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रोजरी प्रार्थना रोजरी प्रार्थना  (©robyelo357 - stock.adobe.com)

"संघर्षों के खतरों" के बीच रोज़री प्रार्थना करें, संत पापा

7 अक्टूबर रोजरी की माता मरियम के त्योहार पर अपने बुधवारीय आम दर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने रोजरी प्रार्थना पर अपने विचार साझा किए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 07 अक्टूबर 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पॉल छठे सभागार में बुधवारीय आम दर्शन समारोह के दौरान रोजरी की माता मरियम के पर्व को चिह्नित करते हुए, वहाँ उपस्थित सभी विश्वासियों से आग्रह किया कि वे विशेष रूप से "खतरों से भरी दुनिया के लिए" माता मरियम से प्रार्थना करें। अक्टूबर का महीना पारंपरिक रूप से रोजरी माला की मरिया को समर्पित है।

महामारी

संत पापा ने पोलिश भाषी तीर्थयात्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे दुनिया के खतरों का सामना करने के लिए माता मरियम से अक्सर रोजरी प्रार्थना करते और उनसे मन्नतें मांगते हैं। "आज भी, महामारी के इस समय में, हमारे हाथों में रोजरी माला पकड़ना और अपने लिए, हमारे प्रियजनों और सभी लोगों के लिए प्रार्थना करना आवश्यक है।"

स्पानी बोलने वाले तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए, संत पापा ने प्रार्थना की कि रोजरी की माता मरियम की मध्यस्ता द्वारा प्रभु "महामारी के इस समय में, हमारे जीवन को बचा सकते हैं। हम सभी भाइयों और बहनों के लिए एक प्रेमपूर्ण सेवा दे सकें, विशेष रूप से जो परित्यक्त और असुरक्षित महसूस करते हैं।"

मुक्ति का रहस्य

अरबी भाषी विश्वासियों का अभिवादन करते हुए, संत पापा ने उन्हें रोजरी माला प्रार्थना करने और अपने हाथों या जेब में हमेशा रखने हेतु आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि रोजरी माला, सबसे सुंदर प्रार्थना है जिसे हम कुवांरी माँ मरियम को चढ़ा सकते हैं। "यह येसु के जीवन के विभिन्न चरणों पर चिंतन है। माता मरियम अपने पुत्र येसु हमारे उद्धारकर्ता के साथ उपस्थित हैं। यह एक ऐसा हथियार है जो हमें बुराई और प्रलोभन से बचाता है।" संत पापा ने रोजरी माला प्रार्थना को एक "चिंतनशील प्रार्थना" भी कहा है, रोजरी के विभिन्न भेदों पर चिंतन करते हुए हम मुक्ति के रहस्यों पर चिंतन करते हैं।

रोजरी की माता मरियम का पर्व 7 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह लेपांतो की लड़ाई में हमलावर ओटोमन नेवी के ऊपर 1571 में पवित्र संघ के संयुक्त बेड़े की निर्णायक जीत की सालगिरह है। संत पापा पियुस पांचवें ने इस जीत का श्रेय धन्य कुवांरी माँ मरियम को दिया, जिसे रोज़री करते हुए लड़ाई के दिन उनकी मदद के लिए बुलाया गया था।

07 October 2020, 14:32