उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 28 जनवरी 21 (रेई)- संत पापा ने 28 जनवरी के ट्वीट संदेश में लिखा, "पवित्र धर्मग्रंथ के शब्दों को इसलिए नहीं लिखा गया था कि यह पेपिरस, चर्मपत्र या कागज पर बंद रहे बल्कि उस व्यक्ति के द्वारा ग्रहण किये जाने के लिए जो प्रार्थना करता, अपने हृदय में प्रस्फूटित होने देता है।"
