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बुधवारीय आमदर्शन में संत पापा बुधवारीय आमदर्शन में संत पापा   (ANSA)

आमदर्शन समारोहः एकता का एकमात्र मार्ग प्रार्थना है

अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा फ्रांसिस ने प्रार्थना को एकता का एकमात्र मार्ग निर्देशित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरूवार, 20 जनवरी 2021, (रेई)  संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन प्रेरितिक निवास की पुस्तालय से सभों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाई एवं बहनों सुप्रभात।

आज की धर्मशिक्षा में हम ख्रीस्तीय एकता की प्रार्थना पर चिंतन करेंगे। वास्तव में, 18 जनवरी से 25 जनवरी का सप्ताह विशेष रूप से इसके लिए समर्पित है  जहाँ हम ख्रीस्तीय विश्वासियों के मध्य एकता हेतु प्रार्थना करते हैं जिससे हमारे बीच से विभाजन के कलंक दूर हों। अंतिम व्यारी के बाद येसु ख्रीस्त ने अपने के लिए प्रार्थना की, “कि वे सभी एक हो जायें।” (यो. 17.21) यह प्रार्थना दुःखभोग के पहले की गई जिसे हम आध्यात्मिक उपचार की संज्ञा दे सकते हैं। हम इस पर गौर करें, येसु अपने शिष्यों को एकता में बने रहने की आज्ञा नहीं दी। उन्होंने अपने पिता से हमारे लिए प्रार्थना की कि हम सभी एकता में बने रहें। इसका अर्थ हमारे लिए यही है कि हम अपनी शक्ति से एकता को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इससे भी बढ़कर एकता हमारे लिए एक उपहार है, हमें अपनी प्रार्थना में इस कृपा हेतु मांग करने की जरुरत है।

विभाजन के कारण

संत पापा ने कहा कि हममें से प्रत्येक को इसकी जरुरत है। वास्तव में, हम स्वयं अपनी एकता में बने नहीं रह सकते हैं। यहाँ तक कि संत पौलुस भी इस दर्द भरे द्वंद को अनुभव करते हैं, मैं अपने में अच्छाई करना चाहता हूँ लेकिन बुराई ही करता हूँ। (रोम.7.19) इस तरह उन्होंने हमारे बीच व्याप्त बहुत सारी विभाजनों को अपने में अनुभव किया- लोगों के बीच विभाजन, परिवारों में, समाज में, देशों के बीच और यहाँ तक कि विश्वासियों के बीच और हमारे अन्दर भी विभाजन की स्थिति। द्वितीय वाटिकन महासभा कहती है, “असंतुलन जिसके बीच विश्व कार्यारत है वह मुख्य रुप से मनुष्य के हृदय में व्याप्त असंतुलन से जुड़ा हुआ है। क्योंकि  मनुष्य के अंदर ही बहुत सारी चीजें एक-दूसरे से युद्धग्रस्त स्थिति में हैं। (...) अतः वह आतंरिक विभाजनों से ग्रस्ति है और वहीं से बहुत सारी चीजें, और समाज में ऐसी बड़ी असहमति प्रसारित होती है (गौदुयिम एत स्पेस 10)। इसका निदान, इस तरह विभाजनों का विरोध करने में नहीं है क्योंकि असहमति के द्वारा असहमति की उत्पत्ति होती है। इसके असल उपचार की शुरूआत ईश्वर से शांति,मेल-मिलाप और एकता हेतु निवेदन करने से होती है।

एकता के लिए प्रार्थना करें

यह ख्रीस्तियों के बीच एकता हेतु सर्वप्रथम निहायत है।  एकता हमारे लिए केवल प्रार्थना के जारिए फलहित की जा सकती है। राजनायिक प्रयास और शैक्षनिक वार्ता इसके लिए प्याप्त नहीं हैं। ये सारी चीजें की जाती हैं लेकिन ये काफी नहीं हैं। येसु इस बात से वाकिफ हैं और स्वयं  प्रार्थना करते  हुए हमारे लिए उस मार्ग को खोलते हैं। एकता हेतु हमारी प्रार्थना इस भांति हमारे लिए एक नम्र लेकिन विश्वास में येसु ख्रीस्त की प्रार्थना में सहभागी होना है, जो  हमसे प्रतिज्ञा करते हैं कि कोई भी प्रार्थना हम उनके नाम में करते, तो वह पिता के द्वारा सुनी जाती  है (यो.15.7)। इस संदर्भ में हम अपने आप से पूछ सकते हैं, “क्या मैं एकता हेतु प्रार्थना करता हूँॽ”  यह ईश्वर की इच्छा है, औऱ यदि हम अपनी इच्छाओं की थाह लें जिसके लिए हमने प्रार्थना की है, तो हम पायेंगे कि हमने ख्रीस्तीय एकता हेतु बहुत कम और शायद नहीं के बराबर प्रार्थना की है। यद्यपि, विश्व का विश्वास इस पर निर्भर करता है वास्तव में, ईश्वर हमसे कहते हैं कि हम एक हों, “जिससे दुनिया हममें विश्वास करें ” (यो.17.21)। दुनिया हम पर विश्वास इसलिए नहीं करेगी क्योंकि हम ने अपनी तर्क शक्ति से उसे विश्वस्त किया है वरन हमने एकता में अपने प्रेम का साक्ष्य दिया है जो हम सभों को करीब लाता है।

प्रार्थना की आवश्यकता

वर्तमान समय की गंभीर कठिनाई में यह प्रार्थना हमारे लिए और भी जरुरी हो जाता है जिससे युद्धों के बीच एकता कायम हो सके। यह हमारे लिए आवश्यक है कि हम सामान्य भलाई हेतु अपने विकल्पों को अलग करें जिससे हमारे उदाहरण आधारशिला बनें, हमारे लिए यह जरुरी है कि हम ख्रीस्तियों के रुप में दश्यमान एकता के मार्ग का साक्ष्य दें। विगत सदियों में, बहुत से पहल किये गये जिसके लिए हम ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, लेकिन हमें विश्वास की कमी के बिना या बिना थके, अब भी प्रेम और प्रार्थना में बने रहने की आवश्यकता है। यह वह मार्ग है जिसे पवित्र आत्मा कलीसिया के लिए, हम ख्रीस्तियों के लिए प्रशस्त करते हैं जहाँ से हम पीछे नहीं लौटते हैं।

प्रार्थना, एकता हेतु युद्ध करना

 संत पापा ने कहा कि प्रार्थना करने का अर्थ एकता हेतु युद्ध करना है। हाँ, युद्ध करना, क्योंकि हमारा शत्रु शैतान है जो हमें विभाजित करता है। येसु ने पवित्र आत्मा से एकता हेतु प्रार्थना की। शौतान सदैव हमें बांटा है। वह सदैव ऐसा करता क्योंकि यह उसके लिए सहज है। वह सभी जगह और किसी भी रुप में हमारे बीच विभाजन लाता है, जबकि पवित्र आत्मा हमें एकता में बनाये रखते हैं। सामान्यतः शैतान हमें उच्च ईशशास्त्र से नहीं फुसलाता लेकिन हमारे भाई-बहनों की कमजोरियों से हमारी परीक्षा लेता है। वह चतुर है, वह दूसरों की गलतियों और कमियों को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करता, हमारे बीच असहमति बोता, आलोचना भरता और बंटवारा उत्पन्न करता है। ईश्वर के मार्ग अलग हैं, वे हमें बुहत अधिक प्रेम करते हैं, वे  हमें वैसे ही प्रेम करते हैं  जैसे कि हम हैं,  वे हमें उसी रुप में स्वीकारते हैं, हमारी विभिन्नता, हमारे पापमय स्वभाव और इस तरह वे हमें एकता की ओर ढ़केलते हैं। हम अपना मूल्यकंन करते हुए अपने में पूछ सकते हैं,उन स्थानों में जहां हम रहते हैं क्या हम ईश्वर प्रदत्त हथियारों, प्रार्थना और प्रेम से एकता में बढ़ने के लिए लड़ाई करते हैं। संत पापा ने कहा कि लड़ाई को हमारी शिकायतों के द्वारा बल मिलता है जिसे हम पीठ पीछे करते हैं। यह शौतान का एक सुलभ हथियार है जिसके द्वारा वह ख्रीस्तीय समुदाय, परिवारों, मित्रों के बीच में सदैव विभाजन लाता है।  पवित्र आत्मा हमें एकता में बने रहने हेतु प्रेरित करते हैं।

एकता और प्रेम की जड़ येसु

इस सप्ताह प्रार्थना की विषयवस्तु विशेष रुप से प्रेम है, “मेरे प्रेम में बने रहो और तुम बहुत फल उत्पन्न करोगे। (यो.15.5-9)। एकता और प्रेम की जड़ येसु  हैं जो हमें पूर्वाग्रहों पर विजय होने में मदद करते और हमारे भाई-बहनों को सदैव प्रेम से देखने को प्रेरित करते हैं। ऐसा करने के द्वारा हम दूसरी रीति के ख्रीस्तियों को,उनके रिवाजों, उनके इतिहास को ईश्वर के उपहार स्वरूप देखने के योग्य बनते हैं। वे हमारे लिए उपहारों के समान हैं जो हमारे धर्मप्रांतों और पल्ली समुदायों में उपस्थिति हैं। आइए हम उनके लिए प्रार्थना करें और जब कभी संभंव हो उनके साथ प्रार्थना करें। इस भांति हम उन्हें प्रेम करना और उनकी प्रशंसा करना सीखेंगे। प्रार्थना जैसे कि धर्मसभा हमारे सिखलाती है, हर अंतरधार्मिक मिलन की आत्मा है (यूनितातिस रेदिनतेग्रासियो 8) । यह हमें येसु ख्रीस्त की ओर आने का एक आधार बनें और हम उनके सपने को साकार कर सकेंः जिससे हम सभी एक हो सकें। 

20 January 2021, 12:44