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जेस्विट पुरोहित फादर स्टेन स्वामी,  आदिवासी मानव अधिकार कार्यकर्ता जेस्विट पुरोहित फादर स्टेन स्वामी, आदिवासी मानव अधिकार कार्यकर्ता 

जेस्विट कार्यकर्ता फा. स्टेन जेल भेजे गये, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

83 वर्षीय जेस्विट पुरोहित फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी एवं जेल भेजे जाने पर काथलिक समुदाय, विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संगठनों द्वारा पूरे भारत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शनिवार, 10 अक्तूबर 2020 (मैटर्स इंडिया)- जेस्विट पुरोहित फादर स्टेन स्वामी की भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में 8 अक्टूबर को गिरफ्तार किये जाने  एवं जेल भेजे जाने पर काथलिक समुदाय एवं पूरे भारत के विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बृहस्पतिवार को फादर स्तानिसलास लुर्दस्वामी को झारखंड की राजधानी राँची के बगैचा स्थित अपने आवास से गिरफ्तार किया।  

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार एजेंसी ने 9 अक्टूबर को फादर को मुम्बई लिया और उसे एक अदालत के सामने पेश किया जिसने उन्हें 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन्हें तलोजा केंद्रीय जेल में रखा जाएगा।

येसु समाज द्वारा गिरफ्तारी का विरोध

फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी पर पूरे येसु समाज ने उनके प्रति गहरा दुःख एवं एकात्मता व्यक्त किया है। रोम स्थित येसु समाज के मुख्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि "येसु समाज (जेस्विट्स) जो विश्वभर के करीब 80 देशों में कार्यरत है यह जानकर गहरा दुःख महसूस कर रहा है कि कल (8 अक्टूबर 2020) शाम को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने फादर स्टेन स्वामी को ... गिरफ्तार किया जो 83 साल के हैं। वे जमशेदपुर प्रोविंस से आते हैं।"

उन्होंने कहा है कि हम जेस्विट्स, स्टेन एवं भारत में अन्य मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं तथा फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध करते हैं। उनको तुरन्त रिहा किये जाने की मांग करते हैं तथा कानून का पालन करनेवाले निर्दोष नागरिक को गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं।

राँची में विरोध प्रदर्शन एवं मुख्य मंत्री से अपील  

उनकी गिरफ्तारी के विरोध में शुक्रवार को राँची में क़रीब दो हज़ार लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेंन ने ट्वीट कर फादर की गिरफ्तारी पर सवाल किया। उन्होंने 9 अक्टूबर को लिखा, "गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने वाले 83 वर्षीय वृद्ध 'स्टेन स्वामी' को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?"

राँची में विरोध प्रदर्शन करनेवालों ने एक बयान जारी कर कहा है कि "स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मानदंडों का घोर उल्लंघन है।"

उन्होंने "झारखंड में दशकों से आदिवासी अधिकारों के लिए काम करनेवाले एक मूल्यवान और सार्वजनिक उत्साही नागरिक" के रूप में फादर स्वामी के कार्यों की सराहना की है तथा "एनआईए अधिकारियों के अमानवीय और निष्ठुर कृत्य" की निंदा की है।

उन्होंने कहा है कि फादर की गिरफ्तारी में सरासर बर्बरता दिखाई पड़ती है जिन्होंने  जाँच अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया था जिनसे करीब 15 घंटे तक पूछताछ की थी।

फादर स्टेन द्वारा आरोपों से इनकार

कथित तौर पर एनआईए अधिकारियों ने कहा है कि फादर सक्रिय रूप से प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-माओवादी (सीपीआई-माओवादी) की गतिविधियों में शामिल था। एजेंसी ने उन पर सीपीआई-माओवादी गतिविधियों के लिए धन प्राप्त करने का भी आरोप लगाया है।

एजेंसी ने कहा कि उन्होंने फादर से माओवादियों के साहित्य एवं प्रचार सामग्री के दस्तावेज और कि वे भीमा कोरेगांव मामले के अन्य आरोपियों के संपर्क में थे, जो 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव की लड़ाई के दो सौ साल पूरा होने का समारोह मना रहे थे, जब्त कर ली थी।

बयान में कहा गया है कि “स्टेन ने चरमपंथी वामपंथी ताकतों या माओवादियों के साथ किसी तरह के संबंध से लगातार इनकार किया है। उन्होंने एनआईए को यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि कथित तौर पर एनआईए द्वारा दिखाए गए उनके कंप्यूटर से लिए गए कुछ तथाकथित दस्तावेज नकली और मनगढ़ंत थे और उन्होंने उन्हें अस्वीकार किया था।"

भीमा-कोरेगांव वो जगह है जहाँ एक जनवरी 1818 को मराठा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था।

इस युद्ध में महार समुदाय ने अंग्रेजों की ओर से पेशवा की सेना के ख़िलाफ़ लड़ाई की और महार रेजिमेंट की बदौलत पेशवा की सेना को हार का सामना करना पड़ा था।

पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को उनके "माओवादी लिंक" होने के आरोप में जाँच के लिए  गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 31 दिसंबर, 2017 को बैठक को वित्त पोषित किया, जिसमें भड़काऊ भाषण दिए गए, जिससे हिंसा भड़क गई थी।

फादर स्तानिसलास लुर्दस्वामी जो स्टेन स्वामी के नाम से जाने जाते हैं भीमा कोरेगाँव हिंसा से किसी तरह के लिंक होने से भी इनकार किया है।

नागरिक दल के बयान ने कोविड-19 महामारी के दौरान बुजुर्ग पुरोहित को कई स्वास्थ्य बीमारियों के साथ गिरफ्तार करने और मुंबई ले जाने के लिए एनआईए की आलोचना की है।

उन्होंने बयान में यह भी बताता है कि फादर ने दशकों से झारखंड में आदिवासियों और अन्य वंचित समूहों के अधिकारों के लिए काम किया है। उन्होंने आदिवासी समुदायों के विस्थापन, "संसाधनों की कॉर्पोरेट लूट, उपक्रमों और पेसा (पंचायतों, अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विस्तार - अधिनियम, 1996) एवं विचाराधीन कैदियों की स्थिति" का विरोध किया है।

बयान में दावा किया गया है कि “हम स्टेन को एक असाधारण सौम्य, ईमानदार और निस्वार्थ व्यक्ति के रूप में जानते हैं। हमारे पास उनके और उनके काम के लिए सबसे अधिक सम्मान है।"

समर्थकों का केंद्र सरकार पर आरोप

उनका आरोप है कि मामले का मुख्य उद्देश्य, उन कार्यकर्ताओं को लक्षित करना और परेशान करना है जो आदिवासियों, दलितों और हाशिए पर जीवन यापन करनेवाले लोगों के अधिकारों के लिए काम करते हैं और सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ सवाल उठाते हैं।

उनके अनुसार, भीमा-कोरेगांव मामला "केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करना और असंतोष को दबाना है।"

वे फादर स्वामी की गिरफ्तारी को "झारखंड में मानव और संवैधानिक अधिकारों के लिए काम करनेवाले सभी लोगों पर हमला" के रूप में देख रहे हैं।

भारतीय कलीसिया की प्रतिक्रिया, तत्काल रिहाई की मांग

अलग-अलग बयानों में,  भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन, दक्षिण एशिया के जेसुइट सम्मेलन और रांची की काथलिक कलीसिया ने फादर स्वामी को तत्काल रिहा करने की मांग की है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) के महासचिव महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स मचाडो ने 9 अक्टूबर को जारी बयान में फादर स्टेन की गिरफ्तारी पर दुःख एवं व्याकुलता व्यक्त करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।

दक्षिणी एशिया के जेस्विट सम्मेलन के अध्यक्ष फादर जॉर्ज पट्टेरी ने 9 अक्टूबर को अपने बुजुर्ग साथी की गिरफ्तारी पर हैरानी और निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने "दलित और अन्य कमजोर लोगों के उत्थान के लिए अपना सारा जीवन लगा दिया।"

जेस्विट फादर ने कहा कि वे सभी भली इच्छा रखनेवाले लोगों, नागरिक समाज के सदस्यों और उन संस्थों के प्रति अपना गहरा आभार प्रकट करते हैं जो भारी संख्या में स्टेन के समर्थन में आगे आये।"  

एकात्मता हेतु राष्ट्रीय दिवस का आह्वान

फादर पट्टेरी ने 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे, एक घंटे के कार्यक्रम में भाग लेने का निमंत्रण दिया है ताकि स्टेन स्वामी के लिए अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त कर सकें।

एक संयुक्त बयान पत्र में राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास और भारतीय धर्मसमाजियों के सम्मेलन (सीआरआई) की रांची शाखा की सचिव क्लुनी सिस्टर पुनम सोरेंग ने जेस्विट फादर की गिरफ्तारी पर गहरा दुःख एवं चिंता व्यक्त की है।  

उन्होंने कहा है, "जिस तरह और जिस ढंग से फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी हुई है हम व्यथित और परेशान हैं।" उन्होंने मुख्य राष्ट्रीय जाँच एजेंसी पर खेद प्रकट किया है कि उसने फादर स्वामी को अपने साथ ले जाने के लिए रात के समय को चुना।  

राँची के धर्माध्यक्ष एवं सीआरआई सचिव ने कहा कि उन्हें प्रमुख जाँच एजेंसी से उम्मीद थी कि वह फादर स्टेन के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया होता, खासकर, उस समय जब बुजूर्ग पुरोहित ने उनसे आग्रह किया कि वे बीमार व्यक्ति हैं।  

उन्होंने फादर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है जिन्होंने बृहस्पतिवार शाम से कुछ नहीं खाया था। इस संबंध में उन्होंने एनआईए से एक स्पष्टीकरण की मांग की है।”

कलीसिया के बयान में पूछा गया है कि फादर को मुंबई की यात्रा करने की क्या आवश्यकता थी "इस तथ्य को देखते हुए कि स्वस्थ युवा भी इस महामारी के समय यात्रा करने से डरते हैं।"

उन्होंने कहा है कि राँची की काथलिक कलीसिया जिम्मेदार अधिकारियों से अपील करती है कि फादर को तुरन्त रिहा किया जाए एवं उनके आवास में सकुशल वापस लाया जाए।

 

10 October 2020, 15:00