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सन्त पापा फ्राँसिस वाटिकन स्थित प्रेैरितिक प्रासाद की लाईब्रेरी में सन्त पापा फ्राँसिस वाटिकन स्थित प्रेैरितिक प्रासाद की लाईब्रेरी में  (ANSA)

विश्वास सबके प्रति उदारता की मांग करता है, सन्त पापा फ्राँसिस

विश्व मिशन दिवस 2021 के लिये प्रकाशित अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस लिखते हैं कि विश्वासमय जीवन सर्वत्र प्रत्येक के आलिंगन और स्वागत का आह्वान करता है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 29 जनवरी 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): विश्व मिशन दिवस 2021 के लिये प्रकाशित अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस लिखते हैं कि विश्वासमय जीवन सर्वत्र प्रत्येक के आलिंगन और स्वागत का आह्वान करता है।   

अनुभव को अन्यों में बाँटें

शुक्रवार को वाटिकन प्रेस कार्यालय ने सन्त पापा फ्राँसिस के विश्व मिशन दिवस 2021 के सन्देश का प्रकाशन किया, जिसका शीर्षक है, बाईबिल धर्मग्रन्थ के प्रेरित चरित ग्रन्थ के ये शब्दः "हमने जो देखा और सुना है, उसके विषय में नहीं बोलना हमारे लिये सम्भव नहीं"। सन्त पापा का कहना है कि प्रेरितों द्वारा उच्चरित यह वाक्य हममें से प्रत्येक का आह्वान करता है कि हम जो अपने हृदय संजोये हुए हैं उसे अन्यों के साथ बाँटें। उन्होंने कहा कि "मिशन" हमेशा से कलीसिया की पहचान एवं उसकी अस्मिता रहा है, इसलिये कि "प्रचार ही उसका अस्तित्व है"।

छोटे समूहों में स्वतः को बन्द न करें

सन्त पापा ने सचेत किया कि जब हम अलग-थलग हो जाते हैं और छोटे समूहों में बन्द हो जाते हैं तब विश्वास का हमारा जीवन कमज़ोर पड़ जाता है, अपनी नबूवती शक्ति खो देता है और हम   विस्मय और कृतज्ञता को जगाने की क्षमता खो देते हैं। उन्होंने कहा कि स्वाभाव से ही विश्वास का जीवन हर जगह, हर किसी के आलिंगन और प्रत्येक के प्रति उदारता को बढ़ाने का आह्वान करता है।

आरम्भिक ख्रीस्तीयों की उदारता

सन्त पापा फ्राँसिस ने स्मरण दिलाया कि ख्रीस्त के प्रथम अनुयायी एक संभ्रांत समूह बनने के प्रलोभन से बहुत दूर थे, वे प्रभु येसु एवं उनके द्वारा दर्शाये गये नवजीवन से प्रेरित होकर सभी राष्ट्रों में ख्रीस्तीय सुसमाचार के साक्षी बनने को तत्पर थे। सन्त पापा ने कहा कि आरम्भिक ख्रीस्तीयों ने ऐसा उदारता, कृतज्ञता और बड़प्पन के कारण किया।

सन्त पापा ने कहा कि ख्रीस्त के सन्देशवाहक बनने के लिये दृढ़ विश्वास की ज़रूरत है, इसके लिये विनम्रता की ज़रूरत है, इसलिये कि "जो सबसे अधिक कमज़ोर, सीमित और परेशान हैं,  वे भी अपने तरीके से मिशनरी हो सकते हैं, क्योंकि भलाई को हमेशा साझा किया जा सकता, भले ही वह कई सीमाओं के साथ मौजूद हो।"

काथलिक कलीसिया द्वारा घोषित विश्व मिशनरी दिवस प्रति वर्ष अक्टूबर माह के तीसरे रविवार को मनाया जाता है।

29 January 2021, 11:47