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रोमन कूरिया के साथ मुलाकात में संत पापा फ्राँसिस रोमन कूरिया के साथ मुलाकात में संत पापा फ्राँसिस 

संकट नवीकरण में मदद करता, संघर्ष कलह पैदा करता है, संत पापा

संत पापा ने रोमन कूरिया के अपने सहयोगियों को ख्रीस्त जयंती के अवसर अपने संदेश में कहा, महामारी द्वारा चिह्नित इस क्रिसमस पर, हम शांति बनाए रखें। हम इस संकट को अनुग्रह के समय के रूप में देखें और पवित्र आत्मा को हमारा नेतृत्व करने दें। इसे संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए, जिससे कलह और शत्रुता पैदा होती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 21 दिसम्बर 2020 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 21 दिसम्बर को वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में रोमन कूरिया के अपने सहयोगियों से ख्रीस्त जयंती के अवसर पर अभिवादन किया।

संत पापा ने अपने संदेश में दुनिया के सामने आने वाले संकट पर चिंतन किया : "यह क्रिसमस - स्वास्थ्य, आर्थिक, सामाजिक और यहां तक ​​कि कलीसियाई भविष्य की महामारी का क्रिसमस है, जो पूरी दुनिया को संकट में लाया है।"  हालांकि यह संकट, "प्रामाणिकता को परिवर्तित करने और पुनर्प्राप्त करने का एक शानदार अवसर है, सभी के लिए एक विश्वव्यापी आकांक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए का अवसर है।"

महामारी और क्रिसमस से सबक

27 मार्च को निर्जन संत पेत्रुस प्रांगण में "उरबी एत ओरबी" संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने उल्लेख किया कि कोरोना वायरस ने "हमारी भेद्यता को उजागर किया है और उन झूठी और सतही निश्चितताओं को उजागर किया है।" साथ ही भाइयों और बहनों के रूप में हमारे संबंधों को "एक बार और उजागर" किया है।"

संत पापा फ्राँसिस ने बाइबिल के संदर्भ से अब्राहम, मूसा, एलियाह, योहन बप्ततिस्ता और टार्सस के पॉल के संकट के बारे बताया। "लेकिन सबसे बड़ा संकट येसु का है, रेगिस्तान में प्रलोभनों से लेकर गेतसेमानी के "क्रूस पर चरम संकट" तक। अपने पिता के प्रति पूर्ण और आश्वस्त परित्याग पुनरुत्थान का मार्ग खोलता है।

संत पापा ने कहा, "संकट पर यह चिंतन हमें कल और आज के घोटालों के कारण उत्पन्न संकटों के आधार पर जल्दबाजी में कलीसिया को चेतावनी देता है, कि निराशाजनक" विलक्षण विश्लेषण यथार्थवादी नहीं हैं, क्योंकि ईश्वर अपने बीज का विकास जारी रखता है। इस प्रकार, कूरिया में कई ऐसे हैं जो अपने विनम्र, विवेकपूर्ण, मौन, निष्ठावान, पेशेवर, ईमानदारी पूर्वक काम की गवाह देते हैं, जबकि "समाचार पत्रों में समस्याएं तुरंत समाप्त हो जाती हैं," और "आशा के संकेत लंबे समय के बाद ही समाचार बनाते हैं, पर हमेशा नहीं।”

संत पापा ने कहा,"जो कोई भी सुसमाचार के प्रकाश में संकट को नहीं देखता है, वह अपने आप को एक लाश की शव यात्रा तक ही सीमित रखता है" - "लेकिन अगर हम फिर से साहस और विनम्रता के साथ कहते हैं कि संकट का समय पवित्र आत्मा का समय है,  अंधेरे के अनुभव के सामने भी, हम इस विश्वास को बनाए रखेंगे कि“ चीजें नए रूप में आने वाली हैं।”

कलीसिया संकट में, संघर्ष में नहीं

संत पापा  फ्रांसिस ने "संघर्ष के साथ संकट को भ्रमित नहीं करने हेतु आगाह किया। उन्होंने कहा, "संकट का आम तौर पर एक सकारात्मक परिणाम होता है, जबकि संघर्ष हमेशा विभाजन लाता है," दोस्तों में प्रेम की बजाय दुश्मनी लाता है, जिसके परिणामस्वरूप "बंद समूहों" का गठन होता है जो "हमारे मिशन की सार्वभौमिकता को प्रभावित करते हैं।"

संत पापा ने कहा, "जब कलीसिया को संघर्ष के संदर्भ में देखा जाता है - दाएं बनाम बाएं, प्रगतिशील बनाम परंपरावादी - वह खंडित और ध्रुवीकृत हो जाती है, विकृत हो जाती है और अपने वास्तविक स्वरूप को खो देती है।" निरंतर संकट में रहने वाली कलीसिया क्योंकि वह जीवित है, उसे कभी भी संघर्ष करने वाली कलीसिया नहीं बनना चाहिए। जीतने और हारने वाली कलीसिया नहीं बनना चाहिए। संघर्षरत कलीसिया केवल "आशंका फैलाने वाली और अधिक कठोर बन जाती है और पवित्र आत्मा द्वारा कलीसिया को दिये उपहार ‘समृद्धि और बहुलता’ को दरकिनार करते हुए एकरूपता को लागू करती है।

 संत पापा ने कहा कि संकट से उबरने के लिए हमें "यह स्वीकार करना होगा कि यह अनुग्रह के समय के रूप में हमें दिया गया है कि हम में से प्रत्येक ईश्वर की इच्छा को समझें और पूरी कलीसिया के लिए" प्रार्थना करें जो हमें "सभी निराशा के विरुद्ध आशा" करने की शक्ति देगा (सीएफ, रोमियों. 4.18)।

आत्मा के लिए खुलापन

संकट और आत्मा द्वारा उत्पन्न नयापन पुराने के विरोध में कभी  नहीं है, लेकिन पुराने से ही नया शुरु होता है और यह लगातार फलता है। जैसे गेहूं का एक दाना पृथ्वी में गिर जाता है और मर जाता है, एक संकट को "मृत्यु और क्षय" एवं "जन्म और फलना-फूलना" दोनों कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों एक हैं। अंत में, एक नई शुरुआत आकार ले रही है। इसलिए अपने आप को परिरक्षण द्वारा संकट से बचाते हैं तो हम ईश्वर की कृपा के कार्य में बाधा डालते हैं, जो खुद ही और हमारे माध्यम से प्रकट होते हैं।

संत पापा ने आलोचना और गपशप से बचने हेतु अपने निमंत्रण को नवीनीकृत किया जो हर संकट को संघर्ष में बदल देता है: "सुसमाचार बताता है कि चरवाहों ने दूतों की घोषणा पर विश्वास किया और येसु की ओर यात्रा पर निकले (सीएफ, लूकस 2: 15-16)। दूसरी ओर, हेरोदे ने खुद को ज्योतिषियों की कहानी के सामने बंद कर दिया और अपने बंद को झूठ और हिंसा में बदल दिया। (सीएफ, मत्ती 2: 1-16) हम में से प्रत्येक, कलीसिया में हमारा जो भी स्थान है, खुद से पूछें कि क्या वह येसु को चरवाहों की विनम्रता के साथ या हेरोद की आत्म-सुरक्षा के साथ संकट में उसका पीछा करना या संघर्ष में खुद का बचाव करना चाहता है।”

अंत में, संत पापा ने सभी को उनके कार्यों और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और क्रिसमस के उपहार के रूप में विशेष रूप से गरीबों के बीच खुशखबरी की घोषणा करने में उदारता के साथ सहयोग" करने हेतु अनुरोध किया।

21 December 2020, 15:08