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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (AFP or licensors)

कलीसियाई जिम्मेदारी में महिलाओं की भागीदारी अधिक हो, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को अक्टूबर के महीने के लिए अपनी प्रार्थना के मतलब को दोहराया और अपनी इच्छा व्यक्त की, कि कलीसियाई जिम्मेदारी में लोकधर्मी अधिक भाग ले सकते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 अक्टूबर 2020 (वाटिकन न्यूज) : “हममें से किसी को भी याजक या धर्माध्यक्ष का बपतिस्मा नहीं मिला : हम सभी को लोकधर्मी, पुरुषों और महिलाओं का बपतिस्मा मिला है। लोकधर्मी कलीसिया के नायक हैं।” संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाधर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना के पाठ के बाद यह टिप्पणी की।

 अक्टूबर के लिए अपनी प्रार्थना मतलब में, संत पापा कहते हैं, "हम प्रार्थना करते हैं कि बपतिस्मा के आधार पर, कलीसियाई ज़िम्मेदारी में, लोकधर्मियों, विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी अधिक हो"

कलीसिया में महिला भागीदारी

रविवार को संत पापा फ्राँसिस ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "आज भी हमें गिरजाघर में अधिक स्त्री-प्रधान उपस्थिति के लिए अधिक जगह बनाने की आवश्यकता है - मेरा मतलब है कि कलीसियाई ज़िम्मेदारी में महिलाओं की मौजूदगी - नारीत्व पहलू को रेखांकित करना, क्योंकि महिलाओं को अक्सर दरकिनार किया जाता है।"

संत पापा ने उन जगहों पर महिलाओं की सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया, जहां महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाते हैं।

संत पापा ने अपनी प्रार्थना के मतलब के वीडियो संदेश में याजकवाद में गिरने के खिलाफ चेतावनी दी, जो कलीसिया में लोक धर्मियों की विशिष्ठता को कम करता है और यहां तक कि धन्य माता कलीसिया की छवि को बर्बाद कर देता है।"

12 October 2020, 14:17