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परमाणु हथियार परमाणु हथियार  (Gerasimov)

परमाणु हथियार के बिना विश्व की कल्पना पर वाटिकन द्वारा वेबिनार

वाटिकन द्वारा पूर्ण निरस्त्रीकरण पर एक वर्चुवल सेमिनार में प्रोफेसर जेरार्ड ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पोप और कलीसिया क्यों परमाणु हथियार के पूर्ण निषेध का दृढ़ता से समर्थन करते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 17 दिसम्बर 2020 (रेई)- समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद ने बुधवार को वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण पर एक वर्चुवल सेमिनार की मेजबानी की।

यह वेबिनार संत पापा फ्राँसिस द्वारा हाल में प्रकाशित विश्व पत्र फ्रातेल्ली तूत्ती के मद्देनजर आयोजित किया गया है जिसमें यह अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए विनाश के खतरे के बजाय आपसी विश्वास पर आधारित होने का आह्वान करता है।

वाटिकन कोविड-19 सुरक्षा टास्क फोर्स आयोग के सदस्य प्रोफेसर जेरार्ड पाऊर के अनुसार इसका आयोजन तीन उद्देश्यों से किया गया था।

प्रकाशित दस्तावेज

काथलिक शांति निर्माण नेटवर्क के संयोजक ने वाटिकन रेडियो को बतलाया कि वेबिनार का पहला लक्ष्य था- हाल में प्रकाशित किताब "ए वॉर्ल्ड फ्री फ्रोम न्यूक्लियर वेपन्स" (परमाणु हथियार से मुक्त एक विश्व) का विमोचन करना। इस संस्करण में 2017 में वाटिकन द्वारा आयोजित एक प्रमुख संगोष्ठी के दस्तावेज हैं जो परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया बनाने की दिशा में प्रयासों को फिर से शुरू करने हु प्रेरित करता है।

प्रोफेसर ने गौर किया कि उस अवसर पर संत पापा ने परमाणु हथियारों पर एक "अभूतपूर्व बयान दिये थे ˸ कि परमाणु हथियार का प्रयोग सिर्फ अनैतिक नहीं है बल्कि उसको रखना भी अनैतिक है।"

परमाणु हथियार प्रतिबंध समझौता

प्रोफेसर पाऊवर ने कहा कि वेबिनार सही समय में हुआ है क्योंकि परमाणु हथियार निषेध समझौता को 22 जनवरी 2021 को लागू किया जाएगा। इसे 2017 के मध्य में ही उठाया गया था किन्तु कम से कम 50 देशों के समर्थन की आवश्यकता के कारण हाल में ही पुष्ट किया जा सका। उन्होंने कहा, "परमधर्मपीठ समझौता का समर्थन करनेवालों में एक सबसे सक्रिय देश है।"

संत पापा के विश्व पत्र की शिक्षा

वेबिनार का तीसरा मकसद है संत पापा के प्रेरितिक पत्र फ्रातेल्ली तूत्ती। प्रोफेसर ने कहा कि संत पापा के इस विश्व पत्र में परमाणु हथियार की अनैतिकता एवं उसे खत्म करने हेतु काम करने की नैतिक अनिवार्यता पर जोर दिया गया है। पोप फ्रांसिस ने "राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय मानव सुरक्षा के प्रतिमान में" इस मुद्दे को फिर से पेश किया है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मामलों को आकार देने हेतु एक अतिव्यापी तरीका है।

परमाणु प्रतिष्ठा को नहीं

बुधवार को आयोजित वेबिनार में सुरक्षा एवं हथियार नियंत्रण क्षेत्र के कई उच्च स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया तथा वाटिकन के शीर्ष अधिकारी एवं काथलिक बुद्धिजीवियों ने इसकी मेजबानी की।

प्रोफेसर ने कहा कि "वे कई मुद्दों में एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं लेकिन सभी इस बात पर सहमत होंगे कि परमाणु स्थिति नैतिक रूप से अस्वीकार्य है।”

उन्होंने कई देशों द्वारा अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने और मौजूदा परमाणु हथियार नियंत्रण शासन के अंत के प्रयासों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "विश्व को दिशा परिवर्तन करने तथा परमाणु निरास्त्रीकरण की ओर बढ़ने की जरूरत है।" 

सिर्फ एक अवसर

पूछे जाने पर कि क्यों काथलिक कलीसिया परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करती है फ्रोफेसर ने कहा कि संत पापा और साथ ही साथ, उनके उतराधिकारियों ने भी परमाणु हथियार के निरस्त्रीकरण पर जोर दिया है तथा हथियार नियंत्रण समझौतों को बढ़ावा दिया है। परमाणु हथियार के साथ समस्या यह है कि दूसरे हथियारों के विपरीत, यह अंधाधुंध और अनुपातहीन होता है। परमाणु हथियारों के उपयोग की कल्पना करना बहुत मुश्किल है कि वह भेदभाव और आनुपातिकता के न्यायसंगत मानदंडों को पूरा कर पायेगा।"

प्रोफसर ने अंत में कहा कि परमाणु हथियार सिर्फ "नकारात्मक शांति" उत्पन्न कर सकता है। इसमें "दुर्घटना और गलत धारणा का भी बहुत अधिक खतरा है। यदि किसी कारण से परमाणु हथियारों की दुर्घटना या प्रयोग हो जाए, तो दूसरे हथियार प्रणाली की तरह, हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा।"

17 December 2020, 15:28