खोज

Vatican News
अमरीकी यहूदी प्रतिनिधि मंडल का स्वागत करते संत पापा फ्राँसिस अमरीकी यहूदी प्रतिनिधि मंडल का स्वागत करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

नोस्त्रा ऐताते : ख्रीस्तीय-यहूदी संबंध का मग्ना कार्ता

यहूदियों के साथ धार्मिक संबंध को प्रोत्साहन देने के लिए गठित वाटिकन आयोग एवं अंतरधार्मिक परामर्श के लिए अंतरराष्ट्रीय यहूदी समिति ने एक संयुक्त बयान में, नोस्त्रा ऐताते के प्रकाशन के 55 साल बाद होने वाली घोषणा के महत्व की पुष्टि करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 अक्टूबर 2020 (रेई)- वाटिकन द्वितीय महासभा के दस्तावेज नोस्त्रा ऐताते को 28 अक्टूबर 1965 को प्रकाशित किया गया था, जिसने ख्रीस्तियों एवं यहूदियों के संबंध में नया मोढ़ लाया। उस घोषणा के 55 साल बाद, एक बयान में यहूदियों के साथ धार्मिक संबंधों के लिए बनी वाटिकन की समिति (सीआरआरजे) और अंतरधार्मिक परामर्श के लिए अंतरराष्ट्रीय यहूदी समिति ने इसके महत्व को रेखांकित किया। अक्टूबर के अंत में इसके वर्षगाँठ को मनाने हेतु ब्राजील के साओ पाओलो में एक पहल की योजना बनायी गई थी किन्तु महामारी ने समारोह को रद्द करने के लिए मजबूर किया, यही कारण है कि दोनों ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया।

कोच : ख्रीस्तीय एवं यहूदियों के बीच वार्ता एक मील का पत्थर

ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति एवं यहूदियों के साथ धार्मिक संबंधों के लिए गठित आयोग के अध्यक्ष कार्डिनल कूर्ट कोच ने अपने संदेश में कहा, "यहूदी-काथलिक वार्ता को माग्ना कार्ता मानना सही कहा जा सकता है।" उन्होंने कहा, "संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने यहूदियों को ख्रीस्तियों का बड़ा भाई कहा और उसके बाद संत पापा बेनेडिक्ट 16वें ने उन्हें विश्वास में हमारे पिता कहा, आज हम यहूदियों और ख्रीस्तियों को भाई और बहनों का समुदाय कह सकते हैं।

साझा यात्रा के अनेक फलों को रेखांकित करते हुए कार्डिनल ने याद दिलाना है कि हमें अधिक गहरी आपसी समझदारी के रास्ते पर चलते रहने की जरूरत है, एक-दूसरे की धार्मिक परम्पराओं को सम्मान देना है।

रब्बी मरान्स : यहूदी विरोधी भावना के खिलाफ संत पापा फ्राँसिस की टिप्पणी

अंतरधार्मिक परामर्श के लिए अंतराष्ट्रीय यहूदी समिति के अध्यक्ष रब्बी नोवाम ई. मरान्स ने अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस के शब्दों के लिए आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि "ऐसे समय में जब यहूदी विरोधी भावना बढ़ रही रही है तथा यहूदी समुदायों और यहूदियों के खिलाफ शारीरिक खतरा बेहद वास्तविक है, हम संत पापा की दृढ़ता के लिए आभारी हैं जिन्होंने इस विपत्ती के विरूद्ध जोर देकर और बारम्बार कहा है।" संदेश में उन्होंने ख्रीस्तीय भाई बहनों के प्रति एकात्मता व्यक्त की है जो इस दुनिया में, धार्मिक स्वतंत्रता के उलंघन, भेदभाव और अत्याचार के कारण गंभीर दुःख सह रहे हैं। मरान्स ने कहा है कि मित्रता के आशीर्वाद, वार्ता के रास्ते एवं उस धारणा को अपनाया जाना चाहिए कि मानव प्राणी उस ईश्वरीय प्रतिरूप में उत्पन्न की गई है जिसका हमारे अंतिम लक्ष्य से गहरा संबंध है।

29 October 2020, 16:11