस का "2014" दो बड़े उपक्रमों से रेखांकित है ˸ पहला, पवित्र भूमि में शांति का आह्वान जिसको वाटिकन उद्यान में 8 जून को इस्राएल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेस एवं फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ सम्पन्न किया गया। और दूसरा है अमरीका एवं क्यूबा के बीच राजनयिक संबंध जोड़ना।

सृष्टि की देखभाल

2015 सृष्टि की देखभाल पर केंद्रित है। 24 मई को संत पापा फ्राँसिस ने प्रेरितिक विश्व पत्र "लौदातो सी" पर हस्ताक्षर किया जो आमघर (पृथ्वी) की देखभाल पर आधारित है। जिसमें प्रकृति के लिए चिंता, गरीबों के प्रति समानता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को अलग नहीं किया जा सकता। इस मामले में, संत पापा ने "सृष्टि की देखभाल के लिए विश्व प्रार्थना दिवस" की स्थापना की है जो ख्रीस्तीय एकतावर्धक है और हर साल 1 सितम्बर को मनाया जाता है। इस बीच रोमन कूरिया पर नये प्रेरितिक संविधान पर कार्य जारी रहा जिसको बाद में "सुसमाचार का प्रचार करें" शीर्षक दिया गया।  

करुणा की असाधारण जयन्ती

साल 2016 को करुणा की जयन्ती मनायी गई। यह एक ऐसा साल रहा जिसमें संत पापा फ्रांसिस ने "दयालु बनो जैसे तुम्हारा स्वर्गीय पिता दयालु है" की विषयवस्तु के साथ असाधारण जयन्ती वर्ष की घोषणा की। "करुणा के शुक्रवारों" के साथ संत पापा ने सबसे निम्न कहे जानेवाले लोगों पर ध्यान दिया तथा अपने व्यक्तिगत मुलाकातों द्वारा गरीब, बीमार और हाशिये के लोगों का स्वागत किया। इसी साल उन्होंने संत पेत्रुस महागिरजाघर एवं विश्व के सभी गिरजाघरों के पवित्र द्वार खोले। 2016 में एक बड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न हुई जब 12 फरवरी को क्यूबा में संत पापा फ्रांसिस ने मास्को एवं रूस के प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल से मुलाकात की। दोनों ने मिलकर एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किया, जिसमें उन्होंने ख्रीस्तियों पर अत्याचार एवं युद्ध के अंत करने के साथ समकालीन दुनिया की चुनौतियों का जवाब देने का दायित्व अपनाया, अंतरधार्मिक वार्ता, अप्रवासियों और शरणार्थियों की मदद एवं जीवन तथा परिवार की सुरक्षा को बढ़ावा दिया।  

गरीबों के लिए विश्व दिवस

2017 संत पापा फ्रांसिस के एक महत्वपूर्ण कार्य से चिन्हित है जो शांति की कूटनीति का हिस्सा है। 20 सितम्बर 2017 को संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क शहर में परमधर्मपीठ पहले राष्ट्रों में से एक था जिन्होंने परमाणु हथियारों के निषेध पर समझौते में हस्ताक्षर किया एवं पुष्टि दी। प्रेरितिक क्षेत्र में इस साल की विशेषता रही, "गरीबों के विश्व दिवस" को पहली बार मनाया जाना, जिसके द्वारा संत पापा याद दिलाना चाहते हैं कि गरीब लोगों में ही हम "ख्रीस्त की उपस्थिति" को देख सकते हैं, अतः वे हमारे लिए स्वर्ग के द्वार खोलते एवं "स्वर्ग के लिए हमारे पासपोर्ट" हैं।   

चीन में समझौता

2018 में चीन और परमधर्मपीठ के बीच समझौता हुआ। प्रेरितिक स्तर पर युवाओं पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा का आयोजन किया गया जो एक कलीसियाई चिंतन का अवसर रहा। संत पापा ने युवाओं से कहा कि वे सुनें, करीब रहें एवं गवाही दें क्योंकि विश्वास मुलाकात की बात है सिद्धांत नहीं। यह एक अपील है जो सिनॉड के उपरांत प्रकाशित प्रेरितिक प्रबोधन "ख्रीस्तुत विवित" से मजबूत होता है जिसपर 2019 में हस्ताक्षर किया गया था। संत पापा ने दस्तावेज में लिखा है, "आप ईश्वर के वर्तमान हैं।" उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि वे समकालीन दुनिया की चुनौतियों से सामने पीछे न हटें तथा सबसे पिछले लोगों पर ध्यान दें। राजनयिक स्तर पर, धर्माध्यक्षों की नियुक्ति से संबंधित मामले पर 22 सितम्बर 2018 को चीन एवं परमधर्मपीठ के बीच अनंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। उसके बाद 2020 में इस समझौता को दो साल के लिए पुनः आगे बढ़ाया गया।       

दुराचार के खिलाफ संघर्ष

2018 ने काथलिक कलीसिया के अत्यन्त कड़वे पृष्ट को खुलते देखा, खासकर, याजकों द्वारा किये गये दुराचार के कार्य को। कार्डिनल जॉर्ज पेल से संबंधित मामला जिनकी ऑस्ट्रेलिया में जाँच की गई और 13 महीनों तक अन्यायपूर्वक तरीके से जेल में व्यतीत करने के बाद वे अपराधमुक्त किये गये। पूर्व खलदेई पुरोहित फेरदिनंन्द कारादिमा को याजकीय पद से हटाया जाना और संयुक्त राज्य अमेरीका में "पेंसिल्वेनिया रिपोर्ट", पोप द्वारा दृढ़ संकल्प के साथ, अपराधों के खिलाफ संघर्ष के महत्व को उजागर करती है। अगस्त में, आयरलैंड में प्रेरितिक यात्रा के अंत में, संत पापा ने कलीसिया की ओर से क्षमा मांगने के लिए एक हृदय स्पर्शी "प्रायश्चित का कार्य" किया। इसी समय में पूर्व कार्डिनल मैककरिक का नाबालिगों के साथ दुराचार का मामला सामने आया जिन्हें 2019 में याजकीय पद से हटाया गया जो समाचार पत्रों में काफी चर्चा में रहा। यह एक ऐसा मामला था जिसका उत्तर बाद में परमधर्मपीठ ने संत पापा के आदेश पर, वाटिकन राज्य सचिव की निगरानी में एक विशेष रिपोर्ट तैयार कर दिया। यह रिपोर्ट 10 नवम्बर 2020 को प्रकाशित हुआ।  

दुराचार के खिलाफ संघर्ष 2019 में जारी रहा जब वाटिकन में नाबालिगों की सुरक्षा हेतु एक सभा का आयोजन किया गया। उसी सभा में मोतू प्रोप्रियो (स्वप्रेरणा से लिखित प्रेरितिक पत्र) "वोस एसतिस लुक्स मुंदी" प्रकाशित किया गया जिसमें कहा गया कि याजकों एवं धर्मसमाजियों के लिए दुराचार का रिपोर्ट देना अनिवार्य है। साथ ही हरेक धर्मप्रांत में एक व्यवस्था स्थापित करने की बात कही गई जिससे रिपोर्ट को आसानी से प्राप्त किया जा सके। दिसम्बर में अध्यादेश के द्वारा संत पापा ने यौन दुराचार के मामले में परमधर्मपीठीय गोपनीयता को भी समाप्त किया।  

भाईचारा, शांति और ख्रीस्तीय एकता

साल 2019 में संत पापा फ्रांसिस ने तीन मुख्य भावों को समर्थन दिया ˸ पहला, "विश्व शांति और सहअस्तित्व हेतु मानव बंधुत्व" के दस्तावेज पर हस्ताक्षर। दस्तावेज पर संत पापा फ्राँसिस एवं अल अजहर के ग्रैंड इमाम अहमद अल ताय्येब ने अबू धाबी में 4 फरवरी को हस्ताक्षर किया। यह ईसाई एवं इस्लाम धर्मावलम्बियों के बीच संबंध के मील का पत्थर था। दस्तावेज अंतरधार्मिक वार्ता को मजबूत करने का प्रोत्साहन देता है एवं आपसी सम्मान को बढ़ावा देते हुए आतंकवाद एवं हिंसा की निंदा करता है।  

दूसरा भाव था, दक्षिणी सूडान के कलीसियाई एवं नागरिक नेताओं के लिए वाटिकन में आध्यात्मिक साधना का आयोजन। आध्यात्मिक साधना अप्रैल में सम्पन्न हुई जिसका अंत एक विस्मयकारी घटना से हुई। संत पापा ने घुटनी टेककर, दक्षिणी सूडान के राष्ट्रपति साल्वा कीर मायारदित एवं नामित उप राष्ट्रपति के पैरों का चुम्बन किया। ऐसा करने का तात्पर्य था कि युवा अफ्रीकी देश में युद्ध की आग एक बार और सभी के लिए बुझ जाए।"  

तीसरा भाव, ख्रीस्तीय एकता पर लक्षित था। 29 जून को संत पापा फ्राँसिस ने कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष के प्रतिनिधियों को संत पेत्रुस के अवशेष का एक अंश भेंट किया। जैसा कि संत पापा स्वयं प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम को पत्र में लिखते हैं, यह उस यात्रा को सुदृढ़ता प्रदान करना है जिसको हमारी कलीसियाएँ एक दूसरे के करीब आने के लिए कर रही हैं।  

आर्थिक नवीनीकरण

आगस्त 2019 के नवीनीकरण के तहस संत पापा फ्रांसिस ने (आईओआर) धर्मो पर कार्यरत संस्थानों के क़ानून को नवीनीकृत करते हुए खातों के ऑडिट हेतु बाहरी लेखा परीक्षक की नियुक्ति को स्वीकृति दी। इस निर्णय को सन् 2020 के अंत में वित्तीय सूचना प्राधिकरण कानून के तहत लागू किया गया जो अब (एएसआईएफ) पर्यवेक्षी और वित्तीय सूचना प्राधिकरण कहलाता है। आर्थिक और वित्तीय मामलों में कुछ दक्षताओं के संबंध में स्वप्रेरणा से लिखित प्रेरित पत्र जो वाटिकन राज्य सचिवालय के अलावे संत पेत्रुस के सिहांसन की निधियों और संपत्तियों के प्रबंधन को एपोस्टोलिक सी (APSA) पैट्रिमोनी के प्रशासन में स्थानांतरित कर दिया, जो अर्थव्यवस्था के संबंध में सचिवालय की पर्यवेक्षी भूमिका को मजबूत बनाता है।

महामारी के समय प्रार्थना

सन् 2020 में कोविड महामारी के दौरान संत पापा फ्रांसिस अपनी प्रार्थनाओं की निरंतरता के माध्यम विश्वासियों के निकट रहे। पूरी दुनिया 27 मार्च के “स्तातियो ओरबीस” की याद करती है जब संत पापा फ्रांसिस झमाझम वर्षा के बीच भी सुनसान संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में पूरे विश्व के लिए प्रार्थना करते रहे। संचार माध्यमों और तकनीकी से दूरियों को कम किया क्योंकि महामारी के समय में संत पापा ने अपने बुधवारीय आमदर्शन, देवदूत प्रार्थना और वाटिकन निवास की प्रार्थनालय संत मार्था से अपने प्रातकालीन पवित्र मिस्सा का आंखों देखाहाल लोगों के लिए उपलब्ध कराया।

फरवारी के महीने में “केरीदा आमाजोनिया” उनका पाँचवां प्रेरितिक प्रबोधन प्रकाशित हुआ। यह अपने में विशेष रुप से पान-आमाजोन प्रांत की मुख्य बातों को संग्रहित करता है जिसका आयोजन वाटिकन में सन् 2019 को हुआ था। अक्टूबर के अंत में संत पापा तृतीय विश्व प्रेरितिक पत्र, “फ्रातेल्ली तूत्ती” प्रकाशित हुआ। यह विश्व प्रेरितिक पत्र हमारे बीच से युद्ध की स्थिति के दूर करते हुए भ्रातृत्व और विश्व बंधुत्व में प्रवेश करने की मांग करते हैं जिससे हम एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकें, यह हम सभों से निष्ठा की मांग करता है।

परित्यक्तों को ध्यान में रखते हुए प्रेरितिक यात्रा

सन् 2020 का समापन ऐतिहासिक इराक की प्रेरितिक यात्रा हेतु घोषणा से हुई जो हाल ही में पूरी हुई। यह प्रथम अवसर था जब संत पेत्रुस के किसी उत्तराधिकारी ने इराक की यात्रा की। 15 महीने के बंद के  बाद संत पापा पुनः सुसमाचार की सुन्दरता और ज्योति को विश्व के सामने लाते हैं। वे अपनी निगाहों के और एक बार हाशिये में रहने वालों की ओर करते हैं जिन्हें “भ्रातृत्व और आशा” की नितांत आवश्यकता है।

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के धर्मगुरू स्वरुप संत पापा फ्रांसिस की पहली यात्रा यद्यपि 8 जुलाई, 2013 को लम्पादूसा की हुई जहाँ प्रवासन की निराशाजनक स्थिति को उन्होंने अपने परमाध्यक्षीय कार्यकाल का एक मुख्य विषय बनाया। वे सदैव इस बात की याद दिलाते हैं कि सभी प्रवासी मानव परिवार के अभिन्न अंग हैं वे इसे अपनी बातों में केवल व्यक्त नहीं करते वरन कार्यों में प्रदर्शित करते हैं। अप्रैल सन् 2016, अपने में सदैव यादगार रहेगा जब लेस्बोस की अपनी यात्रा से लौटने के दौरान उन्होंने सीरिया के 12 शरणार्थी को अपने हवाई जहाज में अपने साथ रोम लाया जिससे उनकी मदद की जा सके।

कुछ सांख्यिकीय आंकड़े

अब तक संत पापा फ्रांसिस ने कुल मिलाकर इटली में 25 यात्राएं की हैं जबकि इस प्रायद्वीप के बाहर उनकी 33 प्रेरितिक यात्राएँ हुई हैं। उन्होंने अब तक 340 आमदर्शन समारोह में भाग लिया है, 450 देवदूत/स्वर्गीय रानी प्रार्थना में शरीक हुए हैं। संत मार्था के प्रार्थनालय से उन्होंने करीबन 790 प्रवचन दिये हैं और 900 नये संतों की घोषणा के अलावे 800 ओट्रान्टो के शहीद को घोषित किया है। संत पापा ने 7 सामान्य लोकसभा परिषद (कार्डिनलमंडल) का अयोजन करते हुआ 101 नये कार्डिनलों को कलीसिया की सेवा हेतु नियुक्त किया है। उन्होंने विशेष वर्षों की घोषणा की जैसे कि समर्पित जीवन का वर्ष (2015-2016), संत जोसेफ का वर्ष (2020-2021), परिवार-आमोरिस लात्तिसिया (2021-2022)। उन्होंने कई दिवसों की घोषणा की जिसकी अंतिम कड़ियों में से एक है विश्व नाना-नानी और बुजुर्ग दिवास जो येसु के नाना-नानी, संत अन्ना और जोवाकिम के पर्व दिवस के निकट सन् 2021 के जुलाई महीने में पहली बार मनाया जायेगा।

13 March 2021, 16:47