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अंतरराष्ट्रीय गाइनेकोलोजिक कैंसर सोसाईटी की वार्षिक विश्वस्तरीय सभा के प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा अंतरराष्ट्रीय गाइनेकोलोजिक कैंसर सोसाईटी की वार्षिक विश्वस्तरीय सभा के प्रतिभागियों से मुलाकात करते संत पापा 

संत पापा ने रोगियों की देखभाल के मानवीय आयाम पर जोर दिया

संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय गाइनेकोलोजिक कैंसर सोसाईटी (आईजीसीएस) की वार्षिक विश्व स्तरीय सभा के प्रतिभागियों से वाटिकन के पौल षष्ठम सभागर में मुलाकात की। सभा 10-13 सितम्बर तक ऑनलाईन आयोजित की गई है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 11 सितम्बर 2020 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को रोगियों की देखभाल के मानवीय पहलू पर जोर दिया, यह कहते हुए कि हर रोगी एक व्यक्ति है जिसे, उसके क्लिनिकल डेटा से बढ़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, "जब एक रोगी व्यक्ति महसूस करता है कि उसके साथ एक खास व्यक्ति की व्यवहार किया जा रहा है तब मेडिकल टीम में परिणाम अधिक भरोसा का होता है और सकारात्मक परिणाम की अधिक उम्मीद की जाती है।"

आईजीसीएस 2020 की सभा रोम में होनेवाली थी किन्तु कोविड-19 महामारी के कारण इसे 10-13 सितम्बर तक डिजिटल माध्यम द्वारा सम्पन्न किया जा रहा है। सोसाईटी में कुल 1,000 सदस्य हैं जो 80 देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए शिक्षा, प्रशिक्षण एवं जन चेतना लाकर, विश्वभर में कैंसर पीड़ित महिलाओं की देखभाल करते हैं।    

संबंध बनाना

प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए, संत पापा ने गंभीर विकृति से पीड़ित रोगियों, उनके परिवार के सदस्यों और चिकित्साकर्मियों के बीच एकजुटता और समर्थन के बंधन बनाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहन दिया कि वे चिकित्सा के हर स्तर पर भरोसा, आशा और प्रेम प्रकट कर, रोगी के समग्र देखभाल पर ध्यान केंद्रित करें। प्रेमपूर्ण सामीप्य ही वास्तव में उम्मीद का द्वार खोलता एवं चंगाई प्रदन करता है।   

संत पापा ने कहा, "यह अक्सर कहा जाता है और सही भी है कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अच्छा संबंध अपने आपमें चंगाई का एक हिस्सा है। रोगी व्यक्ति के प्रति सकारात्मक विचार उसके हृदय को दूसरों के लिए खोल देता है जिससे उसकी स्थिति और आवश्यकता मालूम होती है, उसके दुःख में सहभागी होने से, क्षितिज खुल जाते हैं, चंगाई पाने में मदद मिलती है और बीमार व्यक्ति को राहत महसूस होता है।"  

संत पापा ने खेद व्यक्त किया कि रोगियों की देखभाल करने के मानवीय आयाम को स्वास्थ्य सुविधाओं द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का एक अभिन्न अंग माने जाने की अपेक्षा, अक्सर चिकित्सक के व्यक्तिगत दया पर छोड़ दिया जाता है।

मानव व्यक्ति की प्राथमिकता

संत पापा ने कहा कि रोगी के साथ संबंध स्थापित करने में आर्थिक मामला को हावी नहीं होना चाहिए, जबकि अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, विभिन्न कारकों के बीच एक सही संतुलन होना चाहिए, ताकि इस मामले में, गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को हमेशा प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, स्वास्थ्यकर्मी जो इन रोगियों की प्रतिदिन सेवा करते हैं वे भी सम्मानित स्थिति में अपने कार्यों को सम्पन्न कर सकें।  

एक-दूसरे की जरूरत

अंततः संत पापा ने सभा के प्रतिभागियों से कहा कि महिलाएँ जिनकी वे सेवा करते हैं हमारे अस्तित्व की अनिश्चितता, एक-दूसरे की आवश्यकता, आत्मकेंद्रण की व्यर्थता और जीवन के हिस्से के रूप में मृत्यु की वास्तविकता का स्मरण दिलाती हैं।

हमें खुद को ईश्वर को सौंपने की हमारी आवश्यकता के बारे याद दिलाते हुए संत पापा ने कहा कि बीमारी भी हमें सामीप्य के महत्व और एक-दूसरे के पड़ोसी होने की आवश्यकता की याद दिलाती है जैसा कि येसु ने भले समारी के दृष्टांत में बतलाया है।

 

11 September 2020, 15:06