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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

ईश्वर अपना विवाह भोज सभी के लिए तैयार करते हैं, संत पापा

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 11 अक्टूबर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विवाह भोज के दृष्टांत पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 अक्तूबर 2020 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 11 अक्टूबर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

विवाह भोज का दृष्टांत बतलाने के साथ, आज के सुसमाचार पाठ (मती. 22,1-14) के द्वारा, येसु ईश्वर की उस योजना को रेखांकित करते हैं जिसको उन्होंने मानव जाति के लिए तैयार किया है। राजा जिसने अपने बेटे के लिए विवाह भोज का आयोजन किया (2) वह उस पिता की छवि है जिसने समस्त मानव परिवार के लिए, अपने एकलौटे पुत्र के साथ प्रेम एवं एकता के महान उत्सव का आयोजन किया है। राजा ने दो बार अपने सेवकों को बुलाने भेजा किन्तु उन्होंने इनकार कर दिया, वे भोज में जाना नहीं चाहते थे क्योंकि उन्हें खेत और व्यापार जैसे अन्य चीजों की चिंता थी। कई बार हम भी प्रभु के सामने जो हमें भोज के लिए बुलाते हैं, अपनी पसंद एवं भौतिक चीजों को रखते हैं।

उदारता या स्वार्थ

दृष्टांत में राजा नहीं चाहते थे कि विवाह मण्डप खाली रह जाए क्योंकि वे अपने राज्य के खजाने को बांटना चाहते हैं। तब वे सेवकों से कहते हैं, "इसलिए चौराहों पर जाओ और जितने भी लोग मिल जाएँ, सब को विवाह भोज में बुला लाओ।" (9) ईश्वर ऐसा ही करते हैं जब उन्हें इनकार किया जाता है, छोड़ देने के बदले वे फिर उठते एवं किसी को छोड़े बिना, सभी लोगों को निमंत्रण देते हैं जो चौराहों पर पड़े हैं। ईश्वर के घर से कोई भी बाहर नहीं है।  

मूल शब्द जिसका प्रयोग सुसमाचार लेखक मती ने सड़क की सीमाओं के रूप में किया है वह शहर की गलियों के अंतिम छोर एवं शहर से बाहर, गाँव ले जानेवाले रास्ते का संकेत देता है जहाँ जीवन अनिश्चित है। यह मानवता का वह चौराहा है जहाँ राजा अपने सेवकों को भेजते हैं जहाँ से लोग राजा की मेज पर बैठने के लिए तैयार होंगे। इस तरह विवाह मण्डप भर जाता है। जो लोग बाहर थे उन्हें कभी महसूस नहीं हुआ था कि वे विवाह भोज में शामिल होने के योग्य हैं। दूसरी ओर, स्वामी या राजा अपने सेवकों से कहते हैं, "भले–बुरे सभी को बुला लाओ।

संत पापा ने कहा, "ईश्वर बुरे लोगों को भी बुलाते हैं।" वे उन लोगों को भी बुलाते हैं जो कहते, मैं बुरा हूँ मैंने कई गलतियाँ की हैं...।" येसु चुंगी जमा करनेवाले के साथ भोजन करते हैं जो लोगों के बीच पापी समझे जाते थे, वे बुरे लोगों की गिनती में आते थे। ईश्वर हमारी घायल आत्मा से नहीं डरते जिसने कई बुराईयाँ की हों क्योंकि वे हमें प्यार करते हैं और हमें निमंत्रण देते हैं।

सुसमाचार प्रचार के लिए प्रेषित

कलीसिया आज उन चौराहों पर पहुँचने के लिए बुलायी गई है जो मानवता की भौगोलिक एवं अस्तित्वगत परिधि है। उन परिस्थितियों में जिनमें वे बिना किसी आशा के, अपने आप को पड़े और बिखरे हुए मानव के रूप में पाते हैं। संत पापा ने कहा कि यह सुसमाचार प्रचार एवं परोपकारी साक्ष्य का सुविधाजनक और सामान्य रास्ता नहीं है बल्कि अपना हृदय एवं समुदाय, सभी लोगों के लिए खोलना है क्योंकि सुसमाचार कुछ चुने हुए लोगों के लिए आरक्षित नहीं है। चाहे लोग हाशिये पर हों, समाज द्वारा बहिष्कृत एवं तिरस्कृत हों वे ईश्वर के प्रेम के योग्य हैं।

वे अपना भोज ˸ धर्मी और पापी, भले और बुरे, बुद्धिमान एवं अशिक्षित सभी के लिए तैयार करते हैं। संत पापा ने सच्ची कलीसिया के रूप में एक बुजूर्ग इताली पुरोहित का उदाहरण देते हुए कहा, "पिछली रात, मैंने एक बुजूर्ग इताली पुरोहित से फोन पर बात की, जो अपने युवा समय से ही ब्राजील में मिशनरी थे और बहिष्कृत एवं गरीब लोगों के बीच काम किया। वे इस बुढ़ापे में शांति से रह रहे हैं जिन्होंने अपना सारा जीवन गरीबों के लिए जलाया है।" संत पापा ने कहा कि यही हमारी माता कलीसिया है, यह ईश्वर का संदेश वाहक है जो चराहों पर भेजी गई है।  

विवाह वस्त्र धारण करना       

हालांकि, ईश्वर एक शर्त रखते हैं, विवाह वस्त्र धारण करना। संत पापा ने दृष्टांत पर पुनः लौटते हुए कहा, "जब विवाह-मण्डप अतिथियों से भर गया तब राजा अतिथियों को देखने और उनका अभिवादन करने आया। वहाँ उनकी नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो विवाह वस्त्र पहने हुए नहीं था। विवाह वस्त्र, एक तरह की टोपी थी जिसको हरेक अतिथि ने प्रवेश द्वार पर उपहार के रूप में प्राप्त किया था। संत पापा ने कहा कि चूँकि लोग अपने ही वस्त्र पहने हुए थे जो उनके पास था, अतः उनके पास उत्सव का वस्त्र नहीं था किन्तु प्रवेश द्वार पर एक प्रकार की टोपी दी गई थी, जो मुफ्त थी जिसको उस व्यक्ति ने इनकार कर दिया था और अपने को दूसरों से अलग रखा था। ऐसा करने पर राजा कुछ नहीं कर सकते थे अतः उन्होंने उसे बाहर फेंकने को कहा। इस व्यक्ति ने निमंत्रण को स्वीकार तो किया किन्तु कोई महत्व नहीं दिया। वह आत्मकेंद्रित व्यक्ति था। उसे बदलाव की चाह नहीं थी, वह नहीं चाहता था कि प्रभु उन्हें बदलें।

विवाह वस्त्र, करूणा का प्रतीक

विवाह वस्त्र, यह टोपी- करूणा का प्रतीक है जिसको ईश्वर हमें मुफ्त में प्रदान करते हैं। यह उनकी कृपा है। कृपा के बिना हम ख्रीस्तीय जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। सब कुछ कृपा द्वारा संभव हैं। सब कुछ कृपा है। प्रभु का अनुसरण करने के लिए उनके निमंत्रण को स्वीकार करना मात्र काफी नहीं है। यह आवश्यक है कि मन परिवर्तन के रास्ते को अपनाया जाए जो हृदय को बदल देता है। यह करूणा का वस्त्र है जिसको ईश्वर हमें लगातार प्रदान करते हैं। यह उनके प्रेम का मुफ्त वरदान है, यह निश्चय ही एक कृपा है। जिसको विस्मय एवं आनन्द के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए, "धन्यवाद प्रभु मुझे यह कृपा देने के लिए"।  

अति पवित्र माता मरियम हमें, अपनी योजनाओं एवं संकीर्ण विचारों से बाहर आने में  सुसमाचार के दृष्टांत के सेवकों का अनुकरण करने में मदद दे, ताकि हम सभी लोगों के लिए घोषणा कर सके कि प्रभु हमें अपने भोज में बुला रहे हैं कि वे हमें वह कृपा प्रदान करें जो हमें बचाता है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

12 October 2020, 14:29