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संत पापा फ्राँसिस उपदेश देते हुए संत पापा फ्राँसिस उपदेश देते हुए  (ANSA)

हम ईश्वर के सपनों को साकार करने हेतु बनाये गए हैं, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को ख्रीस्त राजा पर्व के अवसर पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित किया। अपने प्रवचन में संत पापा ने नौजवानों से कहा कि हम सभी "इस दुनिया में ईश्वर के सपनों को साकार करने के लिए" बनाये गये हैं।

संजय दिलीप एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार 22 नवम्बर 2020 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्त राजा पर्व के अवसर पर संत पेत्रुस के महागिरजाघर में पवित्र मिस्सा बलिदान का अनुष्ठान किया, जो हर साल काथलिक पंचाग के अनुसार अंतिम रविवार याने 34वें रविवार को मनाया जाता है।

करूणा के कार्य

संत पापा ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि हमने संत मत्ती के सुसमाचार से ख्रीस्त के दुःखभोग के ठीक पहले, क्रूस में अपने प्रेम को प्रवाहित करने के पूर्व उनके अंतिम विचारों को सुना। वे हमें कहते हैं कि अच्छाई जिसे हम अपने छोटे से छोटे भाइयों और बहनों के लिए चाहे वह भूखा या प्यासा, एक अपरिचित, जरुरतमंद, बीमार या जेल में बंद कैदी ही क्यों न हो करते तो यह हम उनके लिए करते हैं (मत्ती, 25:37-40)। ये उपहार करूणा के कार्य हैं जो हमारे लिए अनंत जीवन की सौगात लाते हैं। हमें हर कोई अपने में पूछा सकता है, क्या मैं इन कार्यों को करता हूँॽ क्या मैं किसी जरुरत में पड़े व्यक्ति के लिए कुछ करता हूँॽ या क्या मैं अपने उसे अपने प्रियजनों के लिए और अपने मित्रों के लिए करता हूँॽ क्या में उस व्यक्ति के लिए करता हूँ जो मुझे बदले में कुछ नहीं दे सकता हैॽ क्या मैं किसी गरीब व्यक्ति का मित्र हूँॽ “मैं वहाँ उपस्थित हूँ” येसु हम से कहते हैं, “मैं वहाँ तुम्हार इंतजार करता हूँ जहाँ तुम कभी सोच भी नहीं सकते, शायद उस ओर देखने का चाह भी नहीं रखते, वहाँ गरीबों के मध्य”। मैं वहाँ हूँ जहाँ कोई जाने का आशा नहीं रखता। येसु ख्रीस्त आप युवाओं से भी यही कहते हैं, जब आप अपने जीवन के सपनों को साकार करने की चाह रखते हैं।

मैं वहाँ हूँ। येसु ने अपने इस कथन को सालों पहले एक युवा सैनिक से कहा था। वह युवा अठारह साल का था जिसने बपतिस्मा ग्रहण नहीं किया था। एक दिन उस युवक ने एक गरीब व्यक्ति को भीख मांगते देखा लेकिन लोगों ने उसे कुछ नहीं दिया, “वे उसे बीच से गुजर गये”। लोगों को संवेदनहीन देख उस युवा को लगा कि वह गरीब व्यक्ति उसके लिए है। लेकिन उसके पास कुछ भी नहीं था सिवाय उसके परिधान के। उसने अपनी चादर को दो भागों में काटा और एक को उस गरीब व्यक्ति को दिया, जिसे देखकर बगल से गुजरने वाले कुछेक ने उसकी खिल्ली ऊड़ाई। दूसरे दिन उस युवक ने एक सपने में येसु को देखा, वे उस चादर के आधे भाग को धारण किये हुए थे जिसे उसने गरीब को लपेटा था। उसने येसु को कहते सुना, “मार्टिन तुमने मुझे इस चादर से ढ़का।” (सुलपीकुस सेभेरेयुस, भीता मार्तिनी, III) वह युवक संत मार्टिन था। उसने वह स्वपन देखा क्योंकि उसने अनजाने में ही आज के सुसमाचार अनुसार कार्य किया था।

ईश्वर के सपनों को साकार करना

प्रिय युवाओं, भाइयो और बहनों, हम अपने बड़े सपनों का परित्याग न करें। हम उन चीजों से संतुष्ट न हो हमारे लिए आवश्यक हैं। येसु ख्रीस्त नहीं चाहते कि हम अपने चाहतों की क्षितिज को सीमित करें या जीवन की चौराहों में ही खड़े रहें। वे हमें अपने जीवन की दौड़ को साहस के साथ पूरा करने और खुशी से अपने बड़े उद्देश्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं। हम अवकाश या सप्ताहांत हेतु बनाये नहीं गये, लेकिन दुनिया में ईश्वर की योजना पूरा करने हेतु बनाये गये हैं। ईश्वर ने हमें सपने देखने के योग्य बनाया है जिससे हम सुन्दर जीवन का आलिंगन कर सकें। करूणा के कार्य हमारे जीवन के सबसे सुन्दर कार्य हैं। यदि आप अपने जीवन में दुनियावी महिमा हेतु नहीं वरन सच्ची महिमा के सपने देखते हैं जो ईश्वर की महिमा है तो इस राह में चलने की जरुरत है। करूणा के कार्य किसी भी कार्य से अधिक ईश्वर की महिमा घोषित करते हैं।

हमारे चुनावों के अनुरूप हमारा न्य़ाय

हम इस बृहृद सपने को कैसे साकार करते हैंॽ अपने बड़े चुनावों के द्वारा जिसे आज का सुसमाचार भी हमारे लिए घोषित करता है। वास्तव में, अंतिम न्याय के समय ईश्वर हमारे चुनावों के अनुरूप हमारे न्य़ाय करेंगे। वे हमारा न्याय करते हुए दिखाई नहीं देते बल्कि मेमनों को बकरियों से अलग करते हैं, जो अच्छी और बुराई का प्रतीत हैं हमारे ऊपर निर्भर करता है। वे हमारे चुनाव के अनुरूप परिणमों को प्रकाश में लाते और उसका सम्मान करते हैं। जीवन हमारे लिए मजबूत, निर्णायक, अनंत चीजों को चुनने का समय है। तुच्छ चीजों का चुनाव हमारे जीवन को तुच्छ बना देता है वहीं महान चीजों का चुनाव हमें महानता प्रदान करती है। वास्तव में हम जिन चीजों का चुनाव करते हैं हम उसी के अनुरूप बेहतर या खराब बनते हैं। यदि हम चोरी करते तो चोर बनते हैं। यदि हम अपने बारे में सोचते तो हम अपने तक ही सीमित होकर रह जाते हैं। यदि हम घृणा करते हो हम क्रोधित होते हैं। यदि हम घण्टों फोन में समय व्यतीत करने का चुनाव करते तो हमें इसकी बुरा लत लग जाती है। यदि ईश्वर को चुनते हैं तो हम प्रतिदिन उनके प्रेम में विकास करते और दूसरों के प्रेम करने की चुनते तो हम सच्ची खुशी प्राप्त करते हैं। क्योंकि चुनाव की सुन्दरता प्रेम में निर्भर करती है। येसु ख्रीस्त जानते हैं कि यदि हम अपने में खोये और उदासीन रहते तो हम कोढ़ग्रस्त हो जाते हैं लेकिन जब हम स्वयं को दूसरों के लिए देते तो हम अपने में स्वतंत्र होते हैं। जीवनदाता येसु हमसे चाहते हैं कि हम सम्पूर्ण जीवन प्राप्त करें और इसके लिए वे हमें जीवन का रहस्य बतलाते हैं जिसे हम केवल देने के द्वारा प्राप्त करते हैं।

वहीं बहुत सारी चीजें हमारे चुनाव को कठिन बना देती हैं, भय, असुरक्षा, उत्तरहीन सवाल...यद्यपि प्रेम हमें इस सारी चीजों से परे जाने की मांग करती है। इस तथ्य पर आश्चर्य करते रहना कि हमारा जीवन ऐसा क्यों है इसका उत्तर हमें आकाश से नहीं मिलेगा। प्रेम हमें क्यों के आगे ले चलती है जहाँ हम किसके लिए सावल करने के बदले, मैं क्यों जीवित हूँमैं किसके लिए जी रहा हूँॽ पूछने की जरुरत है। मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा हैॽ मैं किसी की सहायता कर सकता हूँॽ किसके लिएॽ जीवन केवल अपने लिए नहीं है। जीवन में पहले ही बहुत सारी चीजें हैं जिसका चुनाव हम करते हैं, मैं क्या पढ़ूं, किसे मित्र बनाऊं, कैसा घर खरीदू, किन रुचियों या इच्छा की पूर्ति करूं। हम केवल अपने बारे में सोचते हुए जीवन बर्बाद कर सकते हैं और वास्तव में प्रेम करना ही नहीं सीख पाते हैं। आलेक्सद्रों मांजोनी इस संदर्भ में एक सलाह देते हैं, “हमें अच्छा बने रहने की अपेक्षा अच्छा करने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए, इस भांति अंत में हम बेहतर बनते हैं।” (ई प्रोमेस्सी स्पोसी, द बिथ्रोड, अध्याय 38)।

बढ़िया विकल्प बनाना

बड़े और उदारतापूर्ण चुनाव के संबंध में निश्चित ही हमारे जीवन में बहुत सारे सवाल और संदेह आयेंगी यहां तक की दूसरी चुनौतियों भी। भौतिकतावाद का ज्वार हमारे हृदयों के उद्लेवित करेगा जहाँ हम छिछली चीजों को पायेंगे। केवल सुख की प्राप्ति में तल्लीन रहना, मुसीबतों से छुटकारा पाने के उपाय लगेंगे, जो केवल उन्हें क्षणभर के लिए दूर करता है। अधिकारों में अटके रहना हमें अपने उत्तरदायित्वों से विमुख कर सकता है। इसके साथ ही प्रेम के बारे में एक बड़ी गलतफहमी जो “पसंदों” और मनोभावनाओं से बढ़कर है, जो अपने में सबसे पहले एक उपहार, एक चुनाव और एक त्याग है। अच्छे चुनाव की कला विशेषकर वर्तमान समय में, अपने में सहमति की चाह नहीं, भौतिकता की मानसिकता में अपने को फेंक नहीं जो वास्तविकता को नकारता करता है, और न ही रुपों के सामने अपने को समर्पित करना है। जीवन का चुनाव करने का अर्थ “फेंकने की संस्कृति” और “सारी चीजें अभी” की सोच को रोकना है, जिससे हम अपने जीवन को स्वर्ग के लक्ष्य, ईश्वरीय सपनों की ओर अभिमुख कर सकें।

हम रोज दिन अपने हृदय में बहुत सारे चुनावों का सामना करते हैं। अच्छे चुनाव  हेतु संत पापा ने युवाओं को एक आखरी सुझाव देते हुए कहा कि यदि आप अपने हृदय के अंदर झांक कर देखें तो दो बातों को पायेंगे। “मुझे क्या करने का मन करता हैॽ” यह पहला सवाल बहुत बार हमें गलत दिशा में ले चलता है क्योंकि इसमें हम अपने बारे में सोचते और अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु कार्य करते हैं। लेकिन पवित्र आत्मा हमारे हृदयों में एक दूसरा सवाल उत्पन्न करते हैं जो मुझे क्या करने का मन करता हैॽ से अलग “मेरे लिए क्या उत्तम है”ॽ हमें अपने प्रतिदिन के जीवन में इसका चुनाव करना है, मैं क्या करना चाहता हूँ या मेरे लिए उत्तम क्या हैॽ यह आत्म-परीक्षण हमारे जीवन का निर्माण करेगा। हम येसु ख्रीस्त को ओर निगाहें फेरे और उत्तम चीजों का चुनाव करने हेतु साहस की मांग करें, जो हमें प्रेम की राह में ले चलता है। ऐसा करने के द्वारा हम अपने लिए खुशी की खोज करते हैं। 

 

22 November 2020, 21:14