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राखबुध मिस्सा में संत पापा फ्रांसिस राखबुध मिस्सा में संत पापा फ्रांसिस   (ANSA)

संत पापा का चालीसा संदेश 2021

संत पापा फ्रांसिस ने 2021 के अपने चालीसा संदेश में ख्रीस्त विश्वासियों को विश्वास, आशा और प्रेम को नवीकृत करने का आहृवान किया है।

दिलीप संजय  एक्का-वाटिकन सिटी

येसु ख्रीस्त ने अपने चेलों को अपने दुःखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान के गूढ़ रहस्य के अर्थ से रुबरू कराया। इस भांति उन्होंने अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए अपने शिष्यों को अपने कार्यों में हाथ बंटाने हेतु निमंत्रण दिया, जिससे वे दुनिया की मुक्ति हेतु अपनी प्रेरिताई कर सकें।

पास्का की ओर चालीसा की हमारी यात्रा में हम उन्हें याद करें, “जिन्होंने अपने को मरण तक हाँ, क्रूस के मरण तक आज्ञाकारी बना लिया” (फिलि.2.8)। चालीसा के इस आत्मपरिवर्तन समय में हम अपने विश्वास को नकीकृत करते हुए “जीवन जल” से अपनी आशा को सिंचित कर, खुले हृदय से ईश्वर के प्रेम को स्वीकार करें, जहाँ हम एक दूसरें के लिए भाई-बहनें बनाते हैं। पास्का के जागरण में हम अपने बपतिस्मा की प्रतिज्ञाओं को नवीकृत करते हैं जो हमें पवित्र आत्मा में नयेपन का अनुभव लाता है।

चालीसा की यह यात्रा हम ख्रीस्तियों के लिए तीर्थयात्रा की भांति है जो हमें पुनर्जीवित प्रभु की ज्योति से आलोकित करता है, हमारे सोच-विचारों को प्रभावित करता जिसके अनुरूप हम येसु ख्रीस्त का अनुसरण करने के योग्य बनते हैं। येसु ख्रीस्त अपनी शिक्षा में उपवास, प्रार्थना और दान देने (मत्ती 6. 1-18) की बात कहते हैं जो हममें परिवर्तन को अभिव्यक्त करता है। उपावस हमारे लिए निर्धनता और आत्मत्याग का मार्ग है, गरीबों की चिंता और प्रेमपूर्ण उनकी सेवा हमारे लिए दान पुण्य के कार्य हैं तो वहीं बाल्य मनोभाव से ईश्वर संग वार्ता करना प्रार्थना का प्रतिरूप है जो हमें विश्वास को निष्ठा में, आशा को जीवटता और प्रेम को प्रभावकारी ढ़ग से जीने में मदद करता है।

विश्वास

1.विश्वास हमें सच्चाई को स्वीकार करने और ईश्वर तथा अपने भाई-बहनों के बीच साक्ष्य देने की मांग करता है। इस चालीसा काल में, सच्चाई जो हमारे लिए येसु ख्रीस्त मे प्रकट की गई है, सर्वप्रथम हमारे हृदय को ईश वचन हेतु खोलना है, जिसे कलीसिया पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित करती आ रही है। यह कोई अमूर्त विचार नहीं जो कुछेक विद्वानों के लिए हो। बल्कि, यह एक संदेश है जिसे हम सभी अपने में प्राप्त करते हुए समझ सकते हैं, जिसके लिए हम पूरे हृदय से ईश्वरीय महानता हेतु अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं जो हमारी चेतना के पहले से ही हमें प्रेम करते हैं। येसु ख्रीस्त स्वयं यह सत्य हैं। हमारी मानवता को अपने में धारण करते हुए उन्होंने अपने को हमारी तरह बना लिया जिससे वे हमें सम्पूर्ण जीवन की ओर ले सकें।  

उपवास, परित्याग करने के संबंध में, उनकी सहायता करता है जो इसे हृदय से लेते हुए ईश्वर के उपहार को पहचानने की कोशिश करते हैं कि हम उनके रुप में बनाये गये हैं जो हमें उनमें पूर्णतः की प्राप्ति हेतु मदद करता है। दरिद्रता की अनुभूति का आलिंगन करते हुए जो उपवास करते हैं वे अपने को गरीबों के साथ एक करते हुए ईश्वर के प्रेममय उपहार को ग्रहण करते और उसे दूसरों के साथ साझा करते हैं। इस भांति उपवास हमें ईश्वर और अपने पड़ोसियों को प्रेम करने में मदद करता है। संत थोमस अक्वीनस इसके बारे में कहते हैं कि प्रेम हमें दूसरों की ओर अपने जीवन को क्रेन्दित करने हेतु मदद करता और हम अपने उन्हें जीवन का अंग समझते हैं (फ्रातेल्ली तूत्ती, 93)।

चालीसा काल विश्वास करने का समय है जहाँ हम ईश्वर को अपने जीवन में स्वागत करते और उन्हें अपने जीवन में निवास स्थान तैयार करने को कहते हैं (यो.14.23)। उपवास हमें उन चीजों से मुक्त कराता है जो हमारे जीवन को बोझिल बनाते है जैसे कि भौतिकतावाद या अत्याधिक सूचना, चाहे वे सही या गलत हों- इस तरह हम अपने हृदय द्वार को उनके लिए खोलते हैं जो सभी चीजें में गरीब बन, ईश्वर के पुत्र मुक्तिदाता, “कृपाओं और सच्चाई से पूर्ण” (यो.1.14) हमारे लिए आये।

आशा

2. आशा “जीवन पानी” की तरह हमारे जीवन को आगे बढ़ाने में मदद करती है। समारी नारी, कुएं के पास जिससे येसु पानी की मांग करते हैं, नहीं समझती है कि वे उससे क्या कहना चाहते हैं, मैं तुम्हें “जीवन पानी” प्रदान करूंगा (यो.4.10)। निसंदेह वह भौतिक जल के बारे में सोचती है लेकिन येसु उससे पवित्र आत्मा के बारे में कह रहे होते हैं जिसे वे पास्का रहस्य में प्रदान करते हैं जो आशा के रुप में हमें कभी हताश नहीं करता है। येसु ख्रीस्त ने इस आशा के बारे में पहले ही कहा, जब उन्होंने अपने दुःखभोग और मृत्यु की चर्चा की, मैं तीसरे दिन पुनर्जीवित होऊंगा (मत्ती.20.19)। येसु भविष्य के बारे में कहते हैं जो पिता की करूणा में हमारे लिए खुला है, उनमें आशा करने का अर्थ यही है कि इतिहास गलतियों, हिंसा और अन्याय के कारण या पापों के कारण जो प्रेम को सूली पर चढ़ा दिया, खत्म नहीं होता है। इसका अर्थ खुले हृदय से पिता की क्षमाशीलता को ग्रहण करना है।

कठिनाई के इस समय में, जब सभी चीजें अपने में क्षणभंगुर औऱ अनिश्चित लगती है, आशा के बारे में चर्चा करना चुनौती भरा लगता है। फिर भी चालीसा हमारे लिए खास कर आशा की अवधि है जहाँ ईश्वर धैर्य में अपनी सृष्टि की देख-रेख करते हैं जिसे हमने बहुत बार दोहन किया है (लौदातो सी 32-33, 43-44)। संत पौलुस हमें मेल-मिलाप पर अपनी आशा बनाये रखने को कहते हैं “आप ईश्वर से मेल-मिलाप कर लें” (2 कुरू.5.20)। संस्कार में अपने पापों की क्षमा प्राप्ति के द्वारा, जो हमारे हृदय में परिवर्तन लाता है हम दूसरों को क्षमा करने के योग्य बनाते हैं। क्षमा प्राप्ति के द्वारा हम स्वेच्छा से दूसरे के संग वार्ता में प्रवेश करते और दुःख तथा पीड़ा की स्थिति में पड़े लोगों को सांत्वना प्रदान करते हैं। ईश्वर की क्षमा द्वारा हम अपने वचनों औऱ कार्यो में भ्रातृत्व के पास्का का अनुभव करते हैं।

चालीसा के समय में हम सांत्वना, साहस, प्रोत्साहन औऱ धैर्य जैसे शब्दों पर अधिक ध्यान दें न की दुःख, क्रोध या किसी को नीचा दिखलाने वाले शब्दों पर (फ्रातेल्ली तूत्ती, 223)। दूसरों में आशा उत्पन्न करना हमें सिर्फ दूसरों पर दया दिखाने की मांग करता है जहाँ हम अन्य बातों को अपने से दूर करने की चाह रखते औऱ दूसरों पर रूचि रखते, उन्हें मुस्कान की दृष्टि से देखते, प्रोत्साहन के शब्द कहते और उदासीनता के बदले उनकी बातों को सुनते हैं (224)।

मेल-मिलाप और शांतिमय प्रार्थना के द्वारा आशा हमारे अतःकरण में ज्योति की भांति प्रदीप्त होती जो प्रेरिताई कार्य की चुनौतियों का सामना करने में हमारी मदद करती है।   

अतः एकांत में ईश्वर से प्रेमपूर्ण मिलन हेतु हमें प्रार्थना करने की जरुरत है (मत्ती.6.6)। चालीसा के समय आशा के अनुभव में बढ़ाना हमें येसु ख्रीस्त में इस बात को अनुभव करने की मांग करता है कि हम सभी नवीनता के साक्ष्य हेतु बुलाये गये हैं जहाँ “ईश्वर सभी चीजों को नया बना देते हैं” (प्रका.21.1-6)। इसका अर्थ ख्रीस्त में आशा को ग्रहण करना है जो अपने क्रूस मरण और तीसरे दिन ईश्वर द्वारा पुनर्जीवित किये गये जो हमें विनम्रता में दूसरों का उत्तर देने हेतु सदा तैयार रखता है जो हम से प्रश्न करते हैं (1पेत्रु.3.15)।

प्रेम

3. प्रेम, करूणा और सेवा में येसु के कदमों का अनुसरण करना, अपने में विश्वास और भरोसे से बड़ी अभिव्यक्ति है। प्रेम दूसरों के विकास को देखकर आनंदित होता है। अतः यह अपने में दुखित होता है जब वह दूसरों को तकलीफ, अकेलेपन, बीमार, आश्रयविहीन, परित्यक्त या जरुरत की स्थिति में देखता है। प्रेम हृदय से प्रवाहित होता है जो हमें अपने आप से बाहर ले जाता और हमें एकता और सामुदायिकता के निर्माण में मदद करता है।

“सामाजिक प्रेम” हमें प्रेम की सभ्यता में आगे बढ़ने को मदद करता है जिसके लिए हम सबों का बुलावा हुआ है। इसका स्वभाव वैश्विकता है जो हमें एक नई दुनिया तैयार करने के योग्य बनाता है। यह एक भावना मात्र नहीं, बल्कि यह एक साधन है जो सभों के विकास हेतु प्रभावकारी मार्गों की खोज करता है (फ्रातेल्ली तूत्ती,183)।  

प्रेम एक उपहार है जो हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करता है। यह हमें जरुरमंदों को अपने परिवार के सदस्यों, भाई-बहनों, मित्रों की तरह देखने में मदद करता है। छोटी-सी चीज भी जिसे हम प्रेम से दूसरों को देते अपने में खत्म नहीं होती बल्कि जीवन और आनंद का एक स्रोत बन जाती है। इसे हम सरेप्ता के विधवा के दृष्टांत में देखते हैं जो नबी एलियस को रोटी प्रदान करती है(1 राजा. 17. 7-16)। यह हमें रोटी के दृष्टांत की ओऱ भी इंगित कराता है जो तोड़ा गया और येसु के द्वारा शिष्यों को, लोगों के बीच बांटने हेतु दिया गया (मर.6.30-44)। हम इस तथ्य को दान देने के संबंध में भी पाते हैं।

प्रेम में चालीसा का अनुभव करने का अर्थ हमारे लिए उनकी चिंता करना है जो दुःख या परित्यक्त स्थिति में हैं जो कोविड-19 के कारण अपने को भयभीत पाते हैं। अनिश्चित भविष्य के इस परिस्थिति में हम येसु के वचनों की याद करें जो अपने सेवक से कहते हैं, “डरो मत, मैंने तुम्हें मुक्त किया है” (इसा.43.1)। अपनी करूणा में हम दूसरों के लिए ईश्वर के प्रेम वचन को घोषित करें और उन्हें ईश पुत्र-पुत्रियाँ होने की अनुभूति प्रदान करें। “करूणा की निगाहें हमें दूसरों के सम्मान को पहचान प्रदान करने में मदद करती है जिसके परिणाम स्वरुप हम गरीबों को मानव सम्मान प्रदान करते, उनकी पहचान और संस्कृति को स्वीकार करते और उन्हें समाज का अंग बनाते हैं (फ्रातेल्ली तूत्ती, 187)।

संत पापा ने कहा कि हमारे जीवन का हर क्षण विश्वास, आशा और प्रेम का समय है। चालीसा की यात्रा हाँ, हमें अपने में परिवर्तन लाने, प्रार्थना करने और अपनी वस्तुओं को दूसरों से साझा करने का निमंत्रण देता है। यब हमें समुदाय और व्यक्तिगत रुप में अपने विश्वास को नवीकृत करने में मदद करता है जो येसु ख्रीस्त की ओर से आता है। आशा पवित्र आत्मा के द्वारा सांस के रुप में हम पर फूंका जाता है औऱ प्रेम हमारे लिए पिता के हृदय से प्रवाहित होता है। 

17 February 2021, 16:41