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संत पापा फ्राँसिस लेबनान पुरोहित और झंडा लिये प्रार्थना करते हुए संत पापा फ्राँसिस लेबनान पुरोहित और झंडा लिये प्रार्थना करते हुए 

लेबनान के साथ एकजुटता, उपवास-प्रार्थना दिवस की घोषणा, संत पापा

बेरुत के एक उर्वरक भंडारण में बड़े पैमाने पर विस्फोट के एक महीने बाद भी कष्ट में पड़े परेशान देश के साथ संत पापा फ्राँसिस ने अपनी और कलीसिया की एकजुटता व्यक्त की और 4 सितंबर, शुक्रवार को दुनिया भर के ख्रीस्तियों को प्रार्थना करने हेतु आमंत्रित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 02 सितम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान शुक्रवार 4 सितम्बर को लेबनान के लिए प्रार्थना और उपवास का दिन ठहराया। बेरुत में 4 अगस्त के घातक विस्फोट के अलावा, राष्ट्र अपने इतिहास में सबसे खराब आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। संत पापा ने कहा, "एक महीने बाद बेरूत शहर में आई त्रासदी के बाद, मेरे विचार अभी भी प्रिय लेबनान और विशेष रूप से परेशान आबादी के साथ हैं।"

महामारी की शुरुआत के बाद वाटिकन के संत दामासियुस प्रांगण में पहली बार सीमित संख्या में शामिल लोगों के साथ आम दर्शन समारोह को आयोजन किया गया।  संत पापा ने अपने देश के झंडे के साथ खड़े एक लेबनानी छात्र पुरोहित को अपने पास बुलाया। संत पापा झंडे के एक किनारे को पकड़े हुए थे जो मध्य पूर्व राष्ट्र के साथ निकटता को दर्शा रहा था। संत पापा ने कहा, "बार-बार होने वाली त्रासदियों के सामने, जो इस देश के निवासियों को पता है, हम भी उस अत्यधिक खतरे से अवगत हैं, जो देश के अस्तित्व को खतरे में डाल देता है।"

स्वतंत्रता और बहुलवाद

संत पापा ने कहा, "यह देखते हुए कि सौ वर्षों से लेबनान आशा का देश रहा है, इस देश को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता है।" संत पापा ने लेबनान के लोगों की ईश्वर के प्रति आस्था और अपने देश को "सहिष्णुता, सम्मान और सह-अस्तित्व का स्थान, क्षेत्र में अद्वितीय बनाने" की क्षमता के लिए प्रशंसा व्यक्त की।

संत पापा ने कहा "लेबनान स्वतंत्रता का एक संदेश है, जो पूर्व और पश्चिम दोनों के लिए बहुलवाद का उदाहरण है।" "देश की भलाई के लिए और दुनिया के लिए भी, हम इस विरासत को खोने की अनुमति नहीं दे सकते हैं। देश लंबे समय से संकट से जूझ रहा है।"

कोविद -19 से पहले भी, लेबनान अपने इतिहास में सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा था, जिसने पिछले साल बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को गति दी। आज, देश के लगभग 6 मिलियन लोग गरीबी रेखा से नीचे जी रहे हैं।

राजनीतिक और धार्मिक नेताओं से अपील

संत पापा फ्राँसिस ने "सभी लेबनानी लोगों को फिर से शुरू करने की आशा और आवश्यक शक्ति और ऊर्जा खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।" उन्होंने विशेष रूप से "राजनेताओं, धर्मगुरुओं से आग्रह किया कि वे पुनर्निर्माण के काम में ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ खुद को प्रतिबद्ध करें, पक्षपातपूर्ण हितों की स्थापना, आम भलाई और राष्ट्र के भविष्य को देखें।"

संत पापा ने क्षेत्रीय तनाव में शामिल हुए बिना गंभीर संकट से उभरने में मदद करने हेतु देश को समर्थन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नए सिरे से आमंत्रित किया।

उन्होंने बेरूत के लोगों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे विश्वास और प्रार्थना में धीरज बनायें रखें। "अपने घरों और अपनी विरासत को न छोड़ें, उन लोगों के सपनों को न छोड़ें जिन्होंने एक सुंदर और समृद्ध देश के भविष्य में विश्वास किया है।"

धर्माध्यक्षों पुरोहितों धर्मसमाजियों  और देश के लोगों को संबोधित करते हुए, उन्होंने उनसे अपील की कि वे  विशावसियों के दुख-दर्द को सहने हेतु प्रेरित करें। वे बिना किसी विलासिता के जाल में पड़े, गरीबी का जीवन जीयें। उन्होंने जोर देकर कहा, "अपने गरीब लोगों के साथ गरीबी का जीवन जीते हुए आप गरीबी और विनम्रता का उदाहरण देते हैं। अपने विश्वासियों और अपने लोगों को ऊपर उठने और एक नए पुनर्जन्म के नायक बनने में मदद करें।"

उन्होंने विश्व की कलीसियाओं के नेताओं से सद्भाव, सामान्य भलाई, वार्तालाप, शांति और बंधुत्व में एक साथ रहने की एक सच्ची संस्कृति के लिए काम करने का आग्रह किया, जो कि संत फ्रांसिस को बहुत प्रिय था। "इस आधार पर, हम सभी लेबनान में मौजूद सभी धार्मिक परंपराओं के बीच भाईचारे की भावना से ईसाई उपस्थिति और देश, अरब दुनिया और पूरे क्षेत्र में आपके अविवादित योगदान को सुनिश्चित कर सकते हैं।"

उपवास-प्रार्थना के साथ एकजुटता

अंत में,संत पापा फ्रांसिस ने शुक्रवार, 4 सितंबर को "हर किसी को लेबनान के लिए प्रार्थना और उपवास दिवस में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया।" उन्होंने कहा कि उस दिन, वे लेबनान लोगों के साथ अपनी निकटता और एकजुटता की अभिव्यक्ति के रूप में वेटिकन के राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो परोलिन को लेबनान भेजने का इरादा रखते हैं।

संत पापा ने अन्य कलीसियाओं और धार्मिक परंपराओं को भी इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, जिस तरह से वे प्रार्थना करना उपयुक्त समझते हैं।

02 September 2020, 14:26