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संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में  निर्मित इस वर्ष की चरनी संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में निर्मित इस वर्ष की चरनी  (ANSA)

कलाकार कला द्वारा "सत्य व सौंदर्य" का संचार करते हैं,संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने इस वर्ष के क्रिसमस संगीत कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों के साथ मुलाकात की। उन्होंने कलाकारों को बताया कि से महामारी के इस कठिन समय में विशेष रुप कला की सुंदरता, आशा, सद्भाव और शांति को प्रेरित कर सकती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार12 दिसम्बर 2020 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 12 दिसम्बर को संत पापा पॉल छठे सभागार में क्रिसमस संगीत कार्यक्रम के कलाकारों से मुलाकात की। संत पापा ने उनका स्वागत करते हुए कहा, ʺइस साल, कुछ मंद क्रिसमस रोशनी, हमें महामारी से पीड़ित सभी लोगों को ध्यान में रखने और उनके लिए प्रार्थना करने हेतु आमंत्रित करती है। इस स्थिति में, हम और भी अधिक गहराई रूप से महसूस करने लगे हैं कि हम एक दूसरे पर कितने निर्भर हैं। हमारी सभा आज मुझे अपने इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण में कला और इसकी भूमिका पर कुछ विचार साझा करने का मौका देती है।ʺ

तीन तरह के संचार

हम तीन "संचार" के संदर्भ में कलात्मक निर्माण की बात कर सकते हैं। पहले संचार को इंद्रियों के साथ करना पड़ता है, जो आश्चर्य और विस्मय के साथ प्रकट किया जाता है। यह प्रारंभिक, बाहरी संचार फिर अधिक गहराई से दूसरों की ओर जाता है।

एक दूसरा संचार हमारे दिल और आत्मा की गहराई को छूता है। रंगों, शब्दों या ध्वनियों की एक रचना हमारे भीतर यादों, छवियों और भावनाओं को जगाने की शक्ति रखती है ...

फिर भी कलात्मक सृजन यहीं नहीं रुकता। एक तीसरा संचार है, जो सौंदर्य की धारणा, चिंतन और आशा की भावना उत्पन्न करता है और हमारी दुनिया को रोशन कर सकता है। बाहरी और आंतरिक संचार का विलय होता है और बदले में हमारे आसपास के लोगों के साथ हमारे संबंध को प्रभावित करता है। वे सहानुभूति और दूसरों को समझने की क्षमता उत्पन्न करते हैं। हम उनके साथ जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, एक संबंध अब अस्पष्ट नहीं, लेकिन वास्तविक और ठोस है। इसे साझा किया जा सकता है।

सद्भाव, सुंदरता और अच्छाई

आश्चर्य, व्यक्तिगत खोज और साझा करने का यह तिहरा संचार शांति की भावना पैदा करता है - जैसा कि संत फ्रांसिस हमें सिखाते हैं, - हमें दूसरों पर हावी होने की इच्छा से मुक्त करता है, हमें उनकी कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील बनाता है और हमें सभी के साथ सद्भाव में रहने के लिए प्रेरित करता है। सद्भाव सुंदरता और अच्छाई के साथ गहराई से जुड़ा रहता है।

संत पापा ने यहूदी और ईसाई परंपरा के रचनात्मक कार्य बारे जोर देते हुए कहा कि उत्पत्तिग्रंथ में हम पाते हैं कि ईश्वर ने अपनी रचना को देखा और उसे ‘अच्छा’ लगा। (उत्पत्ति 1: 12.18.25)। हिब्रू में, "अच्छा" शब्द के अर्थ की एक विस्तृत श्रृंखला है और इसे "सामंजस्यपूर्ण" के रूप में भी अनुवाद किया जा सकता है। रचना अपनी भव्यता और विविधता से हमें आश्चर्यचकित करती है, जबकि एक ही समय में हमें यह एहसास कराती है, कि उस भव्यता के सामने, दुनिया में हमारा अपना स्थान है।

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने लिखा है कि कलाकार "अपने आप में एक प्रकार की दिव्य चिंगारी का अनुभव करते हैं, यही कलाकारों की बुलाहट है" और उन्हें "इस प्रतिभा को और विकसित करना चाहिए, ताकि इसे अपने पड़ोसी और समग्र रूप से मानवता की सेवा में लगाया जा सके।”

सुंदरता के संरक्षक

8 दिसंबर 1965 को द्वितीय वाटिकन महासभा के समापन पर, कलाकारों के अपने संदेश में, संत पापा पॉल छठे ने उन्हें "सुंदरता के साथ प्यार" करने वालों रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा, कि हमारी दुनिया को "निराशा से उबरने के लिए सौंदर्य की आवश्यकता है।" महामारी से परेशान तथा चिंता के बीच, आपकी रचनात्मक कला प्रकाश का स्रोत बन सकती है। इस संकट ने ''घने बादलों की बंद दुनिया में'' और भी घना बना दिया है और यह दिव्य प्रकाश को भी धुँधला बना सकता है। हम उस भ्रम से उपर उठें, क्रिसमस के प्रकाश की तलाश करें, जो दुख और दर्द के अंधेरे को दूर करता है।

संत पापा ने कहा कि वे  विशेष रुप से "दुनिया में सुंदरता के संरक्षक" हैं। संत पापा ने उनकी एकजुटता की भावना के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, तथा मानव हृदय में सच्चाई और सुंदरता को प्रसारित करने हेतु प्रेरित किया जो पीढ़ियों को एकजुट करता है और उन्हें आश्चर्य की भावना में साझा करता है।"

अंत में संत पापा ने डॉन बोस्को मिशनों और स्कोलास ओकुरेंतेस की सेवा की प्रतिबद्धता के प्रति अपना आभार प्रकट किया जो, शिक्षा पर विश्वस्तरीय समझौते द्वारा अपनी परियोजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य आपातकाल में भी शैक्षिक कार्यों को जारी रखे हुए हैं।

12 December 2020, 14:02