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आर्थिक एकात्मता पर वाटिकन में सम्पन्न सम्मेलन के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस, तस्वीरः 05.02.2020 आर्थिक एकात्मता पर वाटिकन में सम्पन्न सम्मेलन के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस, तस्वीरः 05.02.2020 

आर्जेन्टीना की कलीसिया सामाजिक मैत्री को बढ़ावा दे, सन्त पापा

सन्त पापा फ्राँसिस ने आर्जेन्टीना के काथलिक धर्माधिकारियों का आह्वान किया है कि वे समाज के प्रत्येक आयाम में सामाजिक मैत्री को बढ़ावा दें।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 दिसम्बर 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने आर्जेन्टीना के काथलिक धर्माधिकारियों का आह्वान किया है कि वे समाज के प्रत्येक आयाम में सामाजिक मैत्री को बढ़ावा दें।  

आर्जेन्टीना की कलीसिया ने गुरुवार को सामाजिक एवं प्रेरितिक देखभाल सम्बन्धी 23 वाँ राष्ट्रीय दिवस मनाया। इस उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस ने एक विडियो सन्देश प्रकाशित कर सामाजिक मैत्री के महत्व पर प्रकाश डाला।

आर्जेन्टीना की कलीसिया द्वारा सन् 1998 में सामाजिक एवं प्रेरितिक देखभाल सम्बन्धी दिवस की स्थापना की गई थी। इस वर्ष इस दिवस का विषय हैः "साक्षात्कार, बंधुत्व और सामाजिक मैत्री की संस्कृति की ओर अग्रसर, राष्ट्र"। इस दिवस की स्थापना बोयनुस आयरस के तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष होर्हे बेरगोलसियो यानि सन्त पापा फ्राँसिस ने ही की थी।

युद्ध के विरुद्ध सामाजिक मैत्री

सन्देश में सन्त पापा ने विश्व के विभिन्न भागों में व्याप्त युद्ध और वैमनस्यता पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पाप और शक्ति आजमाने की आदत हमें दुश्मनी और युद्ध की ओर ले जाती है। हम भूल जाते हैं कि हमारा मिशन सद्भाव, भाईचारा और सामाजिक मैत्री है।

सन्त पापा ने कहा, "विश्व की हर दिशा में झगड़े चल रहें हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि हम तीसरे युद्ध में कदम रख चुके हैं, यह सामाजिक मित्रता नहीं है।" उन्होंने इस तथ्य पर गहन चिन्ता व्यक्त की कि वार्ताओं की जगह अन्यों को नीचा दिखाने वाली नारे बाज़ी ने ले ली है। उन्होंने कहा, "सामाजिक मित्रता तब तक साकार नहीं हो सकती जब तक हम सम्वाद और साक्षात्कार के तैयार नहीं हैं, जिसके लिये अन्यों की सुनना नितान्त आवश्यक है।"

विचारधारा और जुनून का ख़तरा

सन्त पापा ने कहा कि समाज में मैत्री को जोखिम में डालनेवाले दो तथ्य हैं, अर्थात् विचारधारा और जुनून। उन्होंने कहा कि विचारधाराएँ सबकुछ को अभिभूत कर लेना चाहती हैं तथा निष्ठा की मांग करती हैं। विचारधाराएँ, उन्होंने कहा, "मानव प्रकृति की सहमति को निरस्त्र करने में सफल हो जाती हैं।"  

समाज में मैत्री का दूसरा दुश्मन, उन्होंने कहा, जुनून या आवेग है। यह वह दमनकारी शक्ति है जो लोगों के बीच वार्ताओं को नष्ट कर डालता तथा कई बार अन्यों को उनकी उचित जगह दिलवाने के बजाय उनके उन्मूलन में लग जाता है।  

सामाजिक मैत्री के संकेत

सन्त पापा ने कहा कि शिक्षा से वंचित बच्चे, भुखमरी से पीड़ित लोग, स्वास्थ्य सुरक्षा रहित लोग, पेयजल एवं प्राथमिक आवश्यकताओं से वंचित लोग तथा हाशिये पर जीवन यापन करनेवाले लोग इस बात का संकेत हैं कि वर्तमान विश्व में सामाजिक मैत्री का कोई अस्तित्व नहीं है।

आर्जेन्टीना के धर्माध्यक्षों का सन्त पापा ने आह्वान किया कि वे अपने सम्मेलनों, शिविरों एवं वार्ताओं को केवल शब्दों तक ही सीमित न रखें बल्कि उन्हें कार्यों में मूर्तरूप प्रदान कर सामाजिक मैत्री को प्रोत्साहित करें।   

04 December 2020, 11:47