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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

प्रेम का जीवन हमें प्रभु से अंतिम मुलाकात हेतु तैयार करता, पोप

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा 10 कुँवारियों के दृष्टांत पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 9 नवम्बर 20 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 8 नवम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती. 25, 1-13) अनन्त जीवन पर चिंतन को विस्तृत करने का निमंत्रण देता है जिसकी शुरूआत सब संतों के पर्व एवं मृत विश्वासियों की यादगारी के दिन हुई थी। येसु विवाह भोज में निमंत्रित 10 कुँवारियों का दृष्टांत सुनाते हैं जो स्वर्ग राज का प्रतीक है।

येसु के समय में रात के पहर विवाह उत्सव मनाने की परम्परा थी, इसलिए अतिथियों को जलती मशालों के साथ आगवानी करना पड़ता था।

10 कुंवारियों का दृष्टांत

दृष्टांत में हम सुनते हैं कि कुछ कुंवारियाँ मूर्ख थीं : वे अपने साथ मशाले ले गईं किन्तु तेल नहीं ली थीं। जबकि समझदार कुँवारियाँ अपनी मशालों के साथ तेल भी ली थीं। जब दुल्हा आने में देरी करने लगा तब वे ऊँघने लगीं और सो गईं। आधी रात को आवाज आयी देखो दुल्हा आ रहा है तब नासमझ कुँवारियों को पता चला कि उनकी मशालों में तेल नहीं था। उन्होंने समझदार कुँवारियों से कहा, "अपने तेल में से थोड़ा हमें भी दे दो।" तब समझदारों ने उत्तर दिया, "क्या जाने, कहीं हमारे और तुम्हारे लिए तेल पूरा न हो। अच्छा हो तुमलोग दुकान जाकर अपने लिए खरीद लो।" वे तेल खरीदने गईं थीं कि दुल्हा आ पहुँचा। जो तैयार थीं उन्होंने उनके साथ विवाह भवन में प्रवेश किया और द्वार बंद हो गया। बाद में शेष कुँवारियाँ भी आयीं किन्तु वे अस्वीकार कर दी गईं।

विश्वास प्रेम के द्वारा कार्य करता है

संत पापा ने कहा, "यह स्पष्ट है कि इस दृष्टांत के द्वारा येसु हमें बतलाना चाहते हैं कि हमें उनके साथ मुलाकात के लिए तैयार होना चाहिए। चूँकि विश्वास की मशाल पर्याप्त नहीं है, परोपकार एवं अच्छे कार्यों के तेल की भी आवश्यकता है। विश्वास जो सचमुच हमें येसु में एक साथ लाता है जैसा कि प्रेरित पौलुस कहते हैं, "प्रेम से अनुप्राणित है।" (गला. 5: 6) समझदार कुंवारियों ने यहीं मनोभाव प्रस्तुत किया।

संत पापा ने कहा, "समझदार और बुद्धिमान होने का अर्थ है ईश्वर की कृपा को ग्रहण करने के लिए अंतिम क्षण तक रूके नहीं रहना, बल्कि करते जाना, अभी से ही शुरू करना, अभी ही मन-परिवर्तन करना, आज ही अपना जीवन बदल लेना। कल बोल कर टालने से यह कभी नहीं होगा। यदि हम प्रभु से अंतिम मुलाकात के लिए तैयार होना चाहते हैं हमें अभी से सहयोग करना होगा एवं उनके प्रेम से प्रेरित होकर भले कार्यों को करते रहना होगा।

जीवन का अंतिम लक्ष्य

हम जानते हैं कि अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने जीवन के लक्ष्य, ईश्वर से साक्षात् मुलाकात को भूल जाते हैं, इस प्रकार हम प्रतीक्षा करना छोड़ देते और वर्तमान को ही पूर्णता मान लेते हैं। संत पापा ने कहा कि यदि कोई वर्तमान को पूर्णता समझ लेता, सिर्फ वर्तमान को देखता है तो वह उस चीज की उम्मीद खो देता है जो कि अत्यन्त सुन्दर और आवश्यक है एवं अपने को समय के विपरीत कर लेता है। यह मनोभाव जिसमें हम प्रतीक्षा करना छोड़ देते, परे देखना बंद कर देते, तब हम सब कुछ में इस तरह व्यवहार करेंगे कि हमें दूसरे जीवन को प्राप्त करना नहीं है। तब हमारी चिंता केवल अधिकार करने, प्रगति करने और आबाद होने आदि तक सीमित होगी। यदि हम अपने आपको सबसे आकर्षक और अपनी रूचि की ओर प्रेरित होने देंगे तो हमारा जीवन बंजर बन जायेगा। हम अपनी मशाल के लिये तेल जमा नहीं कर पायेंगे और जब प्रभु के साथ हमारी मुलाकात होगी तब हमारी मशाल बुझी होगी। संत पापा ने कहा, "हमें आज को जीना है किन्तु ऐसा जीना है कि कल की ओर बढ़ सकें। उस मुलाकात की ओर, जो आज आशा से भरी है। दूसरी ओर यदि हम जागे हुए हैं और ईश्वर की कृपा से अच्छे कार्य करते हैं तब हम शांत होकर दुल्हे के आगमन का इंतजार करेंगे। प्रभु यदि उस समय भी आयें जब हम नींद में हों, तब भी हम परेशान नहीं होंगे क्योंकि हमारे पास प्रतिदिन के भले कार्यों का पर्याप्त तेल होगा।

माता मरियम से सहायता

प्रभु की इसी उम्मीद के साथ कि वे जल्दी ही आयेंगे और हमें अपने साथ ले जायें, हम अति पवित्र माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करें कि वे हमें उसी तरह जीने में मदद दें जिस तरह उन्होंने विश्वास को सक्रिय रूप में जीया। वे एक जगमगाती रोशनी हैं जिनसे होकर हम मृत्यु के अंधकार को पार कर सकते हैं तथा जीवन के महोत्सव तक पहुँच सकते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।  

शहीद जॉन रोईग वाई डिग्ल की धन्य घोषणा

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न घटनाओं का स्मरण किया। बरसेलोना में शनिवार को शहीद जॉन रोईग वाई डिग्ल की धन्य घोषणा की गई जो एक लोकधर्मी थे जिनको स्पानी नागरिक युद्ध के दौरान 19 साल की उम्र में शहीद होना पड़ा था। संत पापा ने उनके बारे बतलाते हुए कहा, "वे अपने कार्य स्थल में येसु के साक्षी थे और अपनी जान गवाँने तक निष्ठावान बने रहे। उनका यह उदाहरण सभी को प्रेरित करे, विशेषकर, युवाओं में ख्रीस्तीय बुलाहट को पूर्णता से जीने की चाह उत्पन्न करे। संत पापा ने विश्वासी समुदाय के साथ ताली बजाकर उन्हें सम्मानित किया।

इथोपिया के लिए प्रार्थना

तत्पश्चात् संत पापा ने इथोपिया में हिंसा की वृद्धि पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों से अपील की कि वे सशस्त्र संघर्ष के प्रलोभन में न पड़ें। उन्होंने कहा, "मैं सभी से प्रार्थना करने और भाईचारा पूर्ण सम्मान, वार्ता और विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने का आह्वान करता हूँ।"

संत पापा का यह आह्वान संयुक्त राष्ट की उस चेतावनी के बाद आया है जिसमें कहा गया है कि इथोपिया के तीग्र प्रांत में बढ़ते संघर्ष के कारण 9 मिलियन लोग विस्थापन के खतरे में हैं। यूएन के पर्यावेक्षक ने यह भी कहा है कि सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा से भोजन और अन्य सहायताएँ अवरुद्ध थीं।

लीबया के लिए संत पापा का आह्वान

तब संत पापा ने लीबया की स्थिरता की तलाश पर गौर की जिसके लिए लीबिया की राजधानी टयूनिश में लीबया राजनीतिक संवाद मंच की पहली सभा हो रही है, जिसमें सभी दलों के सदस्य उपस्थित होंगे।

संत पापा ने मंच को एक महत्वपूर्ण अवसर मानते हुए कहा, "मैं ईमानदारी पूर्वक आशा करता हूँ कि इस जटिल समय में, लीबिया के लोगों की लंबी पीड़ा का हल निकाला जा सकेगा।" उन्होंने मंच के प्रतिनिधियों एवं लीबया में शांति और स्थिरता के लिए प्रार्थना की है।

इसके बाद, संत पापा ने रोमवासियों तथा विभिन्न देशों के तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया, खासकर,  उन्होंने पल्ली दलों, संगठनों एवं प्रत्येक विश्वासी का अभिवादन किया।

अंत में, उन्होंने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।

09 November 2020, 14:09