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लातीनी अमरीका के रोम में अध्ययनरत सेमिनरी छात्रों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस लातीनी अमरीका के रोम में अध्ययनरत सेमिनरी छात्रों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

लातीनी अमरीकी गुरूकुल छात्रों को संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने रोम में परमधर्मपीठीय लातीनी अमरीकी समुदाय के 50 सदस्यों से शुक्रवार को वाटिकन में मुलाकात की तथा उन्हें स्मरण दिलाया कि उनकी संस्कृति ने ख्रीस्तीय समुदाय एवं पूरे विश्व के लिए समृद्धि लायी और भविष्य में भी ला सकती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 नवम्बर 2020 (रेई)- संत पापा ने परमधर्मपीठीय लातीनी अमरीकी समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा, "यद्यपि इतिहास ने हमारे लोगों को अलग किया है, इसने मूल को नष्ट नहीं किया है जो उन्हें अमरीका में सुसमाचार प्रचार के महान कार्य के लिए एकजुट किया है।" उन्होंने कहा कि इसी आधार पर समुदाय (कॉलेजो) की स्थापना हुई थी, "एक समर्पण के रूप में, जो हमारी स्थानीय कलीसियाओं को एकता के सूत्र में बांधती है एवं इसे रोम शहर में विश्वव्यापी कलीसिया के लिए खोलती है।    

दूसरों के लिए अपना हृदय खोलें

संत पापा ने गौर किया कि एकता का यह खास अनुभव और खुलापन एक बड़ी चुनौती है जबकि यह "विश्व को चंगा" होने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, सुसमाचार का संदेश हमारी भूमि में मनुष्यों के द्वारा आया और इस महाद्वीप के चारों ओर फैल गया। यह एक चमत्कार है जो संभव हुआ क्योंकि सुसमाचार लानेवाले और उसे ग्रहण करनेवाले, दोनों एक-दूसरे के लिए अपना हृदय खोल पाये।

 वैश्विक सम्पन्नता

संत पापा ने याद किया कि विश्व में लातीनी अमरीकी उपस्थिति ने विश्वव्यापी स्तर पर ख्रीस्तीय समुदाय को बहुत बड़ा योगदान दिया है, उत्तरी से मध्य और पूर्वी यूरोप के समुदायों ने उनमें एक नई जीवन शक्ति और एक नवीनीकृत प्रेरणा पायी है। उन्होंने इसके लिए ख्रीस्त के चमत्कार और ग्वादालूपे की माता मरियम के उत्सव का उदाहरण दिया। मिश्रित समृद्ध संस्कृति जिसने सुसमाचार प्रचार को संभव बनाया, वह आज भी जारी है। लातीनी लोग आपस में मिलते हैं और दूसरों से भी मिल सकते हैं और इस मुलाकात के द्वारा वे समृद्ध हो रहे हैं।

संत पापा ने सेमिनरी के छात्रों से कहा, "यही आपका प्रशिक्षण होना चाहिए, वचन को उदारता पूर्वक बोना, जैसे ईश्वर बोते हैं।" कार्य के तीन ठोस बिन्दु हैं – अपने हृदय का द्वार खोलना तथा उनका जो आपको सुनते हैं, और सभी की भलाई के लिए अपने साथ दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करना, बुराइयों से भरे समाज को चंगा करना, जो इसे पीड़ित करती, जिसको महामारी ने उजागर किया है। इन सभी की दो गतिविधियाँ हैं- व्यक्तिगत एवं सामुदयिक जो हमेशा एक-दूसरे से जुड़े हैं।

अपने रेवड़ का मार्गदर्शन करें

संत पापा ने कहा, "चरवाहा बनें, निश्चय ही आपके दिमाग में असंख्या पहल हैं और निश्चय ही, कठिन परिश्रम करने के द्वारा आप बहुत अच्छे काम कर सकते हैं और अनेक लोगों की मदद कर सकते हैं लेकिन हमारा मिशन पूर्ण नहीं हो सकता यदि हम उसी में ठहर जाते हैं। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे दरकिनार करने की संस्कृति, सामाजिक अलगाव, अविश्वास और जाति, धर्म एवं संस्कृति के कारण पूर्वाग्रह के खिलाफ संघर्ष करें जिससे कि हर प्रकार की पृथकता पर बंधुत्व की भावना प्रबल हो सके।"

विश्व को चंगा करें

संत पापा ने सलाह दी कि बड़ी बुराई जो विश्व को परेशान करती है उससे चंगाई पाने की जरूरत है।

"महामारी ने उस बड़ी बुराई के सामने हमारे समाज को रखा है जो उसे परेशान करती है। वैश्विकरण ने सीमाओं को पार किया है किन्तु मन और दिल को नहीं। वायरस सभी ओर फैल रहा है किन्तु हम एक साथ इसका सामना नहीं कर सकते। दुनिया अभी भी अपना दरवाजा बंद रखी है, वार्ता एवं सहयोग करने से इंकार करती है, अच्छाई हेतु आम प्रतिबद्धता के लिए खुला होना नहीं चाहती है।"  

संत पापा ने कहा कि इस बुराई की चंगाई नीचे से होना है जिसमें पोप भी शामिल हैं। इसको हृदय और आत्मा से निकलना है जिसको शिक्षा, धर्मशिक्षा, सामाजिक प्रतिबद्धता, मानसिकता की बदलने की क्षमता एवं स्थान खोलने के ठोस प्रस्ताव के रूप में सौंपा जा सकता है ताकि बुराई से चंगाई कर, लोगों को एक साथ ईश्वर को समर्पित किया जा सके।  

अंततः संत पापा ने प्रार्थना की कि ग्वादालुपे की धन्य कुँवारी मरियम जो लातीनी अमरिका की संरक्षिका हैं, विभिन्न प्रकार की अनिश्चितताओं के बीच आशा प्रदान करें ताकि हरेक सदस्य ईश्वर के बुलावे के अनुसार, मानव भाईचारा का साक्षी बन सके जो ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ होने के द्वारा उत्पन्न होता है।

21 November 2020, 13:41