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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

एक अच्छा नागरिक, समाज को योगदान व सुसमाचार का साक्ष्य देता है

देवदूत प्रार्थना के पूर्व सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि येसु को अपने विरोधियों के कपट का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरू में उनकी सराहना की किन्तु बाद में एक कपट भरा सवाल किया ताकि उन्हें परेशान एवं लोगों के सामने बदनाम करें। उन्होंने पूछा : कैसर को कर देना उचित है अथवा नहीं? राष्ट्र के उचित नियम का पालन करते हुए टेक्स देना नागरिकों का कर्तव्य है, साथ ही, यह भी आवश्यक है कि ईश्वर की सभी चीजों में उनके अधिकार का सम्मान करते हुए, मानव जीवन और इतिहास में ईश्वर की प्रमुखता सुनिश्चित की जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 19 अक्टूबर 2020 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित विश्वासियों के साथ संत पापा फ्राँसिस ने विश्व मिशन दिवस के दिन, देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती. 22,15-21) दिखलाता है कि येसु को अपने विरोधियों के कपट का सामना करना पड़ा। वे उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं- शुरू में सराहना किन्तु बाद में एक कपट भरा सवाल करते हैं ताकि उन्हें परेशान एवं लोगों के सामने बदनाम करें। वे पूछते हैं : कैसर को कर देना उचित है अथवा नहीं? (17) अर्थात् सम्राठ को कर चुकाना। उस समय फिलिस्तीन में रोमन सम्राठ के शासन को सहन नहीं किया जाता था- जिसे समझा जा सकता है क्योंकि वे आक्रमणकारी थे, और धर्म के कारण भी। लोगों के लिए, सम्राठ की पूजा, जिसको सिक्के में उनकी तस्वीर द्वारा अंकित किया गया था, इस्राएल के ईश्वर का अपमान था।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अंतर

येसु से विवाद करनेवाले को पक्का विश्वास था कि उनके सवाल का एक "हाँ" अथवा "न" में जवाब देने का विकल्प नहीं था। वे इंतजार कर रहे थे, खासकर, इसलिए क्योंकि इस सवाल के द्वारा वे येसु को पीछे करना और उन्हें अपने जाल में फंसाना चाहते थे, किन्तु वे उनकी धूर्तता जान गये और खतरे से अपने को हटा लिया। उनसे सिक्का दिखाने को कहा। कर के सिक्के को अपने हाथ में लिया और पूछा कि किसका चेहरा है। उन्होंने कहा कैसर का अर्थात् सम्राठ का। तब येसु ने कहा, "जो कैसर का है उसे कैसर को दो और जो ईश्वर का है उसे ईश्वर को।"(21)

हरेक व्यक्ति में एक मुहर

इस जवाब के साथ येसु ने अपने आपको विवाद के ऊपर रखा। संत पापा ने कहा, "येसु हमेशा ऊपर हैं। एक तरफ वे स्वीकार करते हैं कि कैसर को कर दिया जाना चाहिए- "हम सभी की ओर से भी टेक्स चुकाया जाना चाहिए क्योंकि सिक्का में उन्हीं की मुहर है" किन्तु दूसरी ओर, संत पापा ने कहा कि हरेक व्यक्ति में एक दूसरा मुहर है, जिसको हम अपने हृदय में, आत्मा में धारण करते हैं, वह मुहर है ईश्वर का। वे ही हैं जिनको अपना अस्तित्व और अपना जीवन अर्पित करना है।  

येसु के इस वाक्य में हम न केवल राजनीतिक एवं धार्मिक आयामों के बीच अंतर के  मापदण्ड को पाते हैं, बल्कि हर समय के, यहाँ तक कि आज के विश्वासियों को भी मिशन के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त होता है। राष्ट्र के उचित नियम का पालन करते हुए टेक्स देना नागरिकों का कर्तव्य है। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि ईश्वर की सभी चीजों में उनके अधिकार का सम्मान करते हुए, मानव जीवन और इतिहास में ईश्वर की प्रमुखता सुनिश्चित की जाए।

कलीसिया और ख्रीस्तियों का मिशन      

इस तरह कलीसिया एवं ख्रीस्तियों का मिशन है : ईश्वर से बातचीत करना और हमारे समय के लोगों को उनका साक्ष्य देना। हम प्रत्येक जन बपतिस्मा के द्वारा, सुसमाचार से प्रेरित होकर एवं पवित्र आत्मा से जीवन रक्त प्राप्त कर, समाज में उनकी जीवित उपस्थिति बनने के लिए बुलाये गये हैं। यह दीनता और साहस के साथ अपने समर्पण का सवाल है, प्रेम की सभ्यता का निर्माण करने में योगदान देना है जहाँ न्याय और भाईचारा का राज हो।

संत पापा ने धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना की कि अति पवित्र कुँवारी मरियम हमें हर प्रकार के ढ़ोंग से बचने तथा ईमानदार एवं निर्माण करनेवाले नागरिक बनने में मदद दे। ईश्वर ही जीवन के केंद्र और अर्थ हैं इसका साक्ष्य देने के लिए वे हम ख्रीस्त के शिष्यों को सुदृढ़ बनाये रखे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

19 October 2020, 15:17