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फोकलारे मूवमेंट के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फोकलारे मूवमेंट के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा   (ANSA)

फोकलारे से पोप ˸ संवाद एवं खुलापन द्वारा सुसमाचार प्रचार करें

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 6 फरवरी को वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में फोकोलारे मूवमेंट की महासभा में भाग लेनेवाले 150 प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा प्रोत्साहन दिया कि वे संस्थापिका कियारा लुबिक के पदचिन्हों पर चलते हुए भ्रातृत्व प्रेम के सामीप्य का साक्ष्य दें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2021 (रेई)- संत पापा ने कहा, "यह भ्रातृत्वपूर्ण निकटता का रास्ता है जो न्याय और शांति के लिए भली इच्छा रखनेवाले लोगों से मिलकर कार्य करते हुए, हमारे समय के गरीब, पिछड़े, एवं बहिष्कृत लोगों समेत, सभी स्त्री पुरूषों के लिए पुनर्जीवित ख्रीस्त की उपस्थिति को प्रस्तुत करता है।"

महासभा में फोकलारे मूवमेंट ने कई मूख्य मुद्दों पर विचार किया एवं नये अधिकारियों का चुनाव किया।

संत पापा ने उनकी यात्रा में उन्हें प्रोत्साहन देते हुए कहा, "कियारा लुबिक के पदचिन्हों पर चलते हुए क्रूसित ख्रीस्त के क्रूस पर से अकेलापन की आवाज सुनें जो उनके प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है। उनकी कृपा द्वारा हम उदार बनें तथा पीड़ा एवं त्रासदियों को मानवता के लिए प्रकाश एवं आशा के स्रोत में बदलें।"

उन्होंने अपने चिंतन को तीन बिन्दुओं में प्रस्तुत किया ˸ संस्थापक के बाद का युग; संकटों और जीवित आध्यात्मिकता के महत्व के साथ सुसंगतता और यथार्थवाद।

खुलापन और वार्ता

संस्थापक के बाद के युग पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने गौर किया कि कियारा लुबिक की मृत्यु के 12 वर्षों बाद, मूवमेंट को इस प्राकृतिक घाटे से बाहर निकलने तथा संख्या कम करने का आह्वान किया जाता है ताकि संस्थापक के कारिज्म की सजीव रूप में अभिव्यक्त जारी रह सके।

"यह एक गतिशील निष्ठा, समय के चिन्ह एवं आवश्यकता को समझने की क्षमता और मानवता की नई आवश्यकता के प्रत्युत्तर की मांग करता है।" संत पापा ने कहा कि यह मूल स्रोत के प्रति निष्ठावान बने रहने, पुनः विचार करने और नई सामाजिक एवं संस्कृतिक परिस्थिति के साथ संवाद में व्यक्त करने की बात है।  

नवीनीकरण का यह कार्य उतना ही अधिक फलदायी होता है जितना अधिक यह रचनात्मकता, ज्ञान, सभी के प्रति संवेदनशीलता और कलीसिया के प्रति निष्ठा के साथ किया जाता है।"

संत पापा ने कहा कि हमें दूसरों के प्रति खुला होना चाहिए चाहे वे कोई भी हों, सुसमाचार सभी के लिए है, यह सभी जगह एवं समय की नई मानवता के लिए खमीर है।  

समस्याओं का सामना

संत पापा ने सदस्यों को अपने आपमें बंद होने के खिलाफ चेतावनी दी जिसको उन्होंने कहा कि यह हमेशा संस्था को व्यक्तियों के नुकसान से बचाने की ओर ले जाता है, जो दुराचारों के रूपों को औचित्य ठहराने या ढंकने की कोशिश करता है।”

इसके विपरीत संत पापा ने कहा कि "यह बेहतर है साहसी बनना और कलीसिया के निर्देश के अनुसार समता एवं सच्चाई के साथ समस्याओं का सामना करना।"

एक नई परिपक्वता का निमंत्रण

दूसरा बिन्दू "संकट के महत्व" पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि हर संकट परिपक्वता के लिए एक निमंत्रण है, यह पवित्र आत्मा का समय है जो मानवीय जटिलता एवं विरोधाभास से निराश हुए बिना सुधार के लिए प्रेरित करता है।  

यह प्रशासन का कार्य है, हर स्तर पर कि वह सर्वोत्तम और रचनात्मक तरीके से समुदाय और संगठनात्मक संकटों को दूर करने के लिए काम करे। व्यक्तियों के आध्यात्मिक संकट पर विशेष ध्यान देते हुए जिसमें व्यक्ति की अंतरंगता और अंतरात्मा का क्षेत्र शामिल है संत पापा ने गौर किया कि उसका सामना विवेकपूर्ण तरीके से हरेक सदस्य को करना है।”

संत पापा ने कहा कि यह एक अच्छा नियम है जिसको व्यक्तियों पर न केवल संकट के समय लागू करना है बल्कि आमतौर पर उनके आध्यात्मिक यात्रा में साथ देना है।

अन्दर और बाहर

उसके तीसरे बिन्दु पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा, “आप अपनी आध्यात्मिक को सामंजस्य और यथार्थता” में जीयें। आप के कार्य का अंतिम आदर्श लक्ष्य येसु के मनोभावों से मेल खाता है जिन्होंने अंतिम समय में अपने पिता से प्रार्थना की, “जिससे सब एक हो जायें”। हम यह भली-भांति जानते हैं कि यह पवित्र आत्मा और तृत्वमय ईश्वर की कृपा से संभव है। यह मतलब हमसे द्विपक्षीय प्रतिबद्धता की मांग करती है, “आन्दोलन के अंदर और बाहर जाना”।

संत पापा ने कहा,“मैं आप सभों को प्रोत्साहित करता हूँ कि आप भ्रातृत्वमय प्रेम का साक्ष्य दें जिसके द्वारा सभी अवरोधों पर विजयी पाई जा सकती है जिसके द्वारा  हर मानवीय परिस्थिति तक पहुंचा जा सकता है।”

उन्होंने आन्दोलन की निष्ठा के संबंध में कहा,“मैं आप को अधिक से अधिक सहभागिता हेतु आग्रह करता हूँ, जिससे सभी सदस्य आदर्शों को कार्यान्वित करने के संबंध में, एक-दूसरे का सहयोग कर सकें जो माता मरियम के विशेष उद्देश्यों को पूरा करेगा।”

दुःखों को आशा में बदलना

अंत में संत पापा ने उपस्थित क्यारा लुबिक के अनुसरणकर्ताओं का आहृवान करते हुए कहा कि आप क्रूस में परित्यक्त येसु की पुकार को सुनें, जो प्रेम की सर्वोच्च निशानी है। वहाँ से हमारे लिए कृपा आती है, “जो हम कमजोरों और पापियों को उत्प्रेरित करता है, जिसके फलस्वरुप हम अपनी उदरता में साहसिक प्रत्युत्तर देते हैं। यह हमें पीड़ा और दुःख को मानवता के लिए आशा और ज्योति में परिवर्तित करने हेतु मदद करता है। मृत्यु से जीवन के इस मार्ग में हम ख्रीस्तीयता के हृदय और आपके आदर्श को पाते हैं।

06 February 2021, 16:20