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मोरिया कैंप से बाहर शरणार्थी खुद के बनाये टेंट में मोरिया कैंप से बाहर शरणार्थी खुद के बनाये टेंट में 

संत पापा ने मोरिया कैम्प के लोगों के प्रति निकटता व्यक्त की

संत पापा ने रविवार को मोरिया शरणार्थी शिविर की आग के शिकार लोगों के प्रति अपनी एकजुटता और निकटता व्यक्त की जिन्हें अब बिना आवास के छोड़ दिया गया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 14 सितम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के बाद, ग्रीक के लेसबोस द्वीप पर मोरिया शरणार्थी शिविर में आग लगने से हुई बड़ी तबाही को याद किया और आग के शिकार लोगों के प्रति अपनी एकजुटता और निकटता व्यक्त की ।

उन्होंने संत पेत्रुस प्रांगण में एकत्रित लोगों से कहा कि वे 2016 की यात्रा को याद करते हैं, जब उन्होंने प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोमेव और एथेंस के महाधर्माध्यक्ष के साथ मिलकर” यूरोप में शरण मांगने वालों के लिए शरणार्थियों और प्रवासी महिलाओं एवं पुरुषों के लिए एक मानवीय और गरिमापूर्ण स्वागत सुनिश्चित करने हेतु अपील किया था।"

उन्होंने कहा, "मैं इन नाटकीय घटनाओं के सभी पीड़ितों के प्रति एकजुटता और निकटता व्यक्त करता हूँ।"

मोरिया शिविर

मोरिया शिविर में आग लगने से पहले, इसमें लगभग 13,000 लोग बहुत ही कठिन परिस्थितियों में रह रहे थे।

इस शिविर में भीड़ के कारण लोग बहुत गंदे माहौल में जी रहे थे और वैश्विक महामारी के दौरान सामाजिक दूरी को लागू करना लगभग असंभव बना दिया है।

द्वीप पर बीते सप्ताह की आग लगने के चार दिन बाद शनिवार को विरोध कर रहे प्रवासियों के एक समूह को तितर-बितर करने के लिए ग्रीक पुलिस ने आंसू गैस छोड़े।

हजारों पुरुष, महिलाएं और बच्चे अब बिना छत के खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं। यूनानी अधिकारी उनके लिए आश्रय खोजने हेतु प्रयासरत हैं।

संत पापा की 2016 की यात्रा

संत पापा फ्राँसिस ने अप्रैल 2016 में शिविर का दौरा किया था। वहां उन्होंने शरणार्थियों के लिए अपनी निकटता और एकजुटता व्यक्त करने और यूरोपीय संघ के शरण-नीति सुधार की तत्काल आवश्यकता के लिए फोन करने का अवसर लिया।

वे शरण चाहने वाले 3 सीरियाई परिवारों के साथ इटली लौट आये, जिनका स्वागत और निर्वाह वाटिकन द्वारा किया गया था, जबकि आतिथ्य और एकीकरण संत इजीदियो समुदाय द्वारा प्रदान किया गया था।

2019 के नवंबर और दिसंबर के बीच संत पापा की ओर से परमधर्मपीठीय कोष के दानदाता  कार्डिनल कोनराड क्रेजवस्की लेस्बोस द्वीप पर गए और 43 शरण चाहने वालों के साथ रोम वापस लौटे।

14 September 2020, 14:18