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2020.12.25 Messaggio Natalizio e Benedizione Urbi et Orbi 2020.12.25 Messaggio Natalizio e Benedizione Urbi et Orbi  (Vatican Media)

येसु ख्रीस्त में हम सभी भाई-बहनें हैं, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने ख्रीस्त जयंती के अवसर पर ऊरबी एत ओरबी, विश्व के नाम अपना संदेश में मानव को येसु ख्रीस्त में भाई-बहन की संज्ञा दी।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी-शुक्रवार, 25 दिसम्बर 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस वाटिकन प्रेरितिक निवास की पुस्तकालय से विश्व के नाम अपना संदेश प्रेषित किया। उन्होंने सभों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, खुश ख्रीस्त जयंती मुबारक हो।

मैं आप सभों को ख्रीस्त जयंती का संदेश प्रेषित करना चाहता हूँ जिसे कलीसिया नबी इसायस के शब्दों में घोषित करती हैः “हमें एक बालक मिला है, हमें एक पुत्र दिया गया है” (इसा. 9.6)।

बालक सभों के लिए

हमारे लिए एक पुत्र का जन्म हुआ है। एक जन्म सदैव हमारे लिए आशा की निशानी है, यह जीवन है जो पुष्पित होता है जिसमें हम भविष्य की आशाओं को देखते हैं। इससे भी बढ़कर, बालक येसु ने “हमारे लिए” जन्म लिया है। उनमें हम अपने लिए कोई सीमा, प्रधानता या अलगाव को नहीं पाते हैं। कुंवारी मरियम से बेतलेहम में जनमे बालक सभों के लिए हैं। वे “पुत्र” हैं जिसे ईश्वर ने सारी मानव जाति के लिए दिया है।

हम इस बालक के प्रति कृतज्ञ हैं जिसके द्वारा हम ईश्वर को पिता कह कर पुकार सकते हैं। येसु ख्रीस्त एकलौटे पुत्र हैं जिसे छोड़कर पिता को कोई नहीं जानता है। लेकिन वे दुनिया में इसलिए आये जिससे वे हमें अपने स्वर्गिक पिता के मुखमंडल को प्रदर्शित कर सकें। हम इस बालक के प्रति शुक्रगुजार हैं जिसके कारण हम एक दूसरे को भाई-बहन कह सकते हैं क्योंकि हम सभी सचमुच में वही हैं। हम विभिन्न महादेशों, भाषा-भाषियों और संस्कृतियों, अपनी पहचान और विभिन्नताओं से आते हैं फिर भी हम सभी एक दूसरे के लिए भाई-बहन हैं।

येसु में हम सभी भाई-बहनें

इतिहास के वर्तमान समय, जहाँ हम प्रर्यावरण की समस्या और घोर आर्थिक संकट के साथ सामाजिक असंतुलन को पाते जो कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुई है, ऐसी परिस्थिति में यह हमारे लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम एक दूसरे को भाई-बहनों के रुप में स्वीकार करें। ईश्वर ने इस भ्रातृत्व की भावना को अपने बेटे येसु ख्रीस्त को दुनिया में हमें देते हुए संभव बनाया है। भ्रातृत्व की भावना जिसे वे हमें देते हैं उसका सरोकार हमारे लिए, हमारे उत्तम शब्दों, अमूर्त आदर्शों या कोई खरी भावनाओं में नहीं है। भ्रातृत्व की यह भावना हमारे असल प्रेम में आधारित है जो मुझे दूसरों की भिन्नताओं के बावजूद उनसे मिलन और वार्ता करने हेतु प्रेरित करता है, जहाँ मैं दूसरों के दुःखों के कारण करूणा के भाव से भावविहृल होता हूँ, उनकी ओर बढ़ता और उनकी सेवा करता हूँ यद्यपि वे मेरे परिवार के अंग नहीं हैं, उनका मेरे जाति या धर्म से कोई संबंध नहीं है। अपनी विभिन्नताओं के बावजूद वे मेरे भाई-बहनें हैं। यही मनोभाव मैं दूसरे देशों और लोगों के संबंध में अपने को पाता हूँ।

व्यक्तिगत अंधकार से निकलें

ख्रीस्त जयंती में हम येसु की ज्योति का उत्सव मनाते हैं जो दुनिया में सभों के लिए आये। महामारी के इस अंधेरे और अनिश्चित समय में टीका की खोज हमारे लिए ज्योति बन कर उभरती है। दुनिया हेतु आश की ज्योति बनने के लिए इसे सभों के लिए उपलब्ध होना है। राष्ट्रवाद ने नाम पर हम एक सच्चे मानव परिवार के रूप में जीने से अपने को रोक नहीं सकते हैं। न ही हम कट्टरपंथी व्यक्तिवाद के वायरस को अपने में विजयी होने दे सकते हैं जो दुःख में पड़े भाइयों और बहनों के प्रति हमें उदासीन बना देता है। मैं स्वयं को दूसरों के आगे नहीं रख सकता हूँ,  बाजार के नियमों और आविष्कार के पेटेंटों को, प्यार के नियमों और मानवता के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं रख सकता हूँ। संत पापा ने राज्य के नेताओं, कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अग्रह किया कि वे सहयोग को बढ़ावा दें, न की प्रतिस्पर्धा करें जिससे सभों को एक समाधान मिल सके, सभी के लिए टीके की व्यवस्था हो सकें विशेष रूप से जो सबसे कमजोर और जरूरतमंद हैं।

दूसरों का सहारा बनें

बेतलेहम का बालक हमारी सहायता करें जिससे हम उदार बन सकें, दूसरों को सहयोग और मदद दे सकें विशेषकर उन्हें जो अति संवेदनशील, बीमार हैं, जो बेरोजगार या महामारी के कारण आर्थिक संकट की स्थिति से होकर गुजर रहें हैं, नारियाँ जो इस बंद स्थिति में घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं।

चुनौती के इस दौर में जिसकी कोई सीमाएं नहीं हैं हम अपने में दीवार खड़ा नहीं कर सकते हैं। हम सभी एक ही नाव में सवार हैं जहाँ हर दूसरा व्यक्ति मेरा भाई या मेरी बहन है। मैं हरएक में ईश्वर के चेहरे को प्रतिबिंबित पाता हूँ, और जो दुःख के शिकार हैं उनमें मैं सहायता हेतु ईश्वर की विनय को सुनता हूँ। मैं उन्हें बीमारों, गरीबों, बेरोजगारों, परित्यक्त, प्रवासियों और शरणर्थियों में देखता हूँ।

बच्चों की ओर निगाहें फेरें

इस दिन जब ईश्वर के शब्द ने शरीरधारण कर एक बालक के रुप में जन्म लिया, आइए हम अपनी निगाहें विश्व के उन असंख्य बच्चों की ओर फेरें विशेष रुप से सीरिया, इराक और यमन जो अब भी युद्ध की भारी कीमत चुका रहे हैं। उनका चेहरा हृदय से भले लोगों की अंतःकरण का स्पर्श करे जिससे युद्ध के कारणों को संबोधित किया जा सके और सहासिक प्रयास के माध्यम भविष्य में शांति बहाल की जा सके।

यह पूरे मध्यपूर्वी क्षेत्र और पूर्वी भूमध्यसागरीय प्रांत में व्याप्त तानव दूर करने का अनुकूल समय बनें।

आमन-चैन की कामना

बालक येसु सीरिया के प्रिय लोगों के घावों को चंगा करें जो सालों से युद्ध के कारण विध्वंस परिणाम झेल रहें हैं और इस समय महामारी ने उनकी स्थिति को और भी जटिल बन दी है। वे इराक के लोगों को सांत्वना प्रदान करें और उन्हें जो मेल-मिलाप के कार्य में संलग्न हैं विशेष रुप से यसीदी जिन्होंने युद्ध के इन सालों में अपने ओर से प्रयास जारी रखा है। वे लीबिया में शांति स्थापना हेतु मदद करें और देश में शत्रुता के सभी रूपों को समाप्त करने हेतु वार्ता के नए चरण को सक्षम बनायें।

बेतलेहम का बालक अपने जन्म स्थली को भ्रातृत्वमय उपहार से भर दें जिसने उनके जन्म का साक्ष्य दिया। इसराएली और फिलस्तीनी वार्ता के माध्यम अपने बीच में विश्वास को पुनः स्थापित कर सकें जिससे हिंसा और स्थानीय शिकायतों में काबू पायी जा सके, इस भांति विश्व उनके द्वारा भ्रातृत्व की सुन्दर मिसाल को देख पायेगा।

ख्रीस्त जयंती की रात को उदित चमकीला तारा लेबनान के लोगों का मार्गदर्शक बनें और उन्हें प्रोत्साहित करे जिससे वे अतंरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से, वर्तमान समय में झेल रहे जीवन की कठिनाइयों में अपनी आशा न खोयें। शांति के राजकुमार देश के नेताओं की मदद करें जिससे वे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठते हुए ईमानदारी और पारदर्शिता में अपने को गम्भीर कार्यों हेतु संलग्न कर सकें जिससे लेबनान में नवीनता की प्रक्रिया शुरू हो सके और देश में स्वतंत्रता और सह-अस्तित्व स्थापित हो।

सर्वशक्तिमान ईश्वर का पुत्र अंतरराष्ट्रीय समुदायों और उन देशों की प्रतिबद्धता को बनाए रखें जो  नागोर्नो-करबाख, साथ ही यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों में संघर्ष विराम हेतु अपने प्रयास में लगे हैं जिससे वे  आपसी शांति और सुलह के लिए वार्ता के एकमात्र मार्ग को चुनाव सकें।

दिव्य ईश पुत्र बुरकीना फासो, माली, निजर के लोगों के दुःख-दर्द को दूर करने में सहायता करें जो आतंकवाद और युद्ध के कारण कई तरह के घोर मानवीय त्रसदियों के शिकार हैं, साथ ही वर्तमान महामारी और प्रकृति आपदों ने उनके जीवन को कठिनाइयों से भर दिया है। वे इथोपिया की हिंसा को खत्म करने में मदद करें जहाँ युद्ध के कारण बहुत सारे लोगों को पलायन का शिकार होना पड़ा है। वे उत्तरी मोजांबिक, काबो देलगादो प्रांत के निवासियों को सांत्वना प्रदान करें जो अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हिंसा के शिकार हुए हैं। ईश पुत्र दक्षिण सूडान, नाईजीरिया और कैमरून के नेताओं को प्रेरित करें जिससे वे भ्रातृत्वमय वार्ता का मार्ग, जिसका चुनाव उन्होंने किया है उस पर बनें रहें। 

पिता के अनंत शब्द अमेरीकी महादेश में आशा का स्रोत बनें विशेष रूप से कोरोना महामारी के इस काल में जिसके द्वारा लाखों की संख्या में जनसामान्य लोग प्रभावित हैं जिसे मादक पदार्थों की तस्करी और भ्रष्टचार की निरंतरता ने और भी बदहाल बना दिया है। वे चीली में व्याप्त वर्तमान सामाजिक तनाव और वेनेजुएला निवासियों के दुःखों को दूर करने में मदद करें।

स्वर्ग के राजा दक्षिणी पूर्वी एशिया के लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाये रखें विशेषकर फिलीपीन्स और वियतनाम के निवासियों को जिन्होंने असंख्य तूफानों के कारण, बाढ़ से अपने को जूझता पाया है। बाढ़ ने परिवारों, जन जीवन को आपार क्षति पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव डाले हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि एशिय़ा की याद करते हुए मैं रोहिंगाई लोगों को नहीं भूल सकता हूँ, येसु जो गरीबों के बीच गरीब की तरह जन्म लिये, उनके विपत्ति भरे जीवन में उनकी आशा बनें।

दुःख-दर्द अंतिम शब्द नहीं

उन्होंने सभों का संबोधन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, “हमारे लिए एक बालक का जन्म हुआ है”। वे हमें बचाने आते हैं। वे हमें कहते हैं कि दुःख-दर्द और बुराई हमारे लिए अंतिम शब्द नहीं हैं। हिंसा और अन्याय के बीच अपने जीवन से हार मानना ख्रीस्त जयंती की खुशी और आशा को अपने बीच से खारिज करना है।

पर्व के इस दिन, मैं उन लोगों की विशेष रुप से याद करता हूँ जो अपनी विषमताओं के मध्य भी अपने जीवन से हार नहीं मानते लेकिन इसे बदले कार्य करते हैं जिससे आशा, आराम और सहायता उन लोगों को प्राप्त हो सके जो दुःख सहते हैं और जो अकेले में जीवनयापन करते हैं।

ख्रीस्त जयंती जीवन और विश्वास का उद्गम बनें

येसु ख्रीस्त ने एक गौशाले में जन्म लिया लेकिन कुंवारी मरियम और योसेफ ने प्रेम में उनका आलिंगन किया। अपने शरीरधारण के द्वारा ईश पुत्र ने पारिवारिक प्रेममय जीवन को पवित्र किया है। संत पापा ने कहा कि इस समय मैं उन परिवारों के बारे में सोचता हूँ जो आज एक साथ मिल नहीं सकते हैं और वे जो परिवारों में अकेले रहने को बाध्य हैं। ख्रीस्त जयंती का यह समय हम सबों के लिए एक अवसर बनें जहाँ हम परिवार को अपने जीवन और विश्वास के उद्गम स्थल स्वरुप पुनः देख सकें, वह स्थान जहाँ हम स्वीकारे और प्रेम किये जाते हैं, जहाँ हम वार्ता करते, क्षमा करते, भ्रातृत्वमय एकता और खुशी को आपस में बांटते हैं, जो पूरी मानवता हेतु शांति का एक स्रोत है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्व के नाम अपने संदेश का समापन किया और देवदूत प्रार्थना का पाठ करते हुए विश्व को ख्रीस्त जंयती का विशेष प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

अपने प्रेरितिक आशीर्वाद के उपरांत संत पापा ने कहा, प्रिय भाइयो और बहनों, मैं रेडियो, दूरदर्शन और संचार के अन्य माध्यमों से, आप सभों को ख्रीस्त जयंती की शुभकामनाएँ देता हूँ। इस दिन को खुशी से भरने हेतु आपकी आध्यात्मिक उपस्थिति के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। इन दिनों, ख्रीस्त जयंती का माहौल हमें बेहतर और अधिक भ्रातृमय बनने के लिए आमंत्रित करता है, आइए हम उन परिवारों और समुदायों के लिए प्रार्थना करना न भूलें जो अति कष्ट की स्थिति में हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा अपने लिए प्रार्थना का आग्रह करते हुए पुनः सभों को ख्रीस्त जयंती की मंगलकामनाएं अर्पित कीं।

 

 

 

25 December 2020, 15:04