जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 12 फरवरी 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने चालीसाकाल के लिये प्रकाशित अपने सन्देश में कहा है कि चालीसाकाल विश्वास, आशा और प्रेम का उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा कि अपनी चालीसाकालीन तीर्थयात्रा के दौरान हम प्रभु येसु मसीह का स्मरण करें जिन्होंने क्रूस मरण तक आज्ञाकारी बनकर अपने आप को दीन बना लिया।
प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग एवं क्रूसमरण की याद में विश्व के ख्रीस्तीय धर्मानुयायी प्रतिवर्ष चालीस दिन तक प्रार्थना, उपवास एवं परहेज़ द्वारा मनपरिवर्तन के लिये आमंत्रित किये जाते हैं। इस वर्ष चालीसाकाल 17 फरवरी से 03 अप्रैल तक जारी रहेगा।
चालीसाकालीन तीर्थयात्रा
चालीसाकाल के उपलक्ष्य में शुक्रवार को प्रकाशित अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि सम्पूर्ण ख्रीस्तीय जीवन की तीर्थयात्रा के सदृश ही चालीसाकालीन तीर्थयात्रा प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनःरुत्थान के प्रकाश से रोशन होकर मसीह के समस्त अनुयायियों के विचारों, दृष्टिकोणों एवं निर्णयों को प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि प्रभु येसु द्वारा प्रचारित उपवास, प्रार्थना एवं दान-पुण्य हमारे मनपरिवर्तन को सम्भव बनाते हैं। अकिंचनता एवं आत्म-त्याग तथा निर्धनों के प्रति उत्कंठा एवं प्रेमपूर्ण देखभाल, और साथ ही, प्रार्थना में पिता ईश्वर के साथ संवाद, विश्वास, जीवन्त आशा एवं प्रभावी दान-पुण्य के जीवन को संभव बनाता है।
सत्य अमूर्त अवधारणा नहीं
सन्त पापा ने लिखा, विश्वास सत्य को स्वीकार करने तथा ईश्वर एवं हमारे भाई बहनों के समक्ष सत्य का साक्ष्य देने में हमारी मदद करता है। इस चालीसाकाल के समय हम कलीसिया द्वारा सदियों के अन्तराल में प्रसारित ईश्वर के वचन का पाठ करें तथा उसपर मनन-चिन्तन करें।
उन्होंने कहा, "यह याद रखें कि सत्य कोई अमूर्त अवधारणा नहीं है, यह केवल कुछेक बुद्धिमानों के लिये आरक्षित नहीं है, अपितु यह वह सन्देश है जिसे वे सब प्राप्त कर सकते हैं जो अपने मन के द्वारों को ईश्वर के शब्द के लिये खुला रखते हैं।" येसु ख्रीस्त स्वयं सत्य हैं, येसु ख्रीस्त ही हैं जो हमें जीवन की परिपूर्णता तक ले जाते हैं, उन्हीं में हम अपने विश्वास की अभिव्यक्ति करें।
ज़रूरतमन्दों की मदद करें
चालीसाकल के दौरान अपने कम नसीब भाई बहनों की मदद की गुहार लगाते हुए सन्त पापा फ्रांसिस ने लिखा, प्रभु येसु ख्रीस्त द्वारा दर्शाये गये प्रेम, दया और पड़ोसी के प्रति उत्कंठा का स्मरण करते हुए पीड़ितों, अकेले जीवन यापन करनेवालों, बीमारों, बेघर एवं समाज से तिरस्कृत तथा ज़रूरतमन्दों का हम विशेष ध्यान रखें।
उन्होंने कहा, "प्रेम दिल की एक छलांग है; प्यार दिल की एक छलांग है; यह हमें अपने आप से बाहर निकलने तथा अन्यों के साथ प्रेम को बाँटने में सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा, "यह हमें अपने आप से बाहर लाता है और साझाकरण और भोज का बंधन बनाता है। सामाजिक प्रेम 'प्यार की सभ्यता की ओर अग्रसर होना संभव बनाता है, जिसे महसूस करने के लिये हम सब आमंत्रित हैं।"
