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लाजरूस की कब्र से पत्थर हाते हुए लाजरूस की कब्र से पत्थर हाते हुए  

संत पापा ने 6 संतों को रोमन कैलेंडर में जोड़ा

संत पापा फ्रांसिस ने रोमन काथलिक कलीसिया के पूजनपद्धति कैलेंडर में 6 नये संतों की स्मृति को जोड़ा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 2 फरवरी 2021 (रेई)- दिव्य उपासना एवं संस्कारों के अनुष्ठान को व्यवस्थित करने हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ ने संत पापा फ्रांसिस द्वारा अनुमोदित दो आज्ञप्तियों को मंगलवार को जारी किया।  

रोमन कैंलेंडर में 29 जुलाई को संत मार्था, मरिया और लाजरूस की स्मृति के रूप मनाया जाएगा।

येसु के तिहरे साक्षी

आज्ञप्ति में कहा गया है कि संत पापा फ्रांसिस ने महत्वपूर्ण सुसमाचारी साक्ष्य पर आधारित इस धर्मविधिक यादगारी को जोड़ने का निश्चय लिया है जिसमें उन्होंने प्रभु येसु को अपने घर में स्वागत किया था, ध्यान पूर्वक उन्हें सुना था एवं विश्वास किया था कि वे पुनरूत्थान एवं जीवन हैं।

कहा गया है कि "बेथनी के घर में प्रभु येसु ने पारिवारिक भावना और मार्था, मरियम एवं लाजरूस की मित्रता को महसूस किया। यही कारण है कि योहन रचित सुसमाचार जोर देता है कि वे उन्हें प्यार करते थे। मार्था ने बड़ी उदारता से उनका अतिथि सत्कार किया, मरियम ध्यान से उनकी बात सुनी और लाजरूस अपमान जनक मौत के बाद येसु के आदेश पर तुरन्त कब्र से बाहर निकला।"

मरियम की पहचान

आज्ञप्ति मरियम की पहचान पर लातीनी कलीसिया में परम्परा अनिश्चितता की ओर भी ध्यान देता है।  

आज्ञप्ति में कहा गया है कि हाल के अध्ययन में मरियम को मार्था और लाजरूस की बहन के रूप में पहचाना गया है।

कलीसिया के धर्माचार्य

एक दूसरी आज्ञप्ति में, संत पापा फ्रांसिस ने कलीसिया के तीन धर्माचार्यों को भी रोमन कैलेंडर में जोड़ा है।  

- नारेक के संत ग्रेगोरी, मठाधीश एवं कलीसिया के धर्माचार्य, 27 फरवरी।

- अविला के संत जॉन, पुरोहित एवं कलीसिया के धर्माचार्य, 10 मई।

- बिनजेन के संत हिल्डगार्ड, कुँवारी एवं कलीसिया की धर्माचार्य, 17 सितम्बर।  

पवित्रता एवं प्रज्ञा

आज्ञप्ति में कहा गया है कि "येसु ख्रीस्त के रहस्य के अनुभव के साथ, प्रज्ञा एवं पवित्रता का संबंध, कलीसिया के रहस्य के साथ घनिष्टता से जुड़ा है।"  

पवित्रता एवं प्रज्ञा का यह संबंध खास रूप से उन लोगों में प्रकट होता है जिन्हें "कलीसिया के धर्माचार्य" (डॉक्टर) की पदवी दी गई है।  

आज्ञप्ति में कहा गया है कि ये तीन संतों को रोमन कैलेंडर में जोड़ा गया है क्योंकि तीनों ने कलीसिया को अपना विशिष्ठ योगदान दिया है।

"प्रज्ञा जिसको इन पुरूषों और महिलाओं ने प्रकट किया है वह केवल उनका नहीं है। दिव्य प्रज्ञा के शिष्य होने के द्वारा वे खुद पूरी कलीसियाई समुदाय के लिए प्रज्ञा के गुरू बन गये।"

02 February 2021, 16:32