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 संत पेत्रुस महागिरजाघर में ईश्वर की माता मरियम के महोत्सव का पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता करते हुए कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन संत पेत्रुस महागिरजाघर में ईश्वर की माता मरियम के महोत्सव का पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता करते हुए कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन   (ANSA)

मरियम वह मार्ग है जो हमें येसु तक पहुंचाती है, संत पापा फ्राँसिस

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पिएत्रो पेरोलिन द्वारा पढ़े गए संत पापा द्वारा तैयार प्रवचन में संत पापा फ्राँसिस तीन शब्दों पर विचार करते हैं जो मरिया, ईश्वर की माँ में परिपूर्णता पाती हैः आशीर्वाद देना, जन्म लेना और पाना।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 1 जनवरी 2021 (रेई) : नव वर्ष के दिन संत पेत्रुस महागिरजाघर में ईश्वर की माता मरियम के महोत्सव का पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता वाटिकन सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन ने की। उन्होंने इस अवसर के लिए संत पापा फ्राँसिस द्वारा तैयार किये गये प्रवचन को प्रस्तुत किया।

संत पापा फ्राँसिस शियाटिका दर्द के कारण परम्परा के अनुसार वर्ष के शुरु में संत पेत्रुस महागिरजाघर में ईश्वर की माता मरियम के महोत्सव के पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान करने में असमर्थ रहे।

आज के पाठों के आधार पर संत पापा ने अपने प्रवचन के लिए तीन क्रियाओं का चयन किया जो ईश्वर की माता की परिपूर्णता को दर्शाती हैः आशीर्वाद देना, जन्म लेना और पाना।

आशीर्वाद देना

गणना ग्रंथ में ईश्वर अपने पुरोहितों से अपने लोगों को आशीर्वाद देने के लिए कहते हैं।तुम इस्राएलियों को आशीर्वाद देते समय यह कहोः प्रभु तुम लोगों को आशीर्वाद प्रदान करे और सुरक्षित रखे।(6:23-24) यह कोई पवित्र उपदेश नहीं है, यह एक विशिष्ट अनुरोध है और यह महत्वपूर्ण है कि आज भी, पुरोहित लगातार ईश्वर के लोगों को आशीर्वाद देते हैं और वे ईश्वर के आशीर्वाद के माध्यम हैं। वे आशीर्वाद देते हैं। ईश्वर ने दुनिया की सृष्टि की और उसे सबकुछ अच्छा लगा। ईश्वर के लिए हम सभी बहुत अच्छे हैं। ईश्वर ने हमें न केवल अपने शब्दों से आशीर्वाद दिया,बल्कि अपने पुत्र को, जो स्वयं आशीर्वाद हैं हमारे बीच में भेजा। संत पौलुस हमें बताते हैं, ʺपिता ईश्वर ने अपने पुत्र मसीह द्वारा हम लोगों को स्वर्ग के हर प्रकार के आध्यात्मिक वरदान प्रदान किये हैं।ʺ (एफे. 1: 3)। जब भी हम येसु के सामने अपना दिल खोलते हैं, ईश्वर का आशीर्वाद हमारे जीवन में प्रवेश करता है।

संत पापा ने कहा कि आज हम ईश्वर की माता का महोत्सव मना रहे हैं जिन्हें ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त था। मरियम ईश्वर का आशीर्वाद येसु को इस दुनिया में हमारे बीच ले आती हैं। अतः हमें एलिजबेद की तरह होना चाहिए जिसने प्रभु की कृपा को पहचान कर तुरंत यह कहते हुए प्रशंसा की, “नारियों में आप धन्य हैं और धन्य है आपके गर्भ का फल!” (लूक 1:42).  माता मरियम ने जो आशीर्वाद पाया था उसे सिर्फ अपने लिए नहीं रखा, परंतु एलिजबेद को, काना के विवाह भोज में, अंतिम व्यारी के कमरो में येसु के चेलों के बीच बांटा। हमें भी ईश्वर के आशीर्वाद को लोगों तक खुशी से पहुँचाना है।

जन्म लेना

दूसरी क्रिया हैः जन्म लेना। संत पौलुस हमें बताते हैं कि “ईश्वर ने अपने पुत्र को भेजा वे एक नारी से उत्पन्न हुए।” (गलाति 4:4). ईश्वर का बेटा हमारी ही तरह नौ महीने माता के गर्भ में रहकर जन्म लिया। ईश्वर का बेटा मासुम बच्चे के रुप इस दुनिया में हमारे बीच आया। असीसी के संत फ्राँसिस करते हैं कि माता मरियम न केवल प्रभु को इस दुनिया में लाने हेतु मध्यस्त बनी लेकिन वे वह मार्ग है जिसे ईश्वर ने हम तक पहुँचने के लिए यात्रा की थी और वह सड़क जिसे हमें उस तक पहुँचने के लिए यात्रा करनी चाहिए। मरियम के माध्यम से, हम ईश्वर से उसी तरह से मुलाकात करते हैं जैसे वे हमसे चाहते है: कोमल प्रेम में, अंतरंगता में और शरीर में।

आज का सुसमाचार हमें बताता है कि मरियम ने "इन सभी बातों को अपने दिल में रखा" (सीएफ लूकस 2:19)। दिल से अच्छाई आती है। हमारे दिलों को शुद्ध रखने के लिए, हमारी आंतरिक ज़िंदगी और हमारी प्रार्थना पर ध्यान देना कितना ज़रूरी है! हमारे दिलों को शिक्षित करने के लिए, अपने आसपास के व्यक्तियों और दुनिया और सृष्टि की चीजों को संजोना कितना महत्वपूर्ण है। हमारे पास कई लोग और सृष्टि की बहुत सारी अच्छी चींजें रहने का क्या फायदा यदि हम उसे संजोने और दूसरों के साथ साझा करने में असफल होते हैं। इस साल, जबकि हम नई शुरुआत और नए इलाज की उम्मीद करते हैं, आइए, हम देखभाल की उपेक्षा न करें। हमारे शरीर के लिए एक टीका के साथ, हमें अपने दिलों के लिए एक टीका की आवश्यकता है। वह टीका है देखभाल । यह एक अच्छा साल होगा जब हम दूसरों की देखभाल करेंगे, जैसा कि हमारी माता मरियम हमारे साथ करती हैं।

पाना

तीसरी क्रिया हैः पाना। संत लूकस के सुसमाचार में हम पाते हैं कि गड़ेरियों ने मरियम जोसेफ और चरनी में लेटे हुए बालक को पाया।(2,16) गड़ेरियों को चमत्कारी और शानदार संकेत नहीं मिले, लेकिन एक साधारण परिवार को पाया। । फिर भी उन्होंने पवित्रता में भव्यता, कोमलता में ताकत में ईश्वर को पाया। उन्होंने स्वर्गदूत के संदेश पर विश्वास किया और ईश्वर को पाया। हम भी ईश्वर को नहीं पाते अगर हमें ईश्वर का अनुग्रह न मिला होता और हमने पाया कि उसकी क्षमा द्वारा हमें नया जीवन मिलता है, उसकी सांत्वना आशा को जगाती है, उसकी उपस्थिति अपरिवर्तनीय आनंद को बढ़ाती है। वास्तव में, प्रभु को एक बार पाना हमारे लिए प्रयाप्त नहीं है हमें अपने जीवन में हर परिस्थिति में उसे ढूँढने की जरुरत है। उनका अनुग्रह प्राप्त करने के लिए हमें सक्रिय रहना होगा।

अपने प्रवचन को अंत करते हुए संत पापा ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में हम किसी के लिए समय निकालें। समय एक खजाना है जो हम सभी के पास है, फिर भी हम इसे केवल अपने लिए उपयोग करना चाहते हैं। आइए, हम ईश्वर और हमारे पड़ोसी के लिए समय निकालें, जो अकेले या पीड़ित हैं, उनके लिए जिनकी चिंता करने वाली और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यदि हम समय दे पायेंगे तो हम चरवाहों की तरह खुशी से भर जाएंगे। माता मरियम, जिसने दुनिया में प्रभु को लाया, हमें अपने समय के प्रति उदार होने में मदद करें। ईश्वर की पवित्र माँ, आप, जो अपने दिल में चीजों को संजोना जानती हैं, हमारी देखभाल कीजिए और हमें ईश्वर के लिए और दूसरों के लिए समय निकालना सिखाइये।

01 January 2021, 15:19