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इटली  के सिसली द्वीप पर शरणार्थी, तस्वीरः 19.06.2019 इटली के सिसली द्वीप पर शरणार्थी, तस्वीरः 19.06.2019  ( AFP or licensors)

अन्याय, हिंसा एवं युद्ध से भागे शरणार्थियों की सुरक्षा का आह्वान

रोम स्थित येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा की 40 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक धर्मानुयायियों से आग्रह किया है कि वे अन्याय, हिंसा एवं युद्ध से भागनेवाले शरणार्थियों की सुरक्षा का हर सम्भव प्रयास करें।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 13 नवम्बर 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): रोम स्थित येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा की 40 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक धर्मानुयायियों से आग्रह किया है कि वे अन्याय, हिंसा एवं युद्ध से भागनेवाले शरणार्थियों की सुरक्षा का हर सम्भव प्रयास करें।  

सब मानव प्राणी एक समान

येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा की वेब साईट पर 12 नवम्बर को प्रकाशित एक सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा कि कोरोना वाईसर महामारी ने यह दर्शा दिया है कि सभी मानव प्राणी एक ही समान हैं और सभी एक ही स्तर पर हैं।  

शरणार्थी सेवा के अन्तराराष्ट्रीय निर्देशक येसु धर्मसमाजी पुरोहित फादर थॉमस स्मोलिख को प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, "वास्तव में, वर्तमान विश्व में बहुत सारे लोग अन्याय, हिंसा और युद्ध के वायरस से पलायन के प्रयास में तरापों एवं डोंगियों से चिपके रहने के लिए मजबूर हैं।"

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि येसुधर्मसमाजी शरणार्थी सेवा सन् 1980 में फादर पेद्रो आरूपे द्वारा स्थापित की गई थी, जो 1965 से 1983 तक जेसूइट धर्मसमाज के प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि वियतनाम युद्ध के उपरान्त हज़ारों वियतनामी शरणार्थियों की व्यथा को देखकर फादर आरूपे आहत हुए और उन्होंने उक्त शरणार्थी सेवा की स्थापना की थी, जो आज विश्व के 56 देशों में शरणार्थियों को शरण प्रदान कर उन्हें प्रतिष्ठापूर्ण जीवन प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।

शरणार्थी सेवा की भूमिका

शरणार्थी सेवा के अन्तराराष्ट्रीय निर्देशक फादर थॉमस स्मोलिख को सम्बोधित पत्र में सन्त पापा ने लिखा कि आज पहले से कहीं अधिक शरणार्थियों की सुरक्षा की आवश्यकता है और येसु धर्मसमाज इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य रहा है। उन्होंने कहा, "गंभीर असमानताओं के समक्ष, बलात विस्थापित हुए लोगों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाने में येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।"

उन्होंने कहा कि जो लोग अकेले हैं, अपने परिवारों से अलग होने के लिये मजबूर हैं तथा परित्यक्त हैं उनकी आवाज़ बनना एक नेक काम है जिसे येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा ने अपने शिक्षा एवं विकास कार्यक्रमों द्वारा बखूबी निभाया है।  

सन् 1980 से विश्व के विभिन्न देशों में सेवारत येसु धर्मसमाजी शरणार्थी सेवा आज,  अपने अंतरराष्ट्रीय कार्यालय के माध्यम से, दुनिया भर में लगभग 680,000 विस्थापितों एवं शरणार्थियों को शरण प्रदान कर रहा है।

13 November 2020, 11:27