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पस्योनिस्ट्स धर्मसमाज के संस्थापक क्रूस के संत  पौल पस्योनिस्ट्स धर्मसमाज के संस्थापक क्रूस के संत पौल 

पस्योनिस्ट्स: प्रेम व कृतज्ञता के भाव से अपने मिशन को नवीकृत करें

संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्त के दुःखभोग (पस्योनिस्ट) धर्मसमाज की स्थापना की 300वीं वर्षगाँठ पर एक संदेश भेजा तथा आग्रह किया कि वे कृतज्ञता, भविष्यवाणी और आशा पर ध्यान देते हुए अपने कारिज्म एवं मिशन को नवीकृत करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 नवम्बर 2020 (रेई)- येसु ख्रीस्त के दुःखभोग को समर्पित धर्मसमाज जिसको पस्योनिस्ट्स के रूप में भी जाना जाता है, इसकी स्थापना इटली के क्रूस के संत पौल ने 21 नवम्बर 1720 को की थी।

जब धर्मसमाज अपनी तीसरी शतवर्षीय जयन्ती मना रहा है संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को सुपीरियर जेनेरल फादर ज्वाकिम रेगो सी.पी. के नाम एक संदेश भेजा।

नये प्रेरितिक लक्ष्य

अपने कारिज्म को जीने पर चिंतन करते और ख्रीस्त के दुःखभोग की स्मृति की घोषणा करते हुए संत पापा ने पस्योनिस्ट्स से अपील की कि वे नये प्रेरितिक लक्ष्य की ओर अपने मिशन को आगे बढ़ायें।

उन्होंने कहा कि मानवता बदलाव की कुंडली को महसूस कर रहा है जो अपने अस्तित्व के अंतरण निर्माण पर एक सवाल करती है।  

उन्होंने कहा, "आप भी एक नयी जीवनशैली और एक तरह की भाषा को पहचानने के लिए बुलाये गये हैं कि आप क्रूसित येसु के प्रेम की घोषणा कर सकें। इस प्रकार आप अपनी पहचान के केंद्र का साक्ष्य दे सकते हैं।"

कृतज्ञता एवं भविष्य

संत पापा ने पस्योनिस्टों को प्रोत्साहन दिया है कि वे अपनी उस प्रतिबद्धता को लागू करें जिसको उन्होंने हाल में आयोजित महासभा में अपने मिशन को नवीकृत करने के लिए लिया था, अर्थात् कृतज्ञता, भविष्यवाणी और आशा।

संत पापा ने कहा, "कृतज्ञता- अतीत के अनुभवों को धन्यवादी हृदय से याद करना और भविष्य की ओर यूखरिस्तीय मनोभाव के साथ आगे बढ़ना।"

उन्होंने कहा, "पस्योनिस्ट अपनी खुशी और पूर्णता मनन-चिंतन एवं क्रूस पर ख्रीस्त के बहते प्रेम की घोषणा करने में प्राप्त कर सकते हैं।"

भविष्यवाणी वर्तमान की परिस्थिति अनुसार

संत पापा ने कहा कि भविष्यवाणी के आयाम का अर्थ है, पवित्र आत्मा के संचालन में सोचना और बोलना। यह उन लोगों के लिए संभव है जो प्रार्थना को आत्मा की प्राण वायु मानते हैं और अपने हृदय की गहराई में एवं सारी सृष्टि में आत्मा की क्रियाशीलता को महसूस कर सकते हैं।

इस तरह से जीना, सुनिश्चित करता है कि वचन जिसका वे प्रचार करते हैं वह हमेशा वर्तमान समय की आवश्यकता के लिए अपनाया गया है।

आत्मा में आशा

संत पापा ने कहा कि आशा का सदगुण पस्योनिस्टों को प्रेरित करता है वे अपने धार्मिक और पल्ली समुदाय में आत्मा के जारी सृजन कार्यों को देखें चाहे उनकी संख्या क्यों न घट रही हो। "आशा का अर्थ है अभाव के लिए शिकायत नहीं करना बल्कि जो है उससे खुश रहना।"

मानवता की आवश्यकता

संस्थापक क्रूस के संत पौल की याद करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने पस्योनिस्टों को प्रोत्साहन दिया कि वे अपनी प्रेरिताई के द्वारा "दुनिया में आग प्रज्वलित करें"। मानवता की आवश्यकता के प्रति अपने समर्पण में उन्हें कभी नहीं थकना चाहिए।

"यह मिशनरी बुलाहट, सबसे बढ़कर हमारे समय के क्रूसित – गरीब, कमजोर, शोषित और वंचित एवं विभिन्न प्रकार के न्याय से पीड़ित लोगों की ओर प्रेरित करती है।"

अपने मिशन को अच्छी तरह आगे ले चलने के लिए जरूरी है, अपनी ओर से आंतरिक नवीनीकरण करना जो प्रभु के साथ संबंध द्वारा बढ़ता है।  

वचन और कार्य

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में पस्योनिस्टों से अपील की कि वे प्रेम के ठोस कार्यों द्वारा ख्रीस्त के दुःखभोग की मौखिक घोषणा को मजबूत करें। "सिर्फ वे ही जो येसु की तरह क्रूस पर प्रेम के लिए क्रूसित होते हैं, क्रूसित इतिहास को प्रभावशाली  वचनों और कर्मों द्वारा मदद कर सकते हैं।"

19 November 2020, 16:03