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आम्ब्रोसेट्टी ङाऊस फोरम के सम्मेलन का दृश्य चेरनोब्बियो, 04.09.2020 आम्ब्रोसेट्टी ङाऊस फोरम के सम्मेलन का दृश्य चेरनोब्बियो, 04.09.2020  (ANSA)

यूरोपीयन हाऊस-आम्ब्रोसेट्टी फोरम को सन्त पापा का सन्देश

इटली के चेरनोब्बियो में 04 और 05 सितम्बर को जारी, यूरोपीयन हाऊस-आम्ब्रोसेट्टी फोरम के सम्मेलन में, शुक्रवार को अपना सन्देश प्रेषित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने आर्थिक गतिविधियों में किसी को भी अलग न छोड़ने का आह्वान किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

चेरनोब्बियो, शुक्रवार, 4 सितम्बर 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): इटली के चेरनोब्बियो में 04 और 05 सितम्बर को जारी, यूरोपीयन हाऊस-आम्ब्रोसेट्टी फोरम के सम्मेलन में, शुक्रवार को अपना सन्देश प्रेषित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने आर्थिक गतिविधियों में किसी को भी अलग न छोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश अथवा समुदाय की आर्थिक प्रक्रियाओं में सभी को शामिल किया जाना चाहिये तथा सभी को इसका लाभ मिलना चाहिये।  

यूरोपियन हाउस-एम्ब्रोसेट्टी 1965   

यूरोपियन हाउस-एम्ब्रोसेट्टी 1965 में स्थापित एक पेशेवर समूह है जिसने इटली, यूरोप और दुनिया भर में रणनीतिक और परिचालन परामर्श तथा अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तरोत्तर कई गतिविधियों को विकसित किया है।

सन्त पापा ने कहा, "इस वर्ष की आपकी चर्चाओं का विषय समाज, अर्थव्यवस्था और नवोन्मेष से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं: ये ऐसे मुद्दे हैं जो वर्तमान चिकित्सा, आर्थिक और सामाजिक आपात से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए असाधारण प्रयासों की मांग करते हैं।"

कोविद महामारी से शिक्षा

उन्होंने कहा, "महामारी के अनुभव ने हमें सिखाया है कि हम में से कोई भी अकेला सुरक्षित नहीं है। हमने पहली बार अपनी मानवीय स्थिति की कमज़ोरी को अनुभव किया है और यही हमें एक परिवार बनाती है। हम स्पष्ट रूप से यह देख सकें हैं कि हमारी व्यक्तिगत पसंद,  हमारे पड़ोसियों तथा उन सब लोगों के जीवन को प्रभावित करती है जो दुनिया के सुदूर हिस्सों में निवास करते हैं।"  

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "घटनाओं के मोड़ ने हमें यह पहचानने के लिए मजबूर कर दिया है कि हम एक दूसरे के हैं। धन और संसाधनों के बंटवारे में एकजुटता दिखाने में असफल रहने के बाद, हमने पीड़ा में एकजुटता का अनुभव करना सीखा है।"

सन्त पापा ने कहा कि कोविद महामारी ने "हमें विज्ञान की महता का ज्ञान कराया है तथापि, इसकी सीमाओं का भी परिचय दिया है। धन और सत्ता को सर्वोपरि रखने वाले मूल्यों पर इसने सवाल उठाया है। साथ ही, हमें एक साथ घर पर रहने के लिए मजबूर करके, माता-पिता और बच्चों, युवा और वयोवृद्धों के बीच विद्यामन हमारे संबंधों में शामिल खुशियों और कठिनाइयों से अवगत कराया है।"

एवानजेलियुम गाओदी

सन्त पापा ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्थाओं पर महामारी का गहन प्रभाव पड़ा है जिसका व्यक्तियों की ठोस जीवन स्थितियों के साथ घनिष्ठ संबंध है। वर्तमान परिस्थिति हमें इस तथ्य पर चिन्तन के लिये बाध्य करती है कि अर्थव्यवस्था को मनुष्यों की देखभाल और उत्कंठा की अभिव्यक्ति बनना चाहिए, जिसमें सभी को शामिल किया जाना तथा किसी को भी वंचित नहीं किया जाना चाहिये, इसे जीवन के उत्थान और विकास का माध्यम होना चाहिये।

अपने विश्व पत्र एवानजेलियुम गाओदी को उद्धृत कर सन्त पापा ने कहा, "ऐसी अर्थव्यवस्था जो वित्त लाभ के लिये मानव गरिमा का बलिदान नहीं रहती, जो हिंसा और असमानता को प्रश्रय नहीं देती तथा वित्तीय संसाधनों का उपयोग, अन्यों पर हावी होने के लिए नहीं बल्कि, सेवा करने के लिए करती है, वही अर्थव्यवस्था उचित, उपयुक्त और न्यायसंगत होती है।

04 September 2020, 11:29