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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

देवदूत प्रार्थना ˸ विनम्र सेवा के द्वार से ईश्वर के राज्य में प्रवेश

ख्रीस्त राजा महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस से विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिये गये संदेश में उन्होंने अंतिम न्याय पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 नवम्बर 2020 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रविवार 22 नवम्बर को, ख्रीस्त राजा महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस से विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।"

आज हम विश्व के महाराजा हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त का महापर्व मना रहे हैं, जिसके साथ पूजन पद्धति वर्ष समाप्त होता है, महान दृष्टांत में पूरे साल की धर्मविधि में ख्रीस्त का रहस्य प्रकट होता है। वे इतिहास के आदी और अंत हैं, आरम्भ और पूर्णता है, और आज की धर्मविधि अंतिम पर ध्यान केंद्रित करती है, अर्थात् अंतिम लक्ष्य पर। इतिहास के अर्थ को इसकी चरमसीमा को अपने सामने रखकर समझा जा सकता है। इसी को मती इस रविवार के सुसमाचार पाठ में रखते हैं (25,31-46) पृथ्वी पर उनके जीवन के आखरी समय में, अंतिम न्याय के दिन पर येसु के भाषण को प्रस्तुत करते हैं : उनको जिन्हें लोग दण्ड देंगे, वे वास्तव में सर्वोच्च न्यायकर्ता हैं। अपनी मृत्यु और पुनरूत्थान में, येसु इतिहास के प्रभु को दिखायेंगे, ब्रह्माण के राजा को, सभी के न्यायकर्ता को, किन्तु ख्रीस्तीय विरोधाभास है कि न्यायधीश एक क्रूर शासक नहीं, बल्कि एक चरवाहा हैं नम्रता और दया से पूर्ण। 

अंतिम न्याय के में, चरवाहे की छवि

येसु, वास्तव में, अंतिम न्याय के इस दृष्टांत में, चरवाहे की छवि प्रस्तुत करते हैं। नबी एजेकिएल की छवि को लेते हैं, जिसमें उन्होंने लोगों के हित में इस्राएल के बुरे चरवाहों के खिलाफ ईश्वर के हस्ताक्षेप पर भविष्यवाणी की थी। (34,1-10) वे क्रूर थे, भेड़ों को खिलाने के बदले वे खुद को भरना पसंद करते थे, इसीलिए स्वयं ईश्वर अपने भेड़ों की देखभाल, अन्याय और शोषण से उनकी रक्षा करते हुए करने की प्रतिज्ञा करते हैं।  अपनी प्रजा के लिए ईश्वर की यह प्रतिज्ञा, येसु ख्रीस्त में पूरा होता है, वे ही भले चरवाहे हैं। जो स्वयं कहते हैं, "मैं भला चरवाहा हूँ।" (यो 10,11.14).

येसु एक शाही चरवाहे और खोये हुए भेड़ में

आज के सुसमाचार पाठ में, येसु अपने आपको प्रस्तुत करते हैं न केवल शाही चरवाहे के रूप में बल्कि खोये हुए भेड़ों के साथ भी। हम उसे दोहरी पहचान कह सकते हैं, राजा चरवाहा येसु, अपने को भेड़ों के साथ रखते हैं,  अर्थात् सबसे निम्न और जरूरतमंद भाई-बहनों के साथ। और न्याय के मापदण्ड का संकेत देते हैं, जो उन लोगों को ठोस प्रेम से देने अथवा इन्कार करने के आधार पर किया जाएगा क्योंकि वे स्वयं, न्यायकर्ता, उन सभी में उपस्थित हैं। वे न्यायकर्ता हैं, ईश-मानव हैं किन्तु वे गरीब भी हैं, छिपे हुए हैं, वे गरीब व्यक्ति में उपस्थित हैं जिसका जिक्र यहाँ है। येसु कहते हैं : मैं तुम लोगों से कहता हूँ, "तुमने मेरे इन भाइयो में से किसी एक के लिए चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, जो कुछ किया वह मेरे लिए किया।" (40-45) प्रेम के आधार पर हमारा न्याय किया जायेगा,  भावना के आधार पर नहीं, कार्यों के आधार पर, करुणा के आधार पर, जिसको सामीप्य एवं देखभाल के द्वारा प्रकट किया जाता है। 

क्या मैं अपने आपको बीमार, गरीब, पीड़ित, कैदी व्यक्ति में अथवा न्याय के भूखे और प्यासे लोगों में येसु के करीब लाता हूँ? उनमें उपस्थित येसु के पास आता हूँ? यही आज का सवाल है।

इसलिए, प्रभु दुनिया के अंत में, अपनी भेड़ों की समीक्षा करेंगे, और वे ऐसा न केवल चरवाहे की ओर बल्कि भेड़ों की ओर से भी करें जिनके रूप में उन्होंने अपने आप को प्रकट किया। और वे पूछेंगे : क्या आप मेरे समान चरवाहे रहे?

प्रेम के आधार पर न्याय

क्या तुम मेरे चरवाहे रहे जब मैं जरूरतमंद व्यक्ति में उपस्थित था अथवा उदासीन हो गये? हम उदासीनता के तर्क से देखें, दिमाग में क्या विचार आता है, जब किसी समस्या को देखते हैं, तो दूसरी ओर देख लेते हैं। भले समारी के दृष्टांत की याद करें। वह बेचारा व्यक्ति लुटेरों के द्वारा घायल, जमीन पर पड़ा, जीवन और मृत्यु के बीच, वहाँ अकेला था। वहाँ से एक याजक गुजरा, उसे देखा और पार हो गया, वह दूसरी ओर देखते हुए चला गया। एक लेवी भी गुजरा, उसे देखकर मूँह फेर लिया। संत पापा ने कहा, "मैं, अपने भाई बहनों के सामने जरूरत में, क्या उन याजक और लेवी के समान देखता और मूँह फेर लेता हूँ? इसी के आधार पर मेरा न्याय क्या जाएगा कि मैं जरूरतमंद लोगों में उपस्थित येसु को देख पाता हूँ। यही तर्क हैं। येसु कहते हैं, जो तुमने उनके लिये किया वह मेरे लिए किया और जो तुमने उनके लिए नहीं किया वह तुमने मेरे लिए नहीं किया क्योंकि मैं वहाँ था। येसु इस तर्क को सिखलाते हैं जो पड़ोसी का तर्क है, उनके नजदीक होने, प्रेम से उनके पास आने के लिए जो अधिक पीड़ित हैं।"   

माता मरियम के प्रार्थना

माता मरियम से प्रार्थना करें कि वे हमें सेवा में शासन करना सिखलाये। मरियम स्वर्ग में उदगृहित की गईं, अपने पुत्र से राजमुकुट प्राप्त किया क्योंकि उन्होंने निष्ठापूर्वक उनका अनुसरण किया। वे प्रेम के रास्ते पर चलनेवाली पहली शिष्य हैं आइये, हम अभी उनसे ईश्वर के राज्य में प्रवेश करना सीखें, विनम्र और उदार सेवा के रास्ते से। और इस वाक्य के साथ घर लौटें ˸ "मैं वहाँ उपस्थित था, धन्यवाद ! अथवा, तुम मुझे भूल गये।"   

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

23 November 2020, 14:21