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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस 

आमदर्शन समारोह : हम ईश्वर की स्तुति हमेशा कर सकते हैं

बुधवरीय आमदर्शन समारोह के दौरान प्रार्थना पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए संत पापा फ्रांसिस ने “स्तुति की प्रार्थना” पर चिंतन किया जो हर परिस्थिति में संभव है क्योंकि ईश्वर हमेशा विश्वस्त हैं।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 13 जनवरी 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन प्रेरितिक निवास की पुस्तकालय से सभी का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

हम प्रार्थना पर अपनी धर्मशिक्षा माला को जारी रखते हुए स्तुति के आयाम पर आज चिंतन करेंगे। हम इसकी शुरूआत येसु ख्रीस्त के जीवन के एक महत्वपूर्ण क्षण से करेंगे। अपने प्रथम चमत्कार के बाद येसु अपने चेलों के संग ईश्वर के राज्य की घोषणा करते हैं जहाँ मुक्तिदाता का प्रेरितिक कार्य एक विकट दौर से हो कर गुजरता है। यह संदेश योहन बपतिस्ता की ओर से आता है जो बंदीगृह हैं, “क्या आप वही हैं जो आनेवाले थे या हम किसी और की प्रतिक्षा करेंॽ” (मत्ती. 11.3) क्योंकि वह अपने में इस बात का संदेह करता है कहीं उसने इस घोषणा में कोई गलती तो नहीं की है। जीवन में हमेशा अंधेरे क्षण होते हैं, आध्यात्मिक रात के क्षण और योहन इस क्षण से गुजर रहा होता है। येसु ने झील के किनारे जिन गांवों में चमत्कार किये थे वहाँ विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी (मत्ती. 11. 20-24)। इस निराश की स्थिति में मत्ती एक अश्चर्यजनक सत्य को व्यक्त करते जो ईश्वर पिता की स्तुति के गीत हैं, “पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु मैं तेरी स्तुति करता हूँ क्योंकि तूने इन सब बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा कर निरे बच्चों के लिए प्रकट किया है” (मत्ती.11.25)। विवाद की स्थिति में, जहाँ बहुत से लोगों और स्वयं योहन बपतिस्ता अंधकार के क्षणों में होते, येसु अपने पिता की स्तुति करते हैं, क्योंॽ  

ईश्वर की स्तुति

सर्वप्रथम पिता जो हैं उसके लिए येसु उनकी स्तुति करते हैं, “पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु”। येसु अपने में इस बात की खुशी का इजहार करते हैं क्योंकि वे जानते और अनुभव करते हैं कि उनके पिता विश्वमंडल के ईश्वर हैं, साथ ही उस सारी चीजों के पिता जो दुनिया में व्याप्त हैं, वे उनके पिता हैं। उनकी स्तुति इस अनुभूति से उत्पत्ति होती है कि वे स्वर्गीय सर्वशक्तिमान ईश्वर के पुत्र हैं।

संत पापा ने कहा कि इसके बाद वे अपने पिता कि स्तुति करते हैं क्योंकि उन्होंने निम्न लोगों पर अपनी कृपादृष्टि की है। इस बात का अनुभव उन्होंने स्वयं अपने प्रेरितिक कार्यों के दौरान कस्बों में किया। “ज्ञानी” और “समझदारों” ने उनपर संदेह किया, वे हिसाब-किताब करते हुए अपने में बंद रहे जबकि छोटे लोगों ने अपने को खुला रखते हुए उनके संदेश को ग्रहण किया। यह पिता की योजना रही और इस ईश्वरीय योजना पर येसु अपनी खुशी प्रकट करते हैं। हम भी अपने में आनंदित होते हुए ईश्वर की स्तुति करे क्योंकि नम्र और दीन व्यक्तियों की भांति हम सुसमाचार को ग्रहण करते हैं। संत पापा ने उन नम्र और दीन लोगों के प्रति अपनी खुशी प्रकट की जो अपने जीवन में बहुत सारी कमियों के बावजूद तीर्थ करते, जो प्रार्थना करने जाते, भजन गाते और ईश्वर की स्तुति करते हैं, नम्रता उन्हें ईश्वर की स्तुति करने हेतु प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि विश्व के भविष्य में और कलीसिया की आशा में हम सदैव निम्न लोगों को पाते हैं जो अपने को दूसरों से बेहतर नहीं समझते, जो अपने जीवन की त्रुटियों और पापों से अवगत हैं, जो अपने जीवन को दूसरों पर थोपना नहीं चाहते हैं, वे इस बात को समझते हैं कि ईश्वर पिता में हम सभी एक दूसरे के लिए भाई-बहनें हैं।

हर समय ईश्वर की स्तुति

अतः असफलता की इस परिस्थिति, अंधेरी स्थिति में येसु प्रार्थना करते हुए अपने पिता की स्तुति करते हैं। उनकी प्रार्थना हमें भी अपने में सम्माहित करती है क्योंकि हम भी अपने जीवन की मुसीबतों में जिन्हें हम रोक पाने में असमर्थ होते, ईश्वर की उपस्थिति को स्पष्ट रुप में देखने और अनुभव करने में असफल होते हैं। हमारे जीवन की ऐसी परिस्थिति में येसु हमें सवाल-जवाब करने को निर्देंशित करते, वे स्वयं अपने पिता से तर्क-वितर्क कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बदले उनकी प्रंशसा और स्तुति करते हैं। यह एक विरोधाभास की तरह लगता है, लेकिन यह सच है।

संत पापा ने कहा कि किसी की महिमा करना जरुरी हैॽ अपनी या ईश्वर की। उन्होंने यूखारिस्तीय धर्मविधि की प्रार्थना को उद्धृत करते हुए कहा जो कहती है, “यद्यपि तुझे हमारी प्रशंसा की कोई जरुरत नहीं, परंतु हमारी कृतज्ञता हमारे लिए तेरा ही उपहार है क्योंकि हमारी प्रशंसा तेरी महानता की वृद्धि नहीं करते, वरन् हमारी मुक्ति में सहायक होते हैं” (रोमन मिसल,IV)। ईश्वरीय महिमागान करते हुए अपनी मुक्ति प्राप्त करते हैं।

प्रशंसा की प्रार्थना हमारे लिए सहायक

प्रशंसा की प्रार्थना हमारे लिए सहायक है। काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा इसे परिभाषित करते हुए कहती है, “यह शुद्ध हृदय की खुशी को विश्वास में ईश्वर के संग साझा करना है जो उनकी महिमा के पूर्व प्रेम में अभिव्यक्त होता है” (2639)। हम इसे अपने जीवन के खुशी भरे क्षणों में केवल व्यक्त न करें बल्कि अपने जीवन की कठिनाइयों में भी जब हमारे जीवन के मार्ग तीक्ष्ण हो जाते हैं। हम अपने जीवन के चिंतामय मार्ग, मांग भरी राहों में जीवन की नई क्षितिज को पाते हैं। प्रंशसा करना स्वच्छ सांस लेने के समान है जो हमारे हृदय को परिशुद्ध करता है, जिसके फलस्वरुप हम अपनी कठिन परिस्थिति, अंधकार में बने नहीं रहते।

अस्सीसी के संत फ्राँसिस का जीवन

आस्सीसी के संत फ्रांसिस अपने जीवन के अंत में, अपनी प्रार्थना “सूर्य भाई के भजन” में हमें एक बड़ी शिक्षा देते हैं। उन्होंने इसकी रचना खुशी और अपने अच्छे क्षणों में नहीं अपितु जीवन की कठिन परिस्थिति में की। वे अपने जीवन की उस घड़ी में एक तरह से अंधे हो गये थे, उन्होंने अपने हृदय में अकेलेपन का अनुभव किया जिसे उन्होंने कभी नहीं किया था। उनके उपदेशों के कारण दुनिया में परिवर्तन नहीं हुआ था बहुत से लोग थे जो लड़ाई-झगड़े के कारण अपने में टूटे थे, उससे भी बढ़कर वे मृत्युशय्या में पड़े हुए थे। यह परिस्थिति भ्रमक और खुद की विफलता का क्षण हो सकता था। लेकिन संत फ्रांसिस अपने दुःख की घड़ी, अंधेरे क्षणों में इस तरह प्रार्थना की, “हे प्रभु, सारी चीजों में तेरी स्तुति हो”। उन्होंने सभी चीजों के लिए, सारी सृष्टि के लिए ईश्वर की प्रशंसा की यहाँ तक की अपनी मृत्यु के लिए भी, जिसे उन्होंने साहस करके अपनी “बहन” कहा।

ईश्वर एक विश्वासी मित्र  

संतगण हमें दिखलाते हैं कि हम हमेशा स्तुति कर सकते हैं, अच्छे और बुरे दोनों ही समय में क्योंकि ईश्वर विश्वासी मित्र हैं। स्तुति की गहराई यही है ˸ ईश्वर निष्ठावान मित्र हैं और उनका प्रेम कभी कम नहीं होता है। वे सदा हमारी बगल में हैं, वे हमेशा हमारी प्रतीक्षा करते हैं। किसी ने कहा हैः "वे एक पहरेदार हैं जो आपके करीब हैं और आपको सुरक्षित आगे जाने देते हैं।" मुश्किल एवं अंधकारपूर्ण समय में हम यह कहने का साहस कर सकें ˸ "धन्य है तू हे प्रभु।" ईश्वर की स्तुति करना हमारे लिए अति उत्तम है।  

13 January 2021, 13:43